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क्या लद्दाख की ये मांग मानेगी केन्‍द्र सरकार ? जानिए क्या हैं मामला

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बेंगलुरु। केन्‍द्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्‍मीर और अनुच्‍छेद 370 और अनुच्‍छेद 35 ए हटाए जाने के बाद अलग राज्य के अस्तित्‍व में आए लद्दाख में एक नयी मांग उठने लगी हैं। अब लद्दाख के लोग केन्‍द्र सरकार से लद्दाख को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं। आइए जातने हैं कि आखिर वह इसकी मांग क्यों कर रहें हैं और अगर केन्‍द्र सरकार उनकी यह मांग को पूरा कर देती हैं तो उससे क्या बदलाव होगा ?

laddhakh people

बता दें कि लद्दाख को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने केंद्र सरकार से सिफारिश की है। उसने यह सिफारिश पांचवीं अनुसूची नहीं, बल्कि छठी अनुसूची के तहत की है। पांचवीं अनुसूची के तहत असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को जनजातीय क्षेत्र घोषित किया गया है। ये राज्य जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अधीन आते हैं। वहीं, छठी अनुसूची के तहत उत्तर पूर्व के चार राज्यों को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा हासिल है। ये राज्य गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं।

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लद्दाख के लोग इसलिए यह दर्जा पाना चाहते हैं ताकि देश के अन्‍य राज्यों के लोग आकर वहां बस नहीं पाएं। अगर उन्‍हें यह दर्जा मिल जाता है तो ऐसे में उन्हें लद्दाख की जनसांख्यिकी बदलने का खतरा नहीं रहेगा। साथ ही, वहां की जमीन पर उनके विशेषाधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।

गौरतलब है कि लद्दाख 31 अक्टूबर से आधिकारिक तौर पर केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा, इसलिए देश के अन्य हिस्से में लागू कानून भी वहां लागू हो जाएंगे। ऐसे में लद्दाख में भी जमीन खरीदने का हक भी देशवासियों को मिल जाएगा। इसी से बचने के लिए लद्दाख ने खुद के लिए आदिवासी क्षेत्र दर्जे की मांग की है।

modi

छठी अनुसूची जनजातीय समुदायों को काफी स्वायत्तता प्रदान करती है। इसके तहत जिला परिषद और क्षेत्रीय परिषद के पास कानून बनाने की वास्तविक शक्ति होती है। ये निकाय विकास, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, सड़क और नियामक शक्तियों के लिए योजनाओं की लागतों को पूरा करने के लिए भारत की संचित निधि से सहायता राशि स्वीकृत कर सकते हैं।

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जनगणना 2011 के अनुसार, लेह और कारगिल की 80 फीसद आबादी और लद्दाख की 90 फीसद आबादी आदिवासियों की है। ऐसे में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासियों की होने के कारण केंद्र शासित इस प्रदेश को जनजातीय क्षेत्र पाने का हक मिलता है। चूंकि लद्दाख में विधानसभा नहीं है, इसलिए यहां विधानसभा सीटों पर आदिवासी समुदायों को मिलने वाले आरक्षण का प्रावधान यहां लागू नहीं हो सकता है।

जनजातीय क्षेत्र घोषित होने के बाद लद्दाख को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित होने वाले केंद्रीय फंड का बड़ा हिस्सा मिलने लगेगा। राज्यों को आवंटित फंड सामान्य केंद्रीय सहायता (एनसीए) कहलाती है और इसका अनुपात 30:70 का होता है। एनसीए का 30 फीसद हिस्सा 11 विशेष राज्यों को जाता है, जबकि बाकी के राज्यों में शेष बचा 70 फीसद फंड बांट दिया जाता है। इसके अतिरिक्त राज्यों में केंद्र सरकार की योजनाओं की 90 फीसद फंडिंग भी केंद्र ही करता है, जबकि शेष 10 फीसद रकम राज्यों को बिना ब्याज के लोन के रूप में दी जाती है।

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English summary
A new demand has arisen in Ladakh, which came into being after the creation of a separate state after the removal of Jammu and Kashmir and Article 370 and Article 35A by the Central Government. Now the people of Ladakh are demanding the Central Government to give the status of tribal area to Ladakh.
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