World Aids Vaccine Day: आज भी लाइलाज बनी हुई है एड्स की बीमारी, जानिये क्यों नहीं बनी एक भी वैक्सीन
एड्स एक लाइलाज बीमारी है। साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है लेकिन आज तक इस वायरस की वैक्सीन नहीं बन पाई। इसके पीछे कई सारे कारण जिम्मेदार हैं।

World Aids vaccine day: एड्स कितनी खतरनाक बीमारी है, ये बात सभी लोग जानते हैं। इस बीमारी से निजात पाने और दुनियाभर में लोगों को इसके प्रति जागरूक करने को लेकर हर साल 18 मई को विश्व एड्स वैक्सीन दिवस मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है वैक्सीन डे?
आज से 42 साल पहले यानी साल 1981 में एड्स की पहचान हुई थी। साल 1997 का समय था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने मार्गन स्टेट यूनिवर्सटी में एक भाषण दिया था। उस भाषण में वैक्सीन का जिक्र था। इसके बाद से ही भाषण की वर्षगांठ मनाने के लिए हर साल 18 मई 1998 को विश्व वैक्सीन दिवस मनाया गया।
राष्ट्रपति का भाषण अहम
बताते चलें कि तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कहा था कि मात्र एक प्रभावी, निवारक एचाआईवी वैक्सीन ही एड्स के खतरे को कम और अंत में मिटा सकती है। अगले दशक में उन्होंने एक प्रभावी HIV वैक्सीन बनाने की बात भी कही थी। ऐसे में उनके इस भाषण की वर्षगांठ को मनाने के लिए ही हर साल वैक्सीन दिवस मनाया जाता है।
क्या है एड्स?
आज विश्व वैक्सीन दिवस है। ऐसे में सबसे पहले समझते हैं कि एड्स होता क्या है। एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशेएंसी सिंड्रोम यानी एड्स एक ऐसी बीमारी है, जो एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है। एचआईवी एक ऐसी वायरस है जो इम्यून सिस्टम पर अटैक कर उसे कमजोर... बेहद कमजोर बना देता है। ऐसे में अन्य बीमारियां भी मरीज को घेर लेती हैं और इस तरह धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ती रहती है।
अभी तक नहीं आई वैक्सीन
साइंस इतनी तरक्की कर चुका है कि एक से बढ़कर खतरनाक बीमारियों के टीके आ चुके हैं। लेकिन एड्स की कोई वैक्सीन नहीं बन सकी है। हालांकि, ए़ड्स की वैक्सीन अभी तक नहीं बन सकी है। इसके भी एक नहीं बहुत सारे कारण हैं।
सबसे पहला कारण तो ये कि एड्स का वायरस शरीर में काफी लंबे वक्त तक रहता है। दूसरे ये कि लंबे समय तक इम्यून सिस्टम इसका पता नहीं लगा पाता। तीसरा ये कि इसमें काफी सारे म्यूटेशन होते हैं। ऐसे में इम्यून सिस्टम इस वायरस को खत्म नहीं कर पाता। लेकिन इम्यून सिस्टम को ये बेहद कमजोर बना देता है।












Click it and Unblock the Notifications