क्या भाजपा को फिर सियासी नुकसान पहुंचाएगा आरक्षण का आरडीएक्स?

पटना। बिहार की राजनीति में आरक्षण सबसे उपजाऊ जमीन है। 2015 में आरक्षण की फसल काट कर ही जदयू और राजद वोट से मालामाल हुए थे। उस समय संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण पर बयान दे कर भाजपा का बना बनाया खेल बिगाड़ दिया था। एक बार फिर उन्होंने आरक्षण पर बयान दे कर बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है। इस मुद्दे पर जदयू और राजद एक सुर में बोल रहे हैं तो भाजपा को सफाई देने में पसीने छूट रहे हैं। सत्ता में साझीदार जदयू और भाजपा आमने-सामने आ गये हैं तो दूसरी तरफ राजद की बंजर जमीन को खाद-पानी मिल गया है। अज्ञातवास से लौटे तेजस्वी को किस्मत से बना बनाया मुद्दा मिल गया और इसे लपकने में उन्होंने बिल्कुल देर नहीं की।

जदयू ने संघ और भाजपा को चेताया

जदयू ने संघ और भाजपा को चेताया

मोहन भागवत जब भी आरक्षण शब्द का जिक्र करते हैं वह बिहार की राजनीति के लिए आरडीएक्स बन जाता है। इसके धमाके से होने वाले नुकसान को 2015 में देख चुकी है भाजपा। तब आरक्षण की आग में मोदी का करिश्मा भी खाक हो गया था। बहुसंख्यक पिछड़े वोटरों के लिए यह सुलगता हुआ मुद्दा है। भाजपा के साथ सरकार चला रहे जदयू को भी नुकसान की आशंका ने डरा दिया है। हालांकि मोहन भागवत ने आरक्षण के मसले पर पक्ष और विपक्ष को सहज भाव से केवल चर्चा के लिए सुझाव दिया है। लेकिन इस कथन इस रूप में पेश किया जा रहा है कि संघ और भाजपा आरक्षण विरोधी हैं। दोनों मिल कर आरक्षण हटाना चाहते हैं। कहीं राजद इस मुद्दे पर बढ़त न ले ले इस लिए जदयू के मंत्री श्याम रजक ने आक्रमक रुख अख्तियार कर लिया है। श्याम रजक जदयू में एंटी बीजेपी फेस हैं, दलित समाज से आते हैं, इसलिए वे हमेशा आरक्षण के सवाल पर मुखर रहते हैं। उन्होंने कहा है कि जब भी आरक्षण पर चर्चा की बात होती है दलित समाज कई तरह की आशंकाओं में घिर जाता है। आरएसएस को आरक्षण पर चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर आरएसएस को सामाजिक सदभाव की इतनी ही चिंता है तो वह बताए कि उसके संगछन में आरक्षित वर्ग के कितने लोग शीर्ष पदों पर बैठे हैं ? उन्होंने अगाह किया है कि अगर आरक्षण में कोई छेड़छाड़ की गयी तो इसके भयानक परिणाण होंगे।

राजद की बंजर जमीन पर हरियाली

राजद की बंजर जमीन पर हरियाली

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राजद की सियासी जमीन बंजर पड़ी हुई थी। लेकिन मोहन भागवत के बयान ने इस बंजर जमीन में हरियाली ला दी। तेजस्वी विमुख थे। लेकिन क्या इत्तेफाक है कि वे जैसे ही पटना लौटे, उन्हें एक रेडीमेड मुद्दा मिल गया। फिर तो राजद में भाजपा और संघ को आरक्षण विरोधी बताने की होड़ शुरू हो गयी। सांसद मनोज झा ने कहा कि संघ आग से खेलने की कोशिश मत करे। तेजस्वी को भी लगा कि पिछड़े वोटरों को गोलबंद करने का यह बेहतरीन मौका है। सो लगे हाथ उन्होंने केन्द्रीय सेवा में आरक्षित वर्ग के खाली पड़े पदों का मुद्दा उठा दिया। राजद के विधायक भाई वीरेन्द्र ने चेतावनी दी कि अगर आरक्षण में छेड़छाड़ हुई तो हम लोग सड़कों पर उतरेंगे और जन आंदोलन शुरू करेंगे। तेजस्वी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में आरक्षण को लेकर संविधान बचाओ यात्रा की थी लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला था। लेकिन मोहन भागवत के बयान के बाद तेजस्वी एक बार फिर पिछड़े वर्ग को लोगों राजद के पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। तेजस्वी यह भी बताने की कोशिश कर रहे हैं कि आरक्षण की हिफाजत केवल राजद कर सकता है, जदयू तो भाजपा के काबू में है।

सफाई के लिए मजबूर भाजपा

सफाई के लिए मजबूर भाजपा

मोहन भागवत ने कभी आरक्षण हटाने की बात नहीं की लेकिन विपक्ष उनके बयान को हमेशा इसी रूप में पेश करता है। विपक्ष की इस चाल से भाजपा बैकफुट पर आ जाती है। उसे हर बार सफाई देनी पड़ती है। वह इसलिए क्यों कि वह नहीं चाहती कि देश का बहुसंख्यक समाज उसके बारे में कोई गलत धारणा स्थापित करे। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एक बार फिर संघ और पार्टी के बचाव में सामने आये हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा और संघ ने कई बार स्पष्ट किया है कि आरक्षण कभी समाप्त नहीं होगा। इसके बाद भी संघ प्रमुख के बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। भाजपा के अन्य नेताओं का कहना है कि राजद-कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के समय भी जनता को बरगलाने की कोशिश की थी लेकिन कामयाबी नहीं मिली थी। जनता ने इनके झूठे आरोपों को नकार दिया था और एनडीए को अपना समर्थन दिया था।

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