CM Shivraj ने जीता आदिवासीयों का दिल, भगोरिया में दिखे अलग अंदाज के क्या हैं मायने, जानिए?
मध्यप्रदेश में भगोरिया मेले को देखने दूर-दूर से लोग आदिवासी अंचलों में पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि, आदिवासी अंचलों में अबकी बार भगोरिया पर्व पर सीएम शिवराज का अलग अंदाज भी देखने मिला.

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मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों में इन दिनों भगोरिया पर्व का उत्साह देखने मिल रहा है, जहां आदिवासी समाजजन भगोरिया पर्व पर लगे मेलों में शामिल होते नजर आ रहे हैं। वहीं भगोरिया पर्व के बीच गैर निकलने का सिलसिला भी जारी है, जहां बीजेपी से जुड़े जनप्रतिनिधि और नेता भगोरिया पर्व पर गैर निकालते दिखाई दे रहे हैं। भगोरिया पर्व पर भगोरिया मेले को देखने दूर-दूर से लोग आदिवासी अंचलों में पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि, आदिवासी अंचलों में अबकी बार भगोरिया पर्व का उत्साह देखते ही बन रहा है।

सीएम शिवराज ने जीता आदिवासीयों का दिल
हाल ही में सीएम शिवराज सिंह चौहान अलीराजपुर जिले में भगोरिया मेले का हिस्सा बने थे, जहां सीएम शिवराज सिंह चौहान का अलग अंदाज भी देखने मिला था। इस दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासी वस्त्र धारण किए थे, तो वहीं हाथों में तीर कमान भी ले रखा था। साथ ही उन्होंने काला चश्मा भी पहन रखा था। आदिवासी परंपरागत वस्त्रों में सीएम शिवराज सिंह चौहान बेहद ही खूबसूरत दिखाई दे रहे थे। इतना ही नहीं सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भगोरिया मेले में आदिवासी समाज जनों से मुलाकात कर उनका हालचाल भी जाना। इस दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी दिखाई दे रहे थे।

भगोरिया जनजातीय परंपरा का अभिन्न उत्सव
अलीराजपुर जिले में आयोजित 'भगोरिया उत्सव' में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सहभागिता की है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, सांसद गुमान सिंह डामोर एवं अन्य गणमान्य साथी एवं नागरिक उपस्थित रहे। सीएम शिवराज ने कहा कि, जनजातीय संस्कृति और परम्पराएँ अद्भुत हैं। मैं इन्हें प्रणाम करता हूँ। भगोरिया जनजातीय परंपरा का अभिन्न उत्सव है। अब हम फैसला कर रहे हैं कि भगोरिया को राजकीय पर्व और सांस्कृतिक धरोहर माना जाएगा। हमारे जनजातीय पर्व और उनकी लोक कलाएँ बनीं रहें, उनका उत्सव और आनंद बना रहे इसके लिए सरकार भी इन पर्वों के आयोजन में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

इस तरह मनाया जाता है पर्व
आदिवासी इलाकों में मनाया जाने वाला भगोरिया पर्व पूरे सप्ताह भर चलता है, जिसमें आदिवासी संस्कृति और कला के रंग बिखरते हैं।भगोरिया पर्व होली से पहले मनाया जाता है, जिसमें आदिवासी युवक-युवतियां पारंपरिक पोशाक में सज-धजकर इस मेले में पहुंचते हैं, और ढोल-मांदल बजाते हुए समूह में नाचते-गाते हैं। बदलते वक्त के साथ अब भगोरिया मेले में युवक-युवतियां मॉर्डन पहनावे में भी नजर आते हैं। वहीं भगोरिया मेले में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता प्रबंध भी पुलिस प्रशासन की ओर से किए गए हैं।
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