प्रियंका की बोट यात्रा क्यों बढ़ाएगी बीजेपी के वोट?
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नई दिल्ली- कांग्रेस की नई-नवेली महासचिव उसी पिच पर फिल्डिंग करने पहुंची हैं, जिसपर 2014 में बैटिंग करके नरेंद्र मोदी यूपी में वोटों के चौके-छक्के लगाकर पार्टी के लिए सीटों की बरसात करा चुके हैं। मोदी ने गंगा मैया के बुलावे पर देश की सेवा के लिए काशी पहुंचने की बात की थी। उन्हें गंगा मैया का आशीर्वाद मिला और वो तीन दशक बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार में प्रधानमंत्री बन गए। 5 साल बाद अब प्रियंका गांधी वाड्रा भी मां गंगा के सहारे ही लोगों तक पहुंचने की बात कर रही हैं। लेकिन, जाने-अनजाने में उन्होंने कहीं बीजेपी को उसकी ही पिच पर धुआंधार बैटिंग करने का मौका तो नहीं थमा दिया है?

गंगा जल से आचमन और वॉटरवेज से यात्रा
'बोट यात्रा' शुरू करने से पहले प्रियंका गांधी वाड्रा ने वाकायदा मां गंगा की पूजा की और पवित्र गंगा जल से आचमन भी किया। ऐसे समय में जब मोदी और बीजेपी की गंगा सफाई के दावों की सच्चाई को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जाते हैं, कहीं प्रियंका ने निर्मल और स्वच्छ गंगा का सर्टिफिकेट मोदी को तो नहीं थमा दिया है? अब कांग्रेसी क्या कहकर बीजेपी पर हमला कर सकेंगे कि गंगा साफ नहीं हुई है! उसने जो वादा पूरा किया था, वह नहीं हुआ है!
अभी हाल ही में एक 'संकट मोचन फांउडेशन' की एक रिपोर्ट को लेकर भी खूब बवाल मच चुका है। उसने गंगा की सफाई को लेकर कई सवाल उठाए थे। हालांकि, बाद में उस रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए जा चुके हैं। यही नहीं, राहुल गांधी की बहन प्रयागराज से गंगा में जिस रास्ते मोदी के चुनावी क्षेत्र काशी तक का सफर कर रही हैं, वह भी उनके प्रिय प्रोजेक्ट इनलैंड वॉटरवेज का हिस्सा माना जाता है। यानी अगर चुनावी नजरिए से देखें तो प्रियंका यह दूसरा बड़ा मुद्दा भी बीजेपी को थमा चुकी हैं। क्या 5 साल पहले प्रयागराज से काशी तक की बोट यात्रा इतनी आसान हो पाती! यानी मोदी और बीजेपी ने गंगा की पवित्रता और उसकी जीवंतता बनाए रखने के लिए कुछ नहीं किया है, यह बात कांग्रेस यह कैसे कह पाएगी! वह भी वहीं के लोगों से जो कहीं न कहीं कुछ न कुछ बदलाव के गवाह भी रहे होंगे।

मोदी की पिच पर फिल्डिंग!
भारत और यहां के लोगों के लिए गंगा की अहमियत किसी से छिपी नहीं है। खासकर उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए गंगा न सिर्फ पवित्र जल की धारा है, बल्कि वह वहां की जीवनधारा है। मोदी 2014 में यूपी से बीजेपी को जीत दिलाकर दिल्ली पहुंचे थे, तो उसमें गंगा की पवित्रता को वापस करने का सौगंध भी शामिल था। इसमें कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस ने प्रियंका की 'गंगा यात्रा' की जो रूप रेखा तैयार की है, उसमें मोदी के उसी मास्टरस्ट्रोक को पलटने की चिंता शामिल है। बोट यात्रा शुरू करने से पहले प्रियंका ने इलाके के लोगों को जो खत लिखा, उसमें उन्होंने कहा भी है- "गंगा सच्चाई और समानता की प्रतीक है। गंगा हमारी गंगा-जमुनी संस्कृति की चिन्ह है। वे किसी से भेदभाव नहीं करती। गंगाजी उत्तर प्रदेश का सहारा हैं। मैं गंगाजी का सहारा लेकर भी आपके बीच पहुंचुंगी।"
यही नहीं खबरें हैं कि वो इस दौरान उत्तर प्रदेश के छात्रों से 'बोट पे चर्चा' भी करेंगी। 16वीं लोकसभा के चुनाव के दौरान 'चाय पे चर्चा' की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। सवाल है कि क्या कांग्रेस के रणनीतिकारों के पास मोदी को चुनौती देने के लिए उन्हीं के मुद्दे और उन्हीं का रास्ता अपनाने का विकल्प बचा था। सवाल ये भी उठता है कि क्या वाकई यह रणनीति राज्य में एक तरह से मृतप्राय हो चुके संगठन में जान फूंकने के लिए काफी है। या कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि इसके कारण कांग्रेस ने बीजेपी के हाथों में उसी का मुद्दा थमा दिया हो?

निर्मल गंगा की स्थिति
'नमामि गंगे' योजना मोदी की एक बहुप्रचारित योजना रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते साल तक इसके तहत 24,672 करोड़ रुपये के 254 प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई। इसमें सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर,घाटों, शवदाहगृहों का विकास, रिवरफ्रंट डेवलपमेंट, नदी की सफाई, ग्रामीण स्वच्छता और जैव विविधता संरक्षण जैसी योजनाएं शामिल हैं। इनमें से कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहे हैं और उनके मार्च में पूरा होने की संभावना है। गंगा की सफाई के लिए हरिद्वार से साहिबगंज तक ट्रैश स्किमर्स भी काम कर रहे हैं। गंगा किनारे बसे 4465 गांव खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित हो चुके हैं।
उत्तर प्रदेश में कानपुर के निटक सीसामऊ नाले का गंदा पानी गंगा में गिरने से रुक जाना गंगा सफाई के मद्देनजर बड़ी कामयाबी कही जा सकती है। इसके कारण 140 एमएलडी (140 MLD) प्रदूषित पानी का प्रवाह गंगा जल में मिलने से बच गया है और उसे एसटीपी ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाने लगा है। इसके अलावा गंगा जल की गुणवत्ता की जांच के लिए इस योजना के तहत 36 रियल टाइम वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (RTWQMS) चालू होने का दावा किया जा रहा है।

बीजेपी के पास मौका
उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार ने हाल ही में प्रयागराज में कुंभ का सफल आयोजन किया है। लगभग दो महीने के कुंभ के दौरान करोड़ों श्रद्दालुओं ने यहां संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इसबार दुनिया के सैकड़ों देशों के प्रतिनिधियों को मोदी सरकार ने कुंभ स्नान के लिए निमंत्रण भेजा था और सब जगह से लोगों ने आकर संगम में पवित्र स्नान का लाभ भी उठाया। लेकिन, कहीं से भी गंगा की अस्वच्छता को लेकर कोई विशेष चर्चा नहीं सुनी गई। ऐसे में प्रियंका गांधी की गंगा यात्रा मोदी को घेरने में कितनी कामयाब होगी यह देखना दिलचस्प होगा। क्योंकि, इसके कारण यूपी में ही नहीं पूरे देश में मोदी और योगी की जोड़ी को गंगा की स्वच्छता और कुंभ की सफलता को बीजेपी सरकार की बड़ी कामयाबी के रूप में पेश करने का मौका मिल सकता है, जिसकी तस्दीक जाने-अनजाने में कांग्रेस की पूर्वी यूपी प्रभारी महासचिव और कांग्रेस अध्यक्ष की बहन भी कर चुकी हैं।












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