योगी सरकार के पेंशन के ऐलान से बढ़ी टेंशन : क्या निराश्रित हैं साधु-संत?

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पेंशन का एलान किया है। पेंशन पाने वालों में बुजुर्ग होंगे, महिलाएं होंगी और दिव्यांग होंगे। मगर, उन्हें साबित करना होगा कि वे निराश्रित हैं। इस बात से निराश्रितों का टेंशन बढ़ गया है। टेंशन निराश्रित लोगों के साथ-साधु संतों की भी है। योगी सरकार ने संकेत दिया है कि ताजा पेंशन स्कीम में साधु-संतों को भी शुमार किया जाएगा। कैम्प लगाकर नाम जोड़ने के लिए 30 जनवरी की तारीख भी तय कर दी गयी है। इससे पता ये चलता है कि साधु-संत भी निराश्रित हैं।

कहीं नाराज़ न हो जाएं साधु-संत!

कहीं नाराज़ न हो जाएं साधु-संत!

राम मंदिर मुद्दे को लेकर साधु-संत योगी-मोदी सरकार से नाराज़ चल रहे हैं। उन्हें खुश करना चुनाव से पहले बीजेपी को जरूर लगता है। माना जा रहा है कि निराश्रित पेंशन के बहाने साधु-संतों को ख़ुश करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन आशंका ये पैदा हो गयी है कि कहीं साधु-संत इससे नाराज़ न हो जाएं? वजह ये है कि पेंशन के लिए जो योजना लेकर योगी सरकार सामने आयी है वह साधु-संतों के लिए कतई नहीं है। वह निराश्रितों के लिए है। फिर भी साधु-संतों को इस योजना से जोड़ने की कवायद की जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल जो साधु-संतों को बेचैन करने वाला है वो ये कि क्या साधु-संत निराश्रित हैं? क्या वे खुद को निराश्रित साबित करके पेंशन लेना चाहेंगे?

निराश्रित कौन?

निराश्रित कौन?

निराश्रित तो परित्यक्त होते हैं। उनका साथ देने वाला कोई नहीं होता। अपने ने साथ छोड़ दिया होता है। परिवार उन्हें त्याग चुका होता है। ऐसे लोगों में प्राथमिकता तय करना, पसंद-नापसंद चुनना क्या सरकार क लिए सही है? इसके अलावा जब ये काम धर्म के आधार पर किया जाएगा, तो राजनीतिक बवाल भी खड़े होंगे ही। सवाल ये है कि निराश्रितों में जिस तरह साधु-संतों को खोजने की बात योगी सरकारकर रही है क्या उसी तरह पादरी-मौलवी की बात नहीं कर सकती थी? हालांकि निराश्रित वृद्ध के अंतर्गत सभी आ जाते हैं। अगर साधु-संतों को लगता है, पादरी, मौलवियों को लगता है तो वे भी इस श्रेणी में खुद को हकदार घोषित कर सकते हैं। मगर, सरकार को तो सियासत करनी है। इसी सियासत पर हंगामा बरपा है।

निराश्रितों को मिलेगा क्या?

निराश्रितों को मिलेगा क्या?

जो बुजुर्ग हैं चाहे वे महिला हों या दिव्यांग- खुद को निराश्रित साबित करना उनके लिए मुश्किल काम रहेगा। अगर उन्होंने किसी तरह से निराश्रित साबित कर भी दिया, तो मिलेगा क्या? 500 रुपये महीने का पेंशन। उत्तर प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन 300 रुपये प्रति महीना पहले से ही है। अब नयी व्यवस्था में बुजुर्ग निराश्रितों के लिए 200 रुपये और जुड़ जाएंगे। तो फायदा महज 200 रुपये का है और इसके लिए लेनी होगी निराश्रित साबित करने की टेंशन।

जरूरत थी निराश्रितों की ज़िम्मेदारी लेने की

जरूरत थी निराश्रितों की ज़िम्मेदारी लेने की

उत्तर प्रदेश सरकार ने अगर निराश्रितों की ज़िम्मेदारी लेने का एलान किया होता, तो उससे बुजुर्गों को फायदा होता है। इस वक्त 60 से 79 साल के बुजुर्गों के लिए 300 रुपये प्रतिमाह पेंशन दिया जाता है। 79 साल से अधिक के बुजुर्ग के लिए यह मशक्कत बढ़ जाएगी कि वह खुद को निराश्रित साबित करें। सवाल ये भी है कि अगर वास्तव में कोई निराश्रित है तो क्या वह 500 रुपये में अपना गुजारा कर लेगा? अच्छा होता अगर सरकार उन्हें गोद लेने की कोई स्कीम लेकर आती या फिर उनके लिए स्वास्थ्य बीमा या जीवन बीमा लेकर आती। ऐसा करने के बजाए निराश्रितों को साधु-संत और गैर साधु-संतों में बांटने का प्रयास करती दिख रही है। यह चुनावी अभियान ज्यादा लगता है। इससे निराश्रितों को पेंशन मिले न मिले, उन्हें टेंशन जरूर मिल गया है।

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