क्या चुनाव नतीजे आने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे ? जानिए

नई दिल्ली, 30 अप्रैल: देश में तेल कंपनियों (ऑयल मार्केटिंग कंपनी) ने पिछले करीब दो महीनों से तेल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। जबकि, इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 67 डॉलर के स्तर तक मंडराती रही हैं। लेकिन, माना जा रहा है कि 2 मई को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद इस ट्रेंड में बदलाव देखने को मिल सकता है और एकबार फिर से तेल की कीमतें बढ़नी शुरू हो सकती हैं। माना जा रहा है कि सरकारी तेल कंपनियां तेल की कीमतों को कम रखने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में धीरे-धीरे इजाफा करके अपने घाटे को पूरा कर सकती हैं।

मई के पहले हफ्ते में बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

मई के पहले हफ्ते में बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की घटती कीमतों के चलते हुए नुकसान की भरपाई सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम कुछ चरणों में कम से कम 2 से 3 रुपये बढ़ाकर पूरा कर सकती हैं। इनकी कीमतों में उछाल मई के पहले हफ्ते से होने की संभावना है। गौरतलब है कि पिछले 27 फरवरी से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। इसके ठीक उलट चुनावों के दौरान मार्च और अप्रैल में तेल की कीमतें चार बार कम ही हुई हैं। यही वजह है कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल कंपनियों के लिए अब अपने घाटे को पाटना मुश्किल हो रहा है, ऊपर से पेट्रोल और डीजल के दामों पर केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से टैक्स का भी भारी दबाव है।

कोरोना की दूसरी लहर के चलते कच्चे तेल की कीमत घटने के आसार

कोरोना की दूसरी लहर के चलते कच्चे तेल की कीमत घटने के आसार

वैसे पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले केंद्रीय और राज्यों के करों में कमी करने को लेकर कई तरह से मांगें उठती रही हैं, लेकिन कोरोना महामारी की भयावह स्थिति के बीच इस तरह की किसी तरह की उम्मीद रखना भी बेमानी ही लग रहा है। कहा जा रहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें विदेशों में कम भी होती हैं तो भी भारतीय तेल कंपनियां अपनी कीमतों में धीरे-धीरे इजाफा करेंगी। अलबत्ता ऐसी स्थिति में इन तेल कंपनियों के लिए अपने घाटे की भरपाई करना ज्यादा आसान हो जाएगा। संभावना है कि कोविड-19 की दूसरी लहर की वजह से भारत जैसे बड़े तेल-आयातक देश में तेल की मांग घटने के चलते कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कुछ गिरावट देखने को मिले। यही वजह है कि मई के महीने में तेल की कीमतें बढ़नी लगभग तय हैं। सिर्फ यह तभी टल सकता है जब केंद्र सरकार इसकी कीमतें स्थिर रखने के लिए कुछ खास पहल करे।

इस साल 26 बार बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

इस साल 26 बार बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

बता दें कि देश में इस साल जब से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सिलसिला रुका है, उससे पहले 26 बार इनकी कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं। इस साल पेट्रोल की कीमतें 27 फरवरी से पहले तक 7.46 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 7.60 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाई जा चुकी हैं। आज की तारीख में दिल्ली की बात करें तो पेट्रोल 90.40 रुपये प्रति लीटर और डीजल 80.73 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। बता दें कि पिछले दो महीनों से पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव कराए जा रहे थे। इन पांचों राज्यों के नतीजे 2 मई को आने हैं। इसीलिए अब तेल की कीमतें फिर से बढ़ने की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है।

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