• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

क्या ट्रैक-2 डिप्लोमेसी से सुधरेंगे भारत-पाक रिश्ते?

By Bbc Hindi

भारत पाकिस्तान
Getty Images
भारत पाकिस्तान

भारत और पाकिस्तान के बीच सरकारी स्तर पर बातचीत बंद है. हाल ही में कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर पाकिस्तान के कुछ अधिकारी और भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री के बीच हुई मुलाक़ात ने काफी सुर्खियां बटोरीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुलाक़ात पर सवाल उठाए और आरोप लगाए कि इस बैठक में गुजरात चुनाव के सिलसिले में बातें हुई थी.

बैठक में मौजूद रहे पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा है कि वे भारत-पाक के बीच चलने वाली ट्रैक-2 डिप्लोमेसी में लंबे समय से जुड़े रहे हैं और दोनों देशों के बीच सुलह के पक्षकार हैं.

आख़िर यह ट्रैक-2 डिप्लोमेसी क्या होती है और क्या इससे भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सुधर सकते हैं?

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी
Getty Images
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी

क्या होती है ट्रैक-2 डिप्लोमेसी?

दो देशों के बीच आपसी संवाद कायम करने के लिए सरकारी स्तर से इतर जो बातचीत या मुलाक़ातें की जाती हैं उन्हें ट्रैक-2 डिप्लोमेसी कहा जाता है.

इस तरह की कूटनीति में सांस्कृतिक मुलाक़ातें, कार्यक्रम, पत्रकारों की बातचीत, पूर्व मंत्रियों या अधिकारियों की बातचीत आदि शामिल होती है.

भारत की