MP : कमलनाथ के सम्मान से नाराज हुए सिख कीर्तनकार, शुरू हुआ सियासत का सिलसिला
प्रकाश पर्व के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ सियासत का गढ़ कहे जाने वाले शहर इंदौर के दौरे पर थे, जहां उन्होंने खालसा स्टेडियम में सजाए गए दीवान पर जाकर मत्था टेका और सिख समाजजनों को संबोधित किया। इस दौरान आयोजकों ने कमलनाथ का सम्मान करते हुए उन्हें सरोपा सौंपा था। वहीं कमलनाथ के आयोजन से जाते ही पंजाब से आए कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरी ने कमलनाथ के गुरूद्वारे आने और सम्मान करने पर विरोध दर्ज कराते हुए आयोजकों को जमकर खरी खोटी सुनाई थी। इतना ही नहीं कानपुरी तो आयोजकों पर इतने गुस्सा हुए की उन्होंने दोबारा इंदौर ना आने की बात तक कह डाली। वहीं अब इस पूरे मामले पर सियासत का सिलसिला शुरू हो चुका है।

कुछ ऐसा है पूरा मामला
दरअसल, ये पूरा मामला मंगलवार का है, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से जुड़ी तैयारियों का जायजा लेने प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर पहुंचे थे, तभी वे प्रकाश पर्व होने के चलते खालसा स्टेडियम में सजाए गए दीवान पर मत्था टेकने और सिख समाज के आयोजन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। उसी वक्त आयोजकों ने कमलनाथ का आभार जताते हुए सरोपा सौंप उनका सम्मान कर दिया। बस फिर क्या था, कमलनाथ के आयोजन स्थल से जाते ही पंजाब से आए कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरी ने आयोजकों को खरी खोटी सुनाते हुए 1984 में सिखों को बर्बाद करने वाले का गुण गान बंद करने की बात कही। इतना ही नहीं कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरी आयोजकों से इतने नाराज हुए की उन्होंने दोबारा इंदौर ना आने की बात तक कह डाली।
प्रभारी मंत्री ने की कीर्तनकार से प्रार्थना
प्रदेश के गृह और इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि, मेरा परम आदरणीय कीर्तनकार जो हमारे मनप्रीत सिंह जी हैं कानपुरी, उनसे विनम्र आग्रह है इंदौर के प्रभारी मंत्री होने के नाते आग्रह कर रहा हूं, कि कुछ लोगों के कुकृत्य की सजा सभी को नहीं मिलना चाहिए। इंदौर की कोई गलती नहीं है, जिस तरह से अपने पापों को ढकने के लिए कुछ लोग चले गए थे प्रायोजित करके, उन लोगों की गलती है ये, आपका मैंने वर्जन सुना टायर डालकर जलाने वाला भी, सरोपा भेंट करने वाला भी, लेकिन चंद लोगों की गलती का खामियाजा पूरा प्रदेश ना भुगते। मेरा विनम्र प्रार्थना है उनसे आपकी ज्ञानवाणी का लाभ प्रदेश को और इंदौर को मिलना चाहिए, इसलिए आप अपने निर्णय पर पुनर्विचार करिए।












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