Crorepati Beggar : भिखारी रमेश यादव निकला करोड़पति, बंगले में वापसी पर परिजनों ने रखी यह शर्त?
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के किला मैदान इलाके में कालका माता मंदिर के पास भीख मांग रहे बुजुर्ग रमेश यादव की हकीकत जानकर हर कोई हैरान रह गया। यह भिखारी करोड़पति निकला। इसके पास आलीशान बंगला है। करोड़ों के मालिक रमेश का इस कदर दाने-दाने और पाई-पाई को मोहताज होने की पूरी कहानी चौंकाने देने वाली है।
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कौन हैं बुजुर्ग रमेश यादव?
बता दें कि रमेश यादव इंदौर के ही रहने वाले हैं। ये अविवाहित हैं। इनके पास आलीशान बंगला है, जिसमें साज सज्जा के साथ तमाम भौतिक सुविधाएं भी हैं। चार लाख का सजावट का सामान लगा हुआ है। परिवार में भाई-भतीजे हैं। एनजीओ ने जब रमेश के भाई-भतीजों से सम्पर्क किया तो उन्होंने उनको पहचान भी लिया।

रमेश यादव कैसे बने भिखारी?
रमेश यादव करोड़पति होने के साथ-साथ आदतन शराबी हैं। इन्हें वर्षों पहले शराब की ऐसी लत लगी कि देखते ही देखते भीख मांगकर पेट भरने को मजबूर हो गए। परिजनों ने भी इनसे किनारा कर लिया। कालका माता मंदिर के आस-पास भीख मांगना शुरू कर दिया।

कैसे पता चली रमेश यादव की पूरी कहानी?
दरअसल, इन दिनों इंदौर शहर को बैगर फ्री सिटी बनाने के लिए केंद्र की दीनबंधु पुनर्वास योजना के तहत की मुहिम चल रही है। निराश्रित वृद्ध और भिक्षुक लोगों के पुनर्वास के लिए केंद्र खोला गया है। एनजीओ आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसायटी की ओर से शहर के अलग-अलग इलाकों से भिखारियों को रेस्क्यू कर पुनर्वास केंद्र शिफ्ट किया जा रहा है। इसी मुहिम के तहत रमेश यादव की कहानी सामने आई है।

शराब की लत छोड़ने का आश्वासन
एनजीओ की रुपाली जैन कहती हैं कि किला मैदान इलाके से भिखारी रमेश यादव को शिविर में लाया गया था। यहां उनकी देखभाल शुरू की। भरपेट भोजन दिया। जब उन्होंने कहानी बयां की तो हर कोई चौंक गया। शराब छुड़वाने के लिए उनकी काउंसलिंग भी की जा रही है। उन्होंने शराब छोड़ने का आश्वासन भी दिया है। परिवार भी उन्हें शराब छोड़ने की शर्त पर ही अपनाने का तैयार है।

जब भिखारी निकला डीएसपी
रमेश यादव से पहले मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मनीष मिश्रा की ऐसी चौंकाने वाली कहानी सामने आ चुकी है। मनीष मिश्रा मध्य प्रदेश पुलिस में शॉर्प शूटर हुआ करते थे। मानसिक स्थिति गड़बड़ाने पर पत्नी व परिवार वालों ने साथ छोड़ दिया। काफी साल से भीख मांगने को मजबूर मनीष नवंबर 2020 में ग्वालियर में झांसी रोड पर बंधन वाटिका के पास फुटपाथ पर सो रहे थे।

साथी पुलिस अधिकारी ने ढूंढ़ा
तभी वहां से मध्य प्रदेश पुलिस के डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर व विजय सिंह भदौडरिया अपनी गाड़ी से निकल रहे थे। उन्होंने ठंड से ठिठुर रहे इस भिखारी की इंसानियत के नाते मदद करने के लिए गाड़ी रोकी थी। फिर बातों ही बातों में पता चला कि भिखारी मनीष मिश्रा उन्हीं के बैच का पुलिस अधिकारी है। फिर इनका भी एनजीओ ने रेस्क्यू किया।
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