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'अमीरों का फैंसी खिलौना', Deepinder Goyal के सिर पर चिपके Temple डिवाइस पर क्या बोले डॉक्टर? बताई असली सच्चाई

Zomato Deepinder Goyal Temple: राज शमानी के चर्चित पॉडकास्ट Figuring Out में जब Zomato और Eternal के फाउंडर दीपिंदर गोयल नजर आए, तो चार घंटे की बातचीत से ज्यादा चर्चा उनके सिर के एक छोटे से गैजेट की होने लगी। कैमरा जैसे ही उनके टेंपल यानी कनपटी की तरफ गया, सोशल मीडिया पर सवालों की बाढ़ आ गई। कोई उसे च्युइंग गम बता रहा था, कोई चार्जिंग पैड और कोई मजाक में एक्सटर्नल SSD। लेकिन हकीकत मीम्स से कहीं ज्यादा गंभीर और दिलचस्प है।

यह कोई मजाकिया गैजेट नहीं, बल्कि एक एक्सपेरिमेंटल ब्रेन मॉनिटरिंग डिवाइस है, जिसका नाम है Temple। इसने न सिर्फ इंटरनेट को उलझाया, बल्कि डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स के बीच भी बहस छेड़ दी है। ऐसे में आइए जानते हैं इस डिवाइस को लेकर डॉक्टर एक्सपर्ट क्या कहते हैं।

Zomato Deepinder Goyal Temple

🟡 क्या है दीपिंदर गोयल के सिर पर लगा डिवाइस?

🔹 दीपिंदर गोयल के सिर पर लगा यह मेटैलिक क्लिप जैसा डिवाइस असल में एक रिसर्च प्रोटोटाइप है। इसका मकसद दिमाग में ब्लड फ्लो यानी सेरेब्रल ब्लड फ्लो को रियल टाइम में मॉनिटर करना है। इसे टेंपल एरिया पर लगाया जाता है, जहां से यह ब्रेन में जाने वाले खून के प्रवाह से जुड़े संकेत रिकॉर्ड करने की कोशिश करता है।

🔹 यह कोई Zomato का प्रोडक्ट नहीं है और न ही अभी आम लोगों के लिए बाजार में उपलब्ध है। Temple एक अलग हेल्थ-टेक स्टार्टअप का प्रोजेक्ट है, जो दीपिंदर गोयल की निजी पहल Continue Research से जुड़ा हुआ है। गोयल खुद इसे करीब एक साल से टेस्ट कर रहे हैं।

🔹 दीपिंदर गोयल का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ दिमाग में ब्लड फ्लो धीरे-धीरे कम होता है। कई स्टडीज के हवाले से वह कहते हैं कि हेल्दी एडल्ट्स में भी हर साल 0.3 से 0.74 प्रतिशत तक सेरेब्रल ब्लड फ्लो घटता है और अल्जाइमर जैसी बीमारियों में यह गिरावट और तेज होती है।

🔹 Temple का मकसद इसी बदलाव को लगातार ट्रैक करना है। गोयल इसे किसी चमत्कारी इलाज की तरह नहीं, बल्कि एक रिसर्च टूल के रूप में पेश करते हैं, जो ब्रेन हेल्थ, एजिंग और कॉग्निटिव फंक्शन को समझने में मदद कर सकता है।

🟡 Gravity Ageing Hypothesis क्या है?

Temple के पीछे एक बड़ा आइडिया है, जिसे गोयल ने Gravity Ageing Hypothesis नाम दिया है। उनके मुताबिक दशकों तक गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रैविटी के खिलाफ खून को दिमाग तक पहुंचाने में दिल पर लगातार दबाव पड़ता है, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।

गोयल साफ कहते हैं कि ग्रैविटी को वह एजिंग का अकेला कारण नहीं बता रहे, बल्कि एक संभावित फैक्टर के तौर पर देख रहे हैं। उनका दावा है कि यह विचार 100 से ज्यादा वैज्ञानिक शोध पत्रों और दो साल की स्टडी पर आधारित है।

🟡 Temple डिवाइस को लेकर डॉक्टरों ने क्या कहा?

