कोविड के मामले बढ़ने के साथ देश में ऐसे बदला ऑनलाइन सर्च पैटर्न
नई दिल्ली, 22 अप्रैल: देश में फरवरी के बाद से जिस तरह से कोरोना के मामले लगातार तेजी से बढ़ते गए हैं, उसकी बानगी गूगल और थर्ड-पार्टी सोशल मीडिया एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म पर भी साफ महसूस की जा रही है। क्योंकि देखा गया है कि लोग कोरोना और उससे सबंधित सर्च ही पिछले दो महीनों से सबसे ज्यादा कर रहे हैं। लोग इंटरनेट पर जिन चीजों के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं, उनमें आरटी-पीसीआर टेस्ट, ऑक्सीजन सिलेंडर, रेमडेसिविर इंजेक्शन, अस्पतालों में बेड और कोविड वैक्सीन सेंटर से संबंधित जानकारियां शामिल हैं।

कोविड से इंटरनेट पर सर्चिंग का बदला पैटर्न
कोरोना के इलाज और उससे संबंधित जानकारियों की तलाश इंटरनेट यूजर्स ने बीते दिनों में पिछले एक साल में सबसे ज्यादा की है। खासकर पिछले 17 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते का जो मेट्रिक्स उपलब्ध है, उससे पता चलता है कि कोविड की दूसरी लहर के दौरान देशवासी कैसी मानसिकता से गुजर रहे हैं कि उनके लिए इस समय कोविड से ज्यादा किसी चीज की जानकारी की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, यह बात अलग है कि देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों का कोविड से संबंधित चीजों की तलाश का पैटर्न अलग रहा है। मसलन, महाराष्ट्र के लोगों ने इंटरनेट पर जिस टर्म को सबसे ज्यादा सर्च किया वो है- 'रेमडेसिविर नियर मी'। जबकि, दिल्ली के भौगोलिक क्षेत्र के आसपास के लोगों ने गूगल पर 'ऑक्सीजन सिलेंडर नियर मी' , 'कोविड आरटी पीसीआर टेस्ट नियर मी' और 'कोविड हॉस्पिटल नियर मी' सबसे ज्यादा सर्च किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी दिख रहा है असर
हालांकि, इस दौरान 7 मार्च से 13 मार्च के बीच लोगों ने 'कोविड वैक्सीनेशन सेंटर नियर मी' सर्च करने में सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है। गौर करने वाली बात ये है कि सर्च करने वालों ने जिस तरह से 'नियर मी' जैसे शब्दों को सर्च इंजन में डाला है, उससे पता चलता है कि लोग कोरोना के कहर से किस कदर प्रभावित हो चुके हैं कि या तो उन्हें अपनों के लिए इसकी जानकारी जुटानी पड़ रही है या फिर वह भविष्य की आशंका में उसके बारे में पता करके रख लेना चाहते हैं। बड़ी बात ये है कि इससे पता चलता है कि कोविड की वजह से इन चीजों की मांग में जबर्दस्त उछाल तो आया ही है, लोग इन जानकारियों को ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी पोस्ट कर रहे हैं, ताकि जरूरतमंदों तक सूचना पहुंच सके।












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