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    योगी आदित्यनाथ ने अपने खिलाफ चल रहे केस वापस लेने के दिए निर्देश

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    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध पर रोकधाम के लिए योगी सरकार ने यूपीकोका कानून लाने की तैयारी के बीच एक बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार ने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चल रहे केस वापस लेने का फैसला लिया है। 1995 में शिव प्रताप शुक्ला, शीतल पांडे व अन्य 10 के खिलाफ दर्ज हुए मामलों को वापस ले लिया है। शिव प्रताप शुक्ला मौजूदा समय में वित्त राज्यमंत्री हैं, जबकि शीतल पांडे सहजनवा से भाजपा विधायक हैं। यह मामला गोरखपुर के पीपीगंज पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था, इस मामले में स्थानीय कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए थे जिसकी वजह से इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।

    डीएम को जारी किया पत्र

    डीएम को जारी किया पत्र

    20 दिसंबर को सरकार ने गोरखपुर के जिला मजिस्ट्रेट को एक पत्र जारी किया है जिसमे इन तमाम मामलों को कोर्ट से वापस लेने के लिए कहा गया है। सरकार के इस निर्देश में कहा गया है कि तमाम तथ्यों की जांच के बाद यह निर्णय लिया गया है कि इस केस को वापस ले लिया जाए। इस पत्र में योगी आदित्यनाथ, शिव प्रताप शुक्ला, शीतल पांडे व 10 अन्य लोगों के नाम हैं। इन सभी के खिलाफ चल रहे मामलों को वापस लेने के लिए योगी सरकार ने गोरखपुर के डीएम को निर्देश दिए हैं, यह पत्र 27 अक्टूबर को डीएम को प्राप्त हुआ है।

    केंद्रीय मंत्री व योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस

    केंद्रीय मंत्री व योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस

    गोरखपुर के एडीएम सिटी रजनीश चंद्रा ने खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि इन तमाम मामलों को वापस लेने का निर्देश पत्र हमे प्राप्त हुआ है। इस मामले में अभियोजन पक्ष के वकील को कोर्ट से मामला वापस लेने का निर्देश दे दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा इस पत्र में केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला व विधायक शीतल पांडे का भी नाम है। पीपीगंज पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड के मुताबिक योगी आदित्यननाथ सहित 14 लोगों के खिलाफ 27 मई 1995 को निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का आरोप था, जिसके बाद इनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था।

    डीएम ने जमा किए थे दस्तावेज

    डीएम ने जमा किए थे दस्तावेज

    अभियोजन अधिकारी के अनुसार इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद डीएम ने इस बाबत तमाम दस्तावेज कोर्ट में जमा कर दिए थे। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ समन जारी करते हुए उन्हें कोर्ट में जवाब देने को कहा था, लेकिन जब आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए तो कोर्ट ने इनके खिलाफ दो साल पहले गैर जमानती वारंट जारी किया था। उन्होंने बताया कि हमे सरकार की ओर से पत्र मिला है, सरकार के पत्र में 13 लोगों के नाम है, जिसमे योगी आदित्यनाथ का भी नाम है, हम केस को वापस लेने के लिए शीतकालीन अवकाश खत्म होने के बाद आवेदन करेंगे।

    मुझे याद नहीं

    मुझे याद नहीं

    वहीं जब इस बाबत शिव प्रताप शुक्ला से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे यह मामला याद नहीं है क्योंकि यह 22 साल पुराना है, मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि मेरे खिलाफ कोई गैरजमानती वारंट जारी किया गया था। वहीं शीतल पांडे के बेटे दिगंबर का कहना है कि उनके पिता का नाम इस मामले में आया था और उनके खिलाफ 1995 में मामला दर्ज कराया गया था।

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    English summary
    Yogi Adityanath orders to withdraw case against him and others. Case is of 1995 when NBW was issued against them.
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