रवि किशन केे बहाने बिहार में नीतीश को पिन चुभोएगी भाजपा?

पटना। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के सौ दिन पूरा होने पर बिहार भाजपा की प्रेस कांफ्रेस में गोरखपुर के सांसद रवि किशन क्यों शामिल हुए ? पटना स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में उनके मीडिया से मुखातिब होने की वजह क्या थी ? बिहार भाजपा के दिग्गज नेता और डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने केन्द्र सरकार की उपलब्धियां गिनायीं फिर भी रवि किशन के शिरकत की दरकार क्यों पड़ी ? दरअसल भाजपा ने अब चुनावी दौड़ में जदयू से ही होड़ करने की ठान ली है। जिस तरह से जदयू ने बहुत पहले ही अपने चुनावी नारों से समां बांधने की शुरुआत की है, उसमें भाजपा पिछड़ना नहीं चाहती। रवि किशन के बहाने भाजपा ने यह संकेत देने भी शुरू कर दिये हैं कि वह बिहार विधानसभा चुनाव में उन मुद्दों को भी उठा सकती है जिससे नीतीश को सख्त परहेज है।

वो बात भी होगी जो नीतीश को पसंद नहीं

वो बात भी होगी जो नीतीश को पसंद नहीं

भाजपा विरोधी दलों से पहले अपने सहयोगी दल जदयू को ही तौल लेना चाहती है। नीतीश के नये नारों से बिहार में एक साल पहले ही चुनावी चर्चा शुरू हो गयी है। नीतीश कुमार को लेकर जदयू कितना संजीदा है यह उसके नये नारे में सुधार से पता चल जाता है। जैसे ही ‘ठीके हैं नीतीश कुमार' पर पार्टी को अपनी गलती का एहसास हुआ, तुरंत ही यह नारा बदल दिया गया। अब नारा दिया गया, क्यों करें विचार, जब है ही नीतीश कुमार। जाहिर है जदयू की राजनीति का केन्द्रबिन्दु नीतीश हैं। इसके काट में अब भाजपा खुल कर पार्टी लाइन को फॉलो करना चाहती है। बिहार भाजपा प्रभारी भूपेन्द्र यादव ने शनिवार को धारा 370 को मुद्दा बनाने की बात कही थी तो सोमवार को रवि किशन ने राममंदिर का राग छेड़ दिया। अब बिहार आ कर कोई भाजपा सांसद राम मंदिर बनाने की बात करे तो नीतीश की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

क्या कहा रवि किशन ने ?

क्या कहा रवि किशन ने ?

रवि किशन ने पटना में वही कहा जो भाजपा का बेसिक एजेंडा है। उन्होंने धारा 370 को हटाने के फैसले को सरकार की बड़ी उपलब्ध बताया। पूरा कश्मीर लेने की बात कही। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जल्द ही राम मंदिर का निर्माण होगा। हालांकि उन्होंने नीतीश कुमार के राजगीर में फिल्म सिटी बनाने और यहां शूटिंग करने पर 25 लाख के अनुदान के प्रस्ताव की तारीफ की। लेकिन इस फिल्म अभिनेता ने उन बातों का जिक्र कर दिया जो नीतीश कुमार को बिल्कुल भी पसंद नहीं। तीन तलाक और धारा 370 पर नीतीश ने किसी तरह कड़वा घूंट पी लिया लेकिन वह राम मंदिर पर शायद ही खामोश रहें। उनकी सहयोगी पार्टी का कोई सांसद पटना में आ कर अगर राम मंदिर बनाने की बात करे तो ये नीतीश को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा। चूंकि बिहार भाजपा का कोई नेता ऐसी बात कह नहीं सकता था। सरकार में भाजपा भी शामिल है। बात बिगड़ सकती थी। इस लिए योगी और शाह के नये दूत रवि किशन को इसके लिए मुफीद समझा गया। तो क्या बिहार चुनाव में भाजपा किसी हद तक जा सकती है ?

बिहार में स्टार प्रचार होंगे रवि किशन!

बिहार में स्टार प्रचार होंगे रवि किशन!

रवि किशन भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार हैं। हिन्दी और साउथ की फिल्मों में भी उनका अच्छा नाम है। वे अकेले ऐसे अभिनेता हैं जिन्हें भोजपुरी और हिन्दी फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। 2003 में सलमान खान अभिनीत फिल्म ‘तेरे नाम' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला था। इसके बाद उनकी भोजपुरी फिल्म ‘कब होई गवनवा हमार' को सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। अभी उनकी फिल्म ‘बाटला हाउस' चर्चा में है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले रवि किशन पहले कांग्रेस में थे। 2014 का चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से लड़ा था। बहुत शर्मनाक हार हुई थी। अभिनेता से भाजपा सांसद बने मनोज तिवारी का याराना काम आया । 2017 में वे भाजपा में शामिल हो गये। 2019 में उन्होंने गोरखपुर से चुनाव जीत कर इतिहास रच दिया। भाजपा में आने के बाद उनका सितारा बुलंद है। अपनी भोजपुरी फिल्मों की वजह से रवि किशन बिहार के लाखों लोगों के दिलों पर राज करते हैं। भाजपा रवि किशन को बिहार विधानसभा चुनाव में स्टार प्रचारक बनाने की सोच रही है। शत्रुघ्न सिन्हा के कांग्रेस में चले जाने के बाद पार्टी इसकी भरपायी करना चाहती है।

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