Temple को लेकर मेडिकल एक्सपर्ट्स काफी सतर्क नजर आते हैं। एनडीटीवी के मुताबिक झिनोवा शाल्बी हॉस्पिटल (मुंबई) न्यूरोसर्जन डॉ विष्णुनाथन अय्यर का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यही है कि डिवाइस कहां लगाया गया है। उनके मुताबिक टेंपल पर लगा सेंसर सिर्फ सतही संकेत पकड़ सकता है।

उनका कहना है कि MRI जैसी जांच ही सीधे तौर पर ब्रेन ब्लड फ्लो को माप सकती है। कोई छोटा वियरेबल गैजेट उसकी जगह नहीं ले सकता। ऐसे डिवाइस पल्स या स्किन से जुड़े बदलाव तो रिकॉर्ड कर सकते हैं, लेकिन इसे असली सेरेब्रल सर्कुलेशन नहीं कहा जा सकता। डॉ अय्यर के अनुसार जब तक मजबूत क्लिनिकल सबूत न हों, इसे मेडिकल डिवाइस नहीं बल्कि एक वेलनेस एक्सपेरिमेंट ही समझना चाहिए।

🟡 'बिलेनियर और अमीरों के फैंसी खिलौने' वाला तंज

Temple पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया AIIMS दिल्ली के डॉ दत्ता की रही। उन्होंने X पर लिखा कि इस डिवाइस की फिलहाल कोई वैज्ञानिक मान्यता नहीं है और लोग अपने मेहनत की कमाई ऐसे फैंसी खिलौनों पर बर्बाद न करें, जिन्हें अमीर लोग अफोर्ड कर सकते हैं।

डॉ दत्ता ने यह भी सवाल उठाया कि टेंपोरल आर्टरी को ब्रेन सर्कुलेशन का प्रतिनिधि कैसे माना जा सकता है। उनके मुताबिक इसमें कई कन्फाउंडिंग फैक्टर्स होते हैं और ऐसे दावे साबित करने में सालों की रिसर्च लगती है।

🟡'अभी साइंस पूरी तरह साबित नहीं'

NIIMS मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुमोल रत्ना भी इसी तरह की राय रखते हैं। वह मानते हैं कि सेरेब्रल ब्लड फ्लो ब्रेन हेल्थ के लिए अहम है, लेकिन इसे मापने के लिए MRI या fNIRS जैसी जटिल और वैलिडेटेड तकनीकों का इस्तेमाल होता है।

उनका कहना है कि यह दावा कि ग्रैविटी समय के साथ दिमाग में खून के प्रवाह को इतना प्रभावित करती है कि एजिंग तेज हो जाए, अभी एक हाइपोथेसिस है, न कि मेनस्ट्रीम मेडिकल साइंस से साबित तथ्य। डॉ रत्ना के मुताबिक बिना पर्याप्त टेस्टिंग के ऐसे गैजेट की सिफारिश करना जल्दबाजी होगी।

🟡 ग्रैविटी से एजिंग, न्यूरोलॉजिस्ट की असहमति

आकाश हेल्थकेयर के न्यूरोलॉजी HOD डॉ मधुकर भारद्वाज ग्रैविटी एजिंग थ्योरी से असहमत हैं। उनके अनुसार ब्रेन एजिंग के पीछे न्यूरॉन्स का नुकसान, प्रोटीन का जमा होना, सूजन और मेटाबॉलिक बदलाव जैसे कारण होते हैं।

वह उदाहरण देते हैं कि माइक्रोग्रैविटी में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स भी उम्र बढ़ने से नहीं बचते। ग्रैविटी का असर मुख्य रूप से पोस्चर और बैलेंस पर पड़ता है, न कि बायोलॉजिकल एजिंग पर।

🟡 Temple कब लॉन्च होगा?

फिलहाल Temple बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है। न इसकी कीमत घोषित हुई है और न ही कोई पुख्ता लॉन्च टाइमलाइन। सोशल मीडिया पर सिर्फ एक टीजर और इंस्टाग्राम पेज सामने आया है, जिसके हजारों फॉलोअर्स हो चुके हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक दीपिंदर गोयल Continue Research में करीब 25 मिलियन डॉलर यानी लगभग 200 करोड़ रुपये निवेश कर चुके हैं। Temple स्टार्टअप के लिए 50 मिलियन डॉलर के सीड राउंड की भी चर्चाएं हैं, जिसमें बड़े निवेशकों की दिलचस्पी बताई जा रही है।

🟡 फिलहाल नतीजा क्या निकला?

Temple आज की तारीख में एक रिसर्च प्रोटोटाइप है, कोई कंज्यूमर गैजेट नहीं। ब्रेन ब्लड फ्लो पर रिसर्च जरूरी और अहम है, लेकिन डॉक्टरों की राय में मौजूदा वियरेबल टेक्नोलॉजी अभी मेडिकल-ग्रेड दावे करने से काफी दूर है।

राज शमानी के पॉडकास्ट में दिखा यह छोटा सा डिवाइस भले ही मीम्स और चर्चाओं का कारण बन गया हो, लेकिन असल में इसने ब्रेन हेल्थ और एजिंग पर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है। Temple भविष्य में क्रांतिकारी साबित होगा या सिर्फ एक महंगा प्रयोग बनकर रह जाएगा, इसका जवाब आने वाले सालों की साइंस ही दे पाएगी।

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