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Jagan Reddy के खेमा बदलते ही हो गया खेल, राज्यसभा से सफाए की ओर YSRCP! NDA को फायदा?

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के दो राज्यसभा सांसदों ने गुरुवार (29 अगस्त, 2024) को संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ समय में वाईएसआरसीपी के ऐसे सांसदों की संख्या और बढ़ सकती है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के दो राज्यसभा सांसदों मोपीदेवी वेंकटरमना और बीड़ा मस्तान राव ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इन दोनों सांसदों का कार्यकाल अभी काफी लंबा था, फिर भी उन्होंने इससे पहले ही अपनी संसद सदस्यता छोड़ने का फैसला किया है।

jagan mohan reddy

टीडीपी में शामिल हो सकते हैं वेंकटरमना
वेंकटरमना का कार्यकाल 21 जून, 2026 तक था और राव 21 जून, 2028 को रिटायर होने वाले थे। ऐसी खबरें हैं कि वेंकटरमना शुरू से राज्यसभा नहीं जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह पद लेना पड़ा था। माना जा रहा है कि वह जल्द ही आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी में शामिल हो सकते हैं।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 6 और राज्यसभा सांसद दे सकते हैं इस्तीफा
हालांकि, बीड़ा मस्तान ने अभी तक अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है। लेकिन, मीडिया से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह तो अभी शुरुआत है। जल्द ही जगन मोहन रेड्डी की पार्टी के 6 और राज्यसभा सांसद अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं।

राज्यसभा से वाईएसआरसीपी का होगा सफाया?
राज्यसभा में वाईएसआरसीपी के कुल 11 सांसद हैं, जिनमें से 2 ने गुरुवार को इस्तीफा दिया है। अगर आगे 6 और सांसदों ने भी यही कदम उठाया तो उच्च सदन में पार्टी के उतने भी सांसद (3) नहीं बच जाएंगे, जितने की लोकसभा (4) में हैं।

मोदी सरकार को पिछले कार्यकाल में वाईएसआरसीपी से मिली बड़ी मदद
केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में सभी बड़े मौकों पर राज्यसभा में वाईएसआरसीपी ने बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का भरपूर साथ दिया था।

यूं तो जगन की पार्टी किसी खेमे से नहीं बंधी है, लेकिन उसने विपक्षी दलों से ज्यादा दूरी बनाए रखने की रणनीति अपनाई थी। अबतक राज्यसभा में सरकार को बहुमत को लोचा रहा है, जिसमें उसे जगन की पार्टी से काफी मदद मिली है।

इस बार के चुनाव नतीजों के बाद से ही बदल गया सियासी समीकरण
इस बार जिस तरह से आंध्र प्रदेश में बीजेपी ने टीडीपी के साथ गठबंधन किया और वहां वाईएसआरसीपी सत्ता से बेदखल हो गई तो राजनीतिक गणित भी बदलना शुरू हो गया। चुनाव परिणाम आते ही जगन ने घोषणा कर दी कि संसद में उनकी पार्टी के कुल 15 सांसद हैं, जो अब राज्य और देशहित में मुद्दों के आधार पर समर्थन देंगे।

जुलाई आते-आते आंध्र प्रदेश में टीडीपी से उनकी लड़ाई दिल्ली आ गई। उन्होंने प्रदेश की नई सरकार में कथित सियासी हिंसा के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया तो इंडिया ब्लॉक के नेताओं में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से लेकर शिवसेना (यूबीटी) और टीएमसी के लोग भी उनका साथ देने पहुंच गए।

एनडीए के लिए फायदेमंद होगा वाईएसआरसीपी का इस्तीफा
वाईएसआरसीपी के जितने भी सांसद राज्यसभा की सीट खाली करेंगे, उसपर उपचुनाव होना निश्चित है। ऐसे में यह एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

राज्य की 175 विधानसभा सीटों में से अकेले टीडीपी के 135 विधायक हैं। इसके बाद पवन कल्याण की जनसेना पार्टी है, जिसके 21 एमएलए हैं और बीजेपी के भी 8 एमएलए हैं। इस तरह से एनडीए का आंकड़ा 164 हो जाता है। राज्य में वाईएसआरसीपी के सिर्फ 11 विधायक हैं। इस वजह से वहां राज्यसभा की हर सीट पर होने वाले चुनाव में एनडीए का पलड़ा काफी भारी रहने वाला है।

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