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Indore News: इंदौर में कांग्रेसियों ने बीच चौराहे पर फोड़े पानी के मटके, क्यों, जानिए

मध्यप्रदेश में इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव के नेतृत्व में कलेक्टर चौराहा मोती तबेला चौराहा हरसिद्धि पंढरीनाथ छत्रीपुरा छत्रीबाग आदि क्षेत्रों से पदयात्रा निकल कर शहर भर में पानी की समस्याओं को लेकर शहर कांग्रेस कमेटी एवं बस्ती की महिलाओं द्वारा नगर निगम महापौर एवं भाजपा परिषद के खिलाफ मटके फोड़े गए।

पानी को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में पदयात्रा निकाली गई, और उसके बाद जगह-जगह मटके फोड़े गए नगर निगम परिषद के खिलाफ नारे लगाए गए।

Indore

नगर निगम महापौर परिषद पानी दो, पानी दो आदि के नारे लगाए गए, जहां शहर के सभी 85 वार्डों में आम जनता पानी के लिए तरस रही है, पानी के लिए जगह-जगह विभिन्न बस्तियों में पानी की समस्या मची हुई है, और नगर निगम महापौर एवं भाजपा परिषद मस्त है, जनता त्रस्त है, शहर के 40% से ज्यादा बोरिंग सूख गए हैं। कई जगह नर्मदा लाइन तो डाल दी गई है, मगर पानी इन लाइनों में नहीं आ रहा है, और आम जनता को नर्मदा लाइन का बिल जरुर पहुंचा जा रहा है, पानी के टैंकर 85 वार्डों में कम पड़ रहे हैं। वह भी भेदभाव किया जा रहा है। कांग्रेस पार्षदों के क्षेत्र में पानी की समस्या बनी हुई है, एवं जहां विभिन्न क्षेत्रों एवं वार्डों में कांग्रेस पार्टी को जिन मतदाताओं ने वोट दिए थे, वहां भेदभाव भाजपा परिषद द्वारा एवं भाजपा पार्षदों द्वारा किया जा रहा है। कई क्षेत्रों में नर्मदा की पाइपलाइन नहीं डाली गई है, जो यह क्षेत्र बोरिंग और टैंकरों के भरोसे पर हैं, जहां कई बोरिंग सुख चुके हैं और पानी के टैंकर नहीं पहुंचाए जा रहे हैं।

यादव ने कहा है की, लोग सुबह से रात तक खाली बर्तन लेकर पीने के पानी के लिए भटकते रहते हैं। जनप्रतिनिधि, अधिकारी सिर्फ घोषणा ही करते हैं जबकि जमीनी हकीकत अलग है। वैसे भी एक दिन छोड़कर नर्मदा का पानी दिया जाता है और पैसे पूरे माह के लिए जाते हैं। होटल, ढाबों, अस्पतालों, इमारतों, निर्माण स्थलों में पानी बेचा जा रहा है,निय गर्मी करोडों रूपये हर साल पानी पर ही खर्च हो रहा है। अगले ढाई से तीन माह तक शहर में जलसंकट रहेगा।

यादव ने कहा है की, बार-बार बिजली जाने से भीषण गर्मी में लोगों के पसीने छूट रहे हैं, साथ ही मच्छरों के प्रकोप से आम जनता परेशान है। वहीं दूसरी तरफ पानी की किल्लत अलग बढ़ रही है। ऐसे में नल में नर्मदा का साफ पानी आने के बजाय ड्रेनेज मिला काला और मटमैला पानी आ रहा है, जो न तो पीने के काम आए और न ही अन्य किसी उपयोग में ले सकते हैं। गर्मी में पानी की किल्लत झेल रहे शहरवासी गंदे पानी की समस्या से परेशान हैं। इसकी वजह शहर में बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण कार्य है, क्योंकि निर्माण कार्य करने के दौरान खुदाई करते समय नर्मदा और ड्रेनेज की पाइप लाइन को फोड़ दिया जाता है। इस पर ध्यान न देने के कारण नर्मदा और ड्रेनेज का पानी मिलकर लोगों के नलों में आता है। जिन क्षेत्रों में ड्रेनेज की पाइप लाइन नहीं है, वहां पर ड्रेनेज का पानी सड़कों पर बहता और एक जगह जमा हो जाता है। यहीं पानी जमीन में उतर जाता और आसपास के बोरवेल के पानी को दूषित करता है।

कई क्षेत्रों में पानी की पाइप लाइनें पुरानी होने के साथ सड़ गई या फिर टूट गई हैं, जिन्हें बदलना बहुत जरूरी है। नल में गंदा पानी आने की शिकायत नगर निगम मुख्यालय से लेकर जोनल ऑफिस और सीएम हेल्पलाइन सहित जलप्रदाय विभाग के अफसरों तक को की जाती है, मगर शिकायतों का निराकरण समय रहते नहीं होता और मुसीबत आमजन की हो जाती है। वैसे, शहर में लोगों को पीने के लिए नर्मदा का साफ पानी देने की जिम्मेदारी नगर निगम जलप्रदाय, विभाग की है, मगर विभाग में तैनात डिग्रीधारी इंजीनियर अपनी यह जिम्मेदारी ठीक ढंग से नहीं निभाते हैं।

सवाल तो यह है कि, शहर में कहीं पर भी नलों में गंदा पानी न आए, इसको लेकर जलप्रदाय विभाग के अफसरों को सख्त आदेश दिए गए हैं, तो फिर इस आदेश का पालन क्यों नहीं होता? अफसर अपनी जिम्मेदारी निभाने में लेटलतीफी क्यों करते हैं? नलों में गंदा पनी न आए इसको लेकर ठोस कार्ययोजना क्यों नहीं बनती ?. पानी और ड्रेनेज की नई लाइनें बिछाने के साथ पुरानी जर्जर लाइनों को क्यों नहीं बदला जाता? पानी सप्लाय को लेकर निगम जलप्रदाय विभाग थोड़ी ईमानदारी से काम कर ले तो जनता को काफी राहत मिल जाए।

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