Women's Reservation Bill 2023: आधी आबादी को भागीदारी देने में सबसे फिसड्डी राज्य कौन?
Women's reservation bill latest news: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद के विशेष सत्र में मंगलवार को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' पेश करके ढाई दशक पुरानी मांग को लेकर एक नई उम्मीद जगाई है।
क्योंकि, संसद से लेकर राज्य विधानसभाओं तक में अभी महिलाओं की जो भागीदारी है, वह उनकी आबादी के मुकाबले कुछ भी नहीं है। लोकसभा और राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला सदस्यों की संख्या उनकी जनसंख्या के मुकाबले कुछ भी नहीं है।

संसद में महिलाओं का अभी कितना है प्रतिनिधित्व?
मसलन, लोकसभा की कुल 543 सीटों में से 2019 में 78 महिला सांसद चुनी गई थीं। जबकि, राज्यसभा के कुल 238 सांसदों में महिला सदस्यों की संख्या इस समय मात्र 31 है। महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला नया विधेयक पास हो जाने के बाद लोकसभा में देश की 181 संसदीय सीटें पूरी तरह से महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।
कुछ पिछड़े राज्यों का रिकॉर्ड अमीर राज्यों से बेहतर
लेकिन, अगर हम राज्य विधानसभाओं का तुलनात्मक अध्ययन करें तो कई अमीर राज्य इस मामले में काफी पिछड़े हैं। सबसे पहले हम उन राज्यों की बात करते हैं, जो आर्थिक तौर पर तो पिछड़े माने जाते हैं, लेकिन महिलाओं को विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देने के मामले में अमीर राज्यों से कहीं बेहतर स्थिति में हैं।
छत्तीसगढ़, बंगाल और झारखंड सबसे आगे
इस समय सबसे ज्यादा या 14.4% महिला एमएलए छत्तीसगढ़ विधानसभा में हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल है, जहां 13.7% विधायक महिलाएं हैं। उसके बाद नंबर आता है झारखंड का जहां विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 12.4% है।
ये राज्य भी अमीर राज्यों से अव्वल
इसी तरह से 10 से 12% महिलाओं की भागीदारी वाली देश की विधानसभाओं में बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्य हैं।
नाम बड़े पर दर्शन छोटे
अब आप हैरान रह जाएंगे कि देश में जिन राज्यों का नाम अमीर राज्यों में शामिल है, वह महिलाओं को विधानसभा में भेजने के मामले में बहुत ही फिसड्डी हैं। इन राज्यों में गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गोवा जैसे राज्य शामिल हैं। यहां की विधानसभाओं में महिला विधायकों का प्रतिनिधित्व 10% से भी कम है।
इन राज्यों का भी रिकॉर्ड खराब
10% से भी कम महिला जनप्रतिनिधि वाले राज्यों में कई और राज्य भी शामिल हैं। ये राज्य हैं- हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा और पुडुचेरी।
बता दें कि देश की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने की कोशिशें पहली बार 1996 में ही शुरू हुई थी। 2010 में इसे राज्यसभा से पास भी करा लिया गया था। लेकिन, पहले कुछ पार्टियां इसकी सख्त विरोधी थीं।
जो दल पहले महिला आरक्षण विधेयक के सबसे मुखर विरोधी थे, उनमें समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जेडीयू जैसी पार्टियां शामिल हैं। यह महिला आरक्षण में भी ओबीसी कोटा की मांग करते आए थे। लेकिन, इस बार इन दलों का इसपर अबतक रुख नरम दिख रहा है।












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