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Indore Temple Accident: शुक्र रहा कि भंडारे के वक्त नहीं हुआ हादसा, नहीं तो लाशों से भर जाती बावड़ी

एमपी के इंदौर मंदिर हादसे में एक बोलती तस्वीर भी चर्चा में हैं। घटना स्थल वाली जगह पर भगवान की मूर्तियां विराजमान है। उस हिस्से से एक तिनका तक नहीं हिला। वही लोगों ने थोड़ी देर बाद हादसे की कल्पना भी बताई।

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Indore beleshwar Mahadev Temple stepwell collapse: एमपी के इंदौर में हुए बावड़ी हादसे की कई तस्वीरें सामने आई। बेलेश्वर महादेव मंदिर में जहां हादसा हुआ, उसमें जान गंवाने वाले परिवारों में दुःख का पहाड़ फूटा हैं। 36 मृतक और करीब डेढ़ दर्जन घायल वो लोग थे, जो हवन कार्यक्रम के दौरान बावड़ी के स्लैब पर मौजूद रहे। बताया गया कि हवन-आरती के बाद ही भंडारे के आयोजन में और भीड़ जुटने वाली थी। चश्मदीदों ने बताया कि भंडारे के वक्त यदि हादसा हुआ होता तो बावड़ी लाशों से लबालब भर जाती थी। घटना स्थल की वो तस्वीर भी बोल रही है कि 'बच गए भगवान'।

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मध्य प्रदेश के इंदौर स्नेह नगर स्थित बेलेश्वर महादेव मंदिर बावड़ी हादसे को लोग शायद ही कभी भूल पाए। हादसे में मृतकों और घायलों की जो संख्या दर्ज हुई, वह हवन कार्यक्रम के वक्त की थी। सदर बाजार के रहने वाले कुछ लोग भी इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते थे। तरुण व्यास ने बताया कि हवन-आरती कार्यक्रम के बाद हादसे वाले ही दिन भंडारे का आयोजन भी था। जिसमें और भीड़ जुटने वाली थी। तरुण का कहना है कि यदि भंडारे के वक्त यह हादसा हुआ होता, तो अनुमान लगाया जा सकता है कि मौत का मंजर और कितना भयानक होता। भीड़ बढ़ती और उसी वक्त स्लैब ढहता तो वह बावड़ी लाशों से लबालब भर जाती।

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जिन लोगों के घर के सदस्यों ने इस हादसे में जान गंवाई, उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे खुशियों का संसार खत्म हो गया। मौत के मुंह से बचे लोग घटना को याद कर सिहर उठते हैं। चश्मदीदों ने यह भी बताया कि लगभग आधा सैकड़ा लोग ढहे स्लैब के सामने और किनारे खड़े थे। वो किस्मत वाले रहे, जो बच गए। वही घटना स्थल की तस्वीर जिसमें भगवान की मूर्तिया नजर आ रही हैं। यह बोलती तस्वीर है। ठीक सामने और बाएं तरफ पत्थर के प्लेटफॉर्म पर भगवान की मूर्तियां विराजमान हैं। इस जगह का एक तिनका भी नहीं हिला। इसे देखकर लोग यही कहते नजर आए कि 'बच गए भगवान'।

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कई बार ऐसी घटनाओं के लिए इंसान खुद परिस्थियाँ निर्मित कर देते है तो कई बार नियति वजह बन जाती हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल नवरात्रि के वक्त हवन का निर्माणाधीन नए मंदिर के सामने खुली जगह में होता था। इस बार पहला मौका था जब मंदिर के अंदर बावड़ी के स्लैब पर आयोजन करने का फैसला लिया गया। वहा सामने रखी मूर्तियां नए मंदिर में शिफ्ट होना थी। लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि हवन का स्थान बदला और बड़ा हादसा हो गया।

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फिलहाल अब मंदिर को सील कर दिया हैं। प्रशासन द्वारा जांच पूरी होने तक यहां लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। कलेक्टर इलैयाराजा टी. के मुताबिक विशेषज्ञ इंजीनियर की टीम से बावड़ी के स्लैब की भी जांच कराई जाएगी। पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि उसके निर्माण में किस तरह के मटेरियल का उपयोग हुआ था। उसकी गुणवत्ता कैसी थी? साथ ही स्लैब ढहने की असल वजह क्या रही, इसकी भी पड़ताल कराई जाएगी। उधर निगम प्रशासन भी इस मंदिर और भवन निर्माण की अनुमति को लेकर भी जांच कर रहा हैं।

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