अजित डोवाल को कैबिनेट रैंक दिए जाने पर यशवंत सिन्हा ने उठाए सवाल, कही बड़ी बात

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार ने कमान संभाल ली है। इसी के साथ पीएम मोदी ने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी NSA के लिए एक बार फिर से अजित डोवाल पर भरोसा किया है। सिर्फ इतना ही नहीं राष्‍ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में डोवाल के योगदान को देखते हुए इस बार सरकार ने उन्‍हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने का फैसला किया। डोवाल का कार्यकाल पांच साल का होगा। हालांकि, केंद्र सरकार के इस फैसले पर बीजेपी के बागी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने सवाल खड़े किए हैं। अजित डोवाल की उम्र का जिक्र करते हुए यशवंत सिन्हा ने उन्हें कैबिनेट रैंक दिए जाने पर टिप्पणी की है।

डोवाल को लेकर यशवंत सिन्हा ने किया ये ट्वीट

यशवंत सिन्हा ने मंगलवार को एक ट्वीट किया, इसमें उन्होंने लिखा, "अजीत डोवाल पहले से ही 74 साल के हैं, फिर भी उन्हें कैबिनेट रैंक के साथ पांच साल के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) नियुक्त किया गया है। सांसदों और मंत्रियों पर जो नियम लागू होता है वह जाहिर तौर पर मंत्री पद पर लागू नहीं होता है। मैं सभी सर्वे का सम्राट हूं।" इसके साथ ही उन्होंने सुमित्रा महाजन का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे उन पर तरस आता है।

बीजेपी के 75 साल से अधिक उम्र के फॉर्मूले पर यशवंत का निशाना

बीजेपी के 75 साल से अधिक उम्र के फॉर्मूले पर यशवंत का निशाना

दरअसल, यशवंत सिन्हा ने इस ट्वीट के जरिए बीजेपी नेतृत्व के उस फैसले पर सवाल उठाए हैं जिसमें पार्टी ने तय किया था कि 75 साल से अधिक उम्र के नेताओं को लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं मिलेगा। इसी वजह से पार्टी ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और सुमित्रा महाजन को उम्मीदवार नहीं बनाया था। इसी को लेकर यशवंत सिन्हा ने ट्वीट किया, क्योंकि अजित डोवाल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है, जबकि वो 74 साल के हैं।

इंटेलीजेंस और कोवर्ट ऑपरेशंस के लीजेंड माने जाते हैं अजित डोवाल

इंटेलीजेंस और कोवर्ट ऑपरेशंस के लीजेंड माने जाते हैं अजित डोवाल

बता दें कि अजित डोवाल को इंटेलीजेंस और कोवर्ट ऑपरेशंस की दुनिया में लीजेंड करार दिया जाता है। जिस तरह से अपने इंटेलीजेंस ऑपरेशंस को अंजाम देते थे, उसकी वजह से उन्‍हें कुछ लोगों ने भारत का जेम्‍स बांड तक करार देना शुरू कर दिया। साल 2014 में जब मोदी सरकार का पहला कार्यकाल शुरू हुआ तो पीएम मोदी ने डोवाल को एनएसए के तौर पर चुना। डोवाल साल नौ वर्ष बाद अपनी ड्यूटी पर वापस लौटे थे। डोवाल भारत के पांचवें एनएसएस बने। डोवाल 1965 के केरल कैडर के आईपीएस ऑफिसर रहे हैं।

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