Indore News: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या है SC/ST वर्ग के लोगों की राय?, जानिए
Supreme Court Decision On SC/ST Reservation: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जातियों का वर्गीकरण करने का अधिकार देने की बात कही है। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर SC/ST वर्ग के लोगों ने अपनी राय रखी है।
इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कैंपस में जब वन इंडिया हिंदी की टीम पहुंची तो वन इंडिया हिंदी की टीम ने SCवर्ग के लोगों से इस फैसले को लेकर बातचीत की जहां एसटीएससी वर्ग के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट केस फैसले पर अपनी राय रखी है।

प्रोफेसर दुर्गेश मालवीय बताते हैं कि, सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है। यह प्रतिनिधित्व का मामला है। प्रतिनिधित्व कोई गरीबी उन्मूलन प्रोग्राम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है। अनुसूचित जाति को जो प्रतिनिधित्व मिल रहा है, जिसे हम आरक्षण कहते हैं, उसे मूल रूप से वर्गीकृत किया जाए। SC की जो जातियां हैं, उसमें भी जो उपजातियां हैं, उनको किस प्रकार से रिजर्वेशन मिले, जिससे वह समाज की बेहतर स्थिति में आए। देश का संविधान लागू होने के बाद क्या आज तक SC/ST को उसका मूल अधिकार मिल पाया है। मैं यही कहूंगा कि, सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उसे उस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।
स्टूडेंट पवन अहिरवार बताते हैं कि अभी जो सुप्रीम कोर्ट ने फैसला लिया है उससे पहले उन्हें सोचना चाहिए था कि क्यों न जाति गणना हो क्योंकि तभी हम यह पता कर पाएंगे कि किसके डिग्री के लोगों ने कितनी तरक्की की है हमें ही यही नहीं पता कि कितने लोगों ने तरक्की की है कितनों ने नहीं की है आपने एक जजमेंट निकाल दिया है जिसे हम सही नहीं मानते, मेरा मानना है कि, सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर एक बार फिर सोच और फिर से इस पर निर्णय लिया जाए।
LLB के छात्र राजेंद्र डाबर बताते हैं कि, इस पर सुप्रीम कोर्ट को पुनर्विचार करना चाहिए। संविधान में आरक्षण को जैसा दर्शाया गया है, लेकिन आज भी देखा जाए तो जिन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए उन्हें नहीं मिला।
छात्र बाबूलाल बघेल बताते हैं कि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए। एडवोकेट रविंद्र रावत बताते हैं कि, SC-ST के लिए सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है। वह सही नहीं है। हम चाहते हैं, सबसे पहले जातिगत जनगणना होनी चाहिए, उसके बाद हम जिस अधिकार की बात करते हैं। वह अधिकार हमें मिलना चाहिए उसके बाद जो आरक्षण के लिए फैसला लिया है, वह करना चाहिए।
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