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गोवा कांग्रेस में बढ़ा घमासान, राहुल गांधी के दखल नहीं देने पर विधायक ने छोड़ी पार्टी

कांग्रेस छोड़ने वाले विधायक का नाम विश्वजीत राणे है। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि मैंने बहुत ही भारी मन से कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दिया है।

नई दिल्ली। गोवा में कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जहां एक ओर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी सत्ता से दूर रह गई, वहीं कांग्रेस के एक विधायक ने पार्टी के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कांग्रेस छोड़ने का ऐलान ही नहीं किया, उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी नेतृत्व को भी भेज दिया है।

गोवा कांग्रेस में बढ़ा घमासान, विधायक ने छोड़ी पार्टी

विधायक विश्वजीत राणे ने छोड़ी कांग्रेस

कांग्रेस छोड़ने वाले विधायक का नाम विश्वजीत राणे है। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि मैंने बहुत ही भारी मन से कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे इस्तीफे की तरह ही देश के दूसरे हिस्सों में भी नेता कांग्रेस छोड़ना शुरू करेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने जिन नेताओं को अपना ऑब्जर्वर बनाकर भेजा है वो स्थिति को संभालने में असफल रहे। उन्हें पता ही नहीं कि हमारी सोच क्या है? उन्होंने कहा कि गोवा के हालात को लेकर मैंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी बात की थी। उनसे गोवा के हालात पर दखल देने की मांग की थी लेकिन उनकी ओर से कोई भी जवाब मुझे नहीं आया। जब मेरे सामने कोई उम्मीद नजर नहीं आई तो मैंने पार्टी छोड़ने का ही फैसला ले लिया।

विश्वजीत राणे ने गोवा में कांग्रेस पार्टी के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए अपने इस्तीफे की वजह पार्टी आलाकमान के कुप्रबंधन को बताया है। बता दें कि गोवा में गुरुवार को पर्रिकर की सरकार ने विश्वास मत हासिल किया है। पार्टी के पक्ष में 22 और विपक्ष में 16 वोट पड़े हैं। मिल रही जानकारी के मुताबिक विश्वजीत राणे बहुमत परीक्षण के दौरान विधानसभा से अनुपस्थित रहे। कांग्रेस पार्टी के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए राणे ने कहा कि कांग्रेस को विधायक दल का नेता चुनने में दो दिन लगा। ये कांग्रेस के रणनीतिकारों की नाकामी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे महसूस किया। राणे के मुताबिक कांग्रेस में अनुभवी लोग है लेकिन उन्हें क्या करना है ये पता नहीं है। आखिर सरकार बनाने के लिए क्या कदम उठाना चाहिए ये फैसला लेने में उन्होंने देरी की। दूसरी ओर मनोहर पर्रिकर दिल्ली से आए और दूसरे दलों के नेताओं से बहुत ही प्यार से बातचीत की। इससे उनकी बात बन गई और सरकार का गठन भी हो गया।

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