'सेनेटरी नैपकिन' पर बनी फिल्म से ऑस्कर जीतने वाली स्नेहा और सुमन ने गंवाई नौकरी, ये है वजह
नई दिल्ली। सेनेटरी नैपकीन को लेकर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म पीरियड: द एंड ऑफ सेंटेंस में खास किरदार निभाकर ऑस्कर जीतने वाली हापुड़ की लड़कियां स्नेहा और सुमन ने अपनी नौकरी गंवा दी है। अपने काम के चलते दोनों को अखिलेश यादव की सरकार से 1-1 लाख रुपये की ईनाम राशि भी मिली थी। लेकिन अब इसी के चलते एनजीओ एक्शन इंडिया ने उन्हें काम से निकाल दिया है। एनजीओ ने ईनामी राशि को नियम के विरुद्ध बताया है। इस सब को लेकर दोनों बहनों ने हापुड़ में ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

ईनाम के चेक देने के किया इंकार तो गई नौकरी
लड़कियों ने बताया कि उनके काम को लेकर उन्हें और उनकी टीम के 9 लोगों को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से 1-1 लाख रुपये का चेक मिला था। इसके अलावा उनकी डॉक्युमेंट्री ने ऑस्कर भी जीता था। लेकिन उनके एनजीओ ने उनसे उनके चेक मांगे और कहा कि ये नियम के विरुद्ध दिए गए हैं। ऐसे में जब लड़कियों ने चेक लौटाने से इंकार किया तो 29 मई को दोनों को नौकरी से निकाल दिया गया।

काम न करने की बात कहकर छीनी नौकरी
दोनों लड़कियों का कहना है कि उनकी फिल्म को ऑस्कर मिल जाने के बाद भी उन्होंने लगभग डेढ़ महीने तक सबला यूनिट में काम किया है। इसके बादजूद एक्शन इंडिया के अधिकारियों ने उनपर काम न करने का आरोप लगाया है। वहीं जब वे किसी नौकरी के लिए जाती हैं तो लोग उन्हें सेलिब्रिटी होने का हवाला देते हैं। इसके चलते उन्हें कहीं भी काम नहीं मिल पा रहा है।
'हमारे साथ भेदभाव कर रहे एनजीओ'
स्नेहा और सुमन ने बताया कि अखिलेश यादव द्वारा मिलने वाली राशि को लेकर को-ऑर्डिनेटर सुलेखा सिंह को पहले ही सूचना मिल गई थी। उनको भी 1 लाख रुपये का चेक दिया गया था। इस बात से एक्शन इंडिया ने कोई एतराज नहीं जताया। लेकिन बाद में उनपर न सिर्फ चेक लौटाने का दबाव बनाया गया बल्कि इसे न देने पर नौकरी से भी निकाल दिया गया।
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