Pallavi Vyas Shanta Farms : सास की मौत ने बहू पल्लवी को कैसे बनाया बिजनेसवुमन, टर्नओवर ₹ 5 करोड़

सास की मौत ने बहू पल्लवी व्यास को कैसे बनाया बिजनेसवुमन

इंदौर, 1 जून। अपनों की मौत हमें अक्सर तोड़ देती है, मगर इंदौर की पल्लवी व्यास ने उस दुख की घड़ी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और आज एक सफल बिजनेसवुमन के रूप में पहचान बना चुकी हैं। अब पल्लवी न केवल लाखों रुपए की कमाई कर रही बल्कि लोगों की जान भी बचा रही हैं।

राजस्थान की रहने वाली हैं पल्लवी

राजस्थान की रहने वाली हैं पल्लवी

दरअसल, पल्लवी व्यास मूलरूप से राजस्थान के अजमेर जिले की ब्यावर की रहने वाली हैं। चित्तौड़गढ़ संजय व्यास से शादी हुई। लंबे समय से इनका परिवार इंदौर में रह रहा है। संजय व्यास इंदौर हाईकोर्ट में नामी वकील हैं। वर्ष 2009 तक सब कुछ ठीक चल रहा था। फिर पता चला कि सास शांता को कैंसर है। उनका खूब इलाज करवाया, मगर ना कहीं दवा लगी ना ही कोई दुआ काम आई।

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    सालभर चला सास का इलाज

    सालभर चला सास का इलाज

    वन इंडिया हिंदी से बातचीत में पल्लवी व्यास बताती हैं कि सास शांता का सालभर इलाज चला। साल 2010 में सास ने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन के बाद पल्लवी ने उनकी मौत की असली वजह जाननी चाही। इलाज करने वालों डॉक्टरों से जानकारी हासिल की। पता चला कि शांतां के बीमारी की चपेट में आने की असली वजह कैमिकल और पेस्टीसाइज युक्त खाद्य सामग्री थी।

     फिर लोगों को बचाने की ठानी

    फिर लोगों को बचाने की ठानी

    सास की मौत के बारे में चौंकाने वाली बात चलने के बाद पल्लवी ने तय किया कि वो ऐसा काम करेंगी ताकि कोई और व्यक्ति उनकी सास की तरह कैमिकल और पेस्टीसाइज की वजह जान गंवाने को मजबूर ना हो। इसी सोच के साथ पल्लवी ने सास के नाम से शांता फार्म्स खोलने की तैयारियां शुरू की।

    इंदौर से 70 किमी दूर खोली डेयरी

    इंदौर से 70 किमी दूर खोली डेयरी

    पल्लवी बताती हैं कि हम लोगों को कैमिकल और पेस्टीसाइज फ्री दूध व उनसे बने प्रोडेक्ट उपलब्ध करवाना चाहते थे। इसलिए ऐसी जमीन की तलाश में थे, जिसमें कभी रसायन युक्त खेती नहीं हुई हो। काफी तलाश के बाद इंदौर से 70 किमी दूर करही और महेश्वर के बीच ऐसी जमीन खरीद पाए। वर्तमान में यहां पर डेयरी उद्योग के साथ जैविक खेती भी कर रहे हैं।

    अत्याधुनिक मशीनों से होता है काम

    2016 में छह गायों से शुरू हुई शांता डेयरी में वर्तमान में 250 गाय हैं।

    यहां दुग्ध उत्पादन से लेकर बोतल में पैक होने तक की पूरी प्रोसेस मानव रहित है। सारा अत्याधुनिक मशीनों से होता है। यही नहीं बल्कि गायों के गले में एक खास सेंसर भी लगाया गया है। उससे गाय की लगातार मोनिटरिंग की जाती है। यदि गाय ने खाना कम खाया या पानी कम पिया तो उसका अलर्ट मिल जाता है।

    शांता डेयरी फार्म इंदौर एमपी

    शांता डेयरी फार्म इंदौर एमपी

    पल्लवी बताती हैं कि उनके शांता फार्म्स से दो हजार अन्य किसान भी जुड़े हुए हैं। वे जैविक खेती के जरिए जो उत्पाद तैयार करते उनकी मार्केटिंग में शांता फार्म्स मदद करता है। शांता डेयरी में दूध व घी पैक करके इंदौर के 700 घरों में बेचा जाता है। यहां के प्रोडेक्ट यूएसए तक को एक्सपोर्ट किए जाते हैं। शांता फार्म्स का सालाना टर्नओवर करीब 5 करोड़ रुपए है।

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