मोदी का वादा ही रह गया नेशनल वार मेमोरियल का निर्माण
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) अभी कुछ समय पहले इंडिया गेट के करीब से आते हुए देखा कि उससे सटे हुए प्रिंसेस पार्क में सब कुछ सामान्य है। वहां पर रहने वाले रह रहे है। वहां पर जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही है। लगता है कि इधर काम करने वाले या रहने वालों को मालूम भी नहीं कि मंगलवार को मोदी सरकार अपने कार्यकाल का एक साल पूरा कर रही है।
कब बनेगा स्मारक
पर प्रिंसिस पार्क को देखकर हैरानी इसलिए हुई क्योंकि इधर ही नेशनल वार मेमोरियल यानी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण होना था या कहें कि सरकार ने इसके यहां पर निर्माण का वादा किया था।
मोदी के वादे का क्या हुआ
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजधानी में स्मारक को बनाने का बार-बार वादा किया। घोषणा की। उनके वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्मारक के निर्माण के लिए इस सरकार के अंतरिम बजट में 100 करोड़ रुपये रखे भी थे। पर उसके बाद स्मारक के काम को क्या हुआ, किसी को इसकी जानकारी नहीं है।
10-12 एकड़ में फैला
दरअसल प्रिंसिस पार्क में ही स्मारक का निर्माण होना था। प्रिसिंस पार्क में भारतीय सेना के अधिकारियों के घर हैं। कुछ दफ्तर भी है। करीब 10-12 एकड़ में फैला है ये क्षेत्र। राजधानी के इंडिया गेट से बिल्कुल साथ है प्रिसिंस पार्क।
लिखे जाएंगे वीरों के नाम
सरकार ने वादा किया था कि देश की राजधानी में बनने वाले वार मेमोरियल में 1947-48, 1962,1965,1971, कारगिल में शहीद हुए वीरों के नाम लिखे जाएंगे। रक्षा मामलों के जानकार पुष्परंजन ने कहा कि सरकार जब सैनिको के वन रैंक-वन पेंशन के वादे को लेंकर गंभीरता से काम कर रही तो उसे वार मेमोरियल को लेकर भी गंभीर रुख अपनाना चाहिए। ये शर्म की बात है कि स्वतंत्र भारत ने अपने वीर गति को प्राप्त सैनिकों के लिए अभी तक कोई स्मारक तक नहीं बनाया।
चंडीगढ़ में वार मेमोरियल
हालांकि चंडीगढ़ में भी एक वार मेमोरियल है, पर उसमें तो सिर्फ हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के शहीद जवानों के नाम ही अंकित हैं। बहरहाल, प्रिंसिस पार्क के ताजा सूरते हाल को देखकर तो आराम से कहा जा सकता है कि वहां पर वार मेमोरियल के निर्माण में अभी कई बरस और लगेंगे।













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