मधुर भंडारकर को अनुराग कश्यप का जवाब, बोले- योगी जी यूपी के मालिक नहीं
नई दिल्ली: 23 जुलाई को अनुराग कश्यप समेत देश के 49 दिग्गजों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला खत लिखकर मॉब लिचिंग की घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की थी। इस लेटर के बाद देश के 61 दिग्गजों ने इसके जवाब में खुला खत लगा था। इसमें बॉलीवुड के डायरेक्टर मधुर भंडारकर भी शामिल है। मधुर भंडारकर ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में अनुराग कश्यप की निंदा करते हुए कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की आलोचना कर रहे हैं, वे उत्तर प्रदेश में भी अपनी फिल्मों की शूटिंग कर रहे हैं और वे यूपी सरकार से सब्सिडी भी लेते हैं। इस पर अनुराग कश्यप ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि योगी जी यूपी के मालिक नहीं है।

'योगी जी यूपी के मालिक नहीं'
अनुराग कश्यप ने एक निजी टीवी चैनल का वीडियो शेयर करते मधुर भंडाकर पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया कि यह क्या मजाक है। यह मेरा राज्य है। मैं यूपी में पैदा हुआ, यूपी में पला-बढ़ा हूं। फिल्म सब्सिडी योगी जी ने शुरू नहीं की है। वह राज्य के मालिक नहीं है, वह मुख्यमंत्री हैं। मैं भले ही मोदी से सहमत नहीं रहूं लेकिन फिर भी मैं 100 फीसदी भारतीय हूं और मैं भारत में फिल्में बनाता हूं और ऐसा करना जारी रखूंगा।
मधुर भंडाकर ने क्या था?
मधुर भंडाकर ने एक निजी न्यूज चैनल की डिबेट में कहा था कि जो लोग योगी का विरोध करते हैं, उन्हें कहना चाहिए कि वे तब तक सरकार से सब्सिडी नहीं लेंगे, जब तो वहां के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंनेआगे कहा कि जब पैसे की बात आती है, तो ये विरोधी चयनात्मक हो जाते हैं और यही उनका दोहरापन है। समस्या ये है कि आप सब्सिडी लेते हैं, अवार्ड लेते हैं और आप सब कुछ लते हैं। यही दोहरापन हैं।

अनुराग कश्यप ने लेटर में क्या था?
49 दिग्गजों के पीएम मोदी के लिखे लेटर में अनुराग कश्यप के भी हस्ताक्षर थे। इस लेटर में कहा गया था कि आज 'जय श्री राम' आज एक भड़काऊ युद्ध बन गया है। राम बहुसंख्यक समाज के लिए पवित्र है। राम का नाम लेना बंद कर दें। देश में लिंचिंग के मामलों पर मशहूर हस्तियों ने कहा है कि मुसलमानों, दलितों और और अल्पसंख्यकों की लिंचिंग को तुरंत रोका जाना चाहिए। 23 जुलाई को लिखे इस लेटर में कहा गया था कि प्रधानमंत्री जी आपने संसद में इस तरह की लिंचिंग की आलोचना कि लेकिन ये पर्याप्त नहीं है। वास्तव में अपराधियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?

एंटी-नेशनल या अरबन नक्सल ना करें घोषित'
पीएम को लिखे इस लेटर में लोकतंत्र में असहमति की जोरदार पैरवी की गई थी। लेटर में इसे लेकर कहा गया था कि असहमति के बिना कोई लोकतंत्र नहीं है। अगर कोई सरकार के खिलाफ राय देता है तो उसे 'एंटी-नेशनल' या 'अरबन नक्सल' घोषित नहीं कर दिया जाना चाहिए। सत्ताधारी पार्टी की आलोचना करने का मतलब देश की आलोचना करना नहीं है। कोई भी पार्टी जब सत्ता में आती है तो वो दल देश का प्रतीक नहीं बन जाता है। ये देश की कई पार्टियों में से मात्र एक पार्टी ही है। इसलिए सरकार की आलोचना या स्टैंड लेना देश विरोधी भावनाएं व्यक्त करने जैसा नहीं है।
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