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प्रदूषण के कारण वर्षों से सिसक रही यमुना नदी लॉकडाउन में हुई स्‍वच्‍छ,जानें कितने फीसदी कम हुआ प्रदूषण

प्रदूषण के कारण वर्षों से सिसक रही यमुना नदी लॉकडाउन में हुई स्‍वच्‍छ, जानें कितने फीसदी कम हुआ प्रदूषण

नई दिल्ली। कोरोनावायरस का संक्रमण फैलने के कारण दुनिया भर के देशों में किए गए लॉकडाउन का सबसे बड़ा फायदा हमारी प्रकृति को हो रहा हैं। लॉकडाउन के चलते दुनिया भर में हुए आश्‍चर्यजनक प्राकृतिक बदलाव की तस्‍वीरें लगातार सामने आ रही हैं लॉकडाउन की वजह से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ हमारे पर्यावरण में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। लॉकडाउन में दुनिया भर में दिन रात धरती पर हो गतितिधियां ठप्‍प होने से जहां धरती का कांपना बहुत कम हो गया है वहीं हमारे देश की पवित्र नदियों में बदलाव साफ तौर पर देखा जा रहा हैं।

लॉकडाउन में 75 फीसदी प्रदूषण कम हो गया है

लॉकडाउन में 75 फीसदी प्रदूषण कम हो गया है

पवित्र नदी जो भगवान कृष्‍ण की सबसे प्‍यारी नदी हैं, उसका प्रदूषण लॉकडाउन में काफी हद तक समाप्‍त हो गया हैं। यमुना वहीं नदी है जिसके किनारे श्रीकृष्ण ने बाल गोपालों के साथ बाललीला की, गोपियों के संग रासलीला की, जिस नदी के प्रति लोगों के मन में श्रद्धा है, वह पौराणिक नदी यमुना प्रदूषण के कारण वर्षों से सिसक रही थी। इसके प्रदूषण का स्तर खतरनाक तरीके से बढ़ चुका था। दिल्ली जल बोर्ड ने भी यमुना के लगभग मृत होने की बात स्वीकार तक किया था। लेकिन केन्‍द्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार यमुना नदी जो मैली होकर नाले में तब्दील हो चुकी थी पिछले एक महीने के अंदर 75 फीसदी प्रदूषण कम हो गया है। बता दें इसका प्रमुख कारण ये हैं कि लॉकडाउन के कारण फैक्ट्रियां बंद हैं जिसकी वजह से यहां से निकलने वाली गंदगी नदियों में नहीं जा रही है। यहां से निकलने वाला धुंआ हवा को प्रदूषित नहीं कर रहा है।

दिल्ली की यमुना नदी में भी इतने फीसदी कम हुआ प्रदूषण

दिल्ली की यमुना नदी में भी इतने फीसदी कम हुआ प्रदूषण

गौरतलब हैं कि पहले ही दिल्ली की यमुना नदी में भी लॉकडाउन के चलते बदलाव देखने हाल ही में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने यमुना के 33 फीसद तक साफ होने की बात कही थी, लेकिन अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में पिछले एक माह में यमुना के 75 फीसदी साफ होने का दावा किया गया हैं। बता इस ताजा रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के ठीक एक महीने बाद बैराज पर यमुना का साफ पानी बहता हुआ नजर आ रहा है। इसकी वजह सामान्य दिनों की तुलना में लॉकडाउन के दौरान यमुना में डाली जाने वाली गंदगी में कमी आना है।

सीपीसीबी की टीम ने जारी की ये रिपोर्ट

सीपीसीबी की टीम ने जारी की ये रिपोर्ट

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. यशपाल यादव के नेतृत्व में सीपीसीबी की टीम ने लॉकडाउन के दौरान यमुना नदी के पल्ला से वजीराबाद बैराज (22 किमी), वजीराबाद से निजामुद्दीन ब्रिज (13.5 किमी) और निजामुद्दीन ब्रिज से ओखला बैराज (7.5 किमी) के हिस्से से पानी के नमूनों की जांच की और इसकी तुलना लॉकडाउन से पूर्व किए गए प्रदूषण की जांच के आंकड़ों से की गई। इनमें आश्‍चर्यजनक परिवर्तन देखने को मिले। तीनों ही हिस्सों में पानी की गुणवत्ता काफी हद तक बेहतर हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन से पहले पल्ला बैराज पर डिजोल्व डिमांड (डीओ) 71.1 मिलीग्राम प्रति लीटर और बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 163 मिलीग्राम प्रति लीटर थी। लेकिन अब यह क्रमश: 8.3 और 89 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गई है यानी डीओ में 51 जबकि बीओडी में 75 फीसद कमी दर्ज की गई। इसी तरह से ओखला बैराज पर बीओडी में 77, नजफगढ़ ड्रेन पर 29 और शाहदरा ड्रेन पर 45 फीसद तक की कमी देखने को मिली है। इससे यमुना साफ नजर आ रही है।

यमुना नदी का महत्‍व

यमुना नदी का महत्‍व

यमुना भारत की पवित्र नदियों में से एक है। यह कृष्‍ण भगवान की सबसे दुलारी नदी है। यह उत्तराखंड के हिमालय में 6387 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है। इसके बाद यह उत्तर की दिशा में बहती है और वृंदावन व मथुरा होते हुए दिल्ली पहुंचती है। केसी घाट के पास यमुना नदी का हिस्सा काफी पवित्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि केशी नामक दुष्ट का वध करने के बाद भगवान कृष्ण ने यहीं स्नान किया था। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि यहां डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं। यमुना नदी के कई घाट हैं जहां पर कई धार्मिक क्रियाएं की जाती हैं। यहां सुबह और शाम अध्यात्मिक आरती भी होती है। हिंदु धर्मशास्‍त्र और धर्मिक ग्रंथों में इस पवित्र नदी से जुड़ी अनेक घटनाएं वर्णित हैं।

प्रदूषण के कारण जहरीली हो गई थी यमुना नदी

प्रदूषण के कारण जहरीली हो गई थी यमुना नदी

मालूम हो राजधानी दिल्ली में जितना अधिक वायु प्रदूषण है, उतना ही अधिक जल प्रदूषण भी है। कि ये वो ही नदी हैं जिसमें इतना प्रदूषण किया गया कि पिछले नवंबर में यमुना नदी में झागनुमा जहरीली सफेद रंग की लेयर नजर आ रही थी। छठ पूजा के लिए हजारों लोग जहरीली यमुना में खड़ें होकर इस झाग के बीच सूर्य भगवान की पूजा करनी पड़ी थी। यमुना नदी की कुछ तस्वीरें वायरल हुई थी, जिनमें आसानी दिख रहा था कि ये नदी कितनी प्रदूषित हो चुकी थी।

केजरीवाल का ये चुनावी वादा बिना प्रयास हो रहा पूरा

केजरीवाल का ये चुनावी वादा बिना प्रयास हो रहा पूरा

गौरतलब हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय जनता से वादा किया था कि अगर उनकी सरकार फिर चुनकर आती है तो यमुना नदी को इतना स्वच्छ बनाया जाएगा कि उसमें लोग डुबकी लगा सकें। केजरीवाल ने कहा था कि अगर उनकी सरकार आती है तो आने वाले पांच साल में यमुना की सफाई आप सरकार की प्राथमिकता होगी। अब कोरोना वारयस के कारण हुए लॉकडाउन में केजरीवाल का जनता से किया वादा पूरा बिना प्रयास के ही पूरा होता नजर आ रहा है। मालूम हो कि यमुना की सफाई के लिए अब तक करोड़ो रुपया पानी की तरह बहाया गया लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिल रहे थे।

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