महिला आरक्षण बिल राज्यसभा से पास होने के बाद पहले कहां जाएगा?
Womens Reservation Bill: राज्यसभा से भी 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पास कराने के लिए मोदी सरकार को कम से कम दो-तिहाई सांसदों के समर्थन की आवश्यकता थी। लेकिन, इसके पक्ष में शून्य के मुकाबले 214 मत पड़े और इतिहास रच दिया गया। लोकसभा में भी 454 सांसदों ने इसके समर्थन में मतदान किया था और 2 ने ही विरोध में मत डाले थे। इस तरह से जो मामला 27 साल से लटका था, वह दो दिन में सारी बाधाएं बिना किसी झंझट के साफ हो गया।
राज्यसभा से भी इस बिल पर मुहर लगने के बाद आगे की क्या प्रक्रिया होगी। यह कब तक अमल में आ सकेगा। क्योंकि, विपक्षी दलों ने लगातार सरकार से इसे 2024 के लोकसभा चुनावों से ही लागू करने की मांग की है।

विधानसभाओं से अनुमोदन की आवश्यकता नहीं- रिपोर्ट
पहले ऐसी बातें सामने आ रही थीं कि इस विधेयक को लागू करने के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधासभाओं से भी अनुमोदन की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन, केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि एक बार अगर यह विधेयक संसद से पास हो जाता है और उसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है तो इसका प्रावधान स्वत: राज्य विधानसभाओं पर भी लागू होगा। इसके लिए विधानसभाओं से अनुमोदन लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
'विधानसभाओं की सीटें तय करना संसद का विशेषाधिकार'
टीओआई ने केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के हवाले बताया है कि 'राज्य विधानसभाओं में सीटें तय करने का विशेषाधिकार संसद के पास है और राज्य विधानसभाओं की इसमें कोई भूमिका नहीं है।' इस हिसाब से दोनों सदनों से मुहर लगने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही संविधान संशोधन मंजूर हो जाएगा और 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' कानून का शक्ल अख्तियार कर लेगा।
पहली बार में 15 साल के लिए लागू होगा कानून
नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है। यह अधिनियम लागू होने के बाद से 15 साल तक प्रभावी रहेगा और संसद को यह अधिकार होगा कि वह इस समय-सीमा का विस्तार कर सके।
2025 में हो सकती है जनगणना
हालांकि, संसद से पास हो जाने के बाद भी महिलाओं को 33% आरक्षण की सुविधा 2029 के आम चुनावों से पहले होने की कोई उम्मीद नहीं लग रही है। क्योंकि, उससे पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जनगणना का काम तो 2021 में हो जाना था, लेकिन कोविड की वजह से यह टल चुका और अभी तक यह शुरू नहीं हुआ है। यही नहीं, हालात ऐसे हैं कि 2025 से पहले इसका हो पाना भी संभव नहीं लग रहा है।
2002 में हुआ था पिछला परिसीमन
क्योंकि, देश के लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के बगैर 33% महिला कोटा लागू करना मुश्किल है। इससे पहले यह प्रक्रिया 2002 में हुई थी और तब इस काम में करीब ढाई साल लग गए थे। लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जो संकेत दिए हैं, उसके मुताबिक जनगणना का काम 2024 के आम चुनावों के बाद ही शुरू हो सकता है। ऐतिहासिक तौर पर देखें तो यह 1 अप्रैल से 28 फरवरी के बीच एक वित्त वर्ष के दौरान किया जाता रहा है।
हालांकि, टेक्नोलॉजी के विस्तार होने से इस कार्य के तेजी से होने की संभावना बढ़ गई है। इसी तरह से टेक्नोलॉजी से परिसीमन के काम में भी सहायता मिलने की संभावना है। लेकिन, अगर 2025 में जनगणना ही शुरू होती है और उसके बाद अगर परिसीमन में डेढ़ से दो साल भी लग गए तो वैसे भी इस बिल को अमल में लाने के लिए 2029 के चुनावों का इंतजार करना ही होगा। फिलहाल, उससे पहले उसकी संभावना नहीं के बराबर है।












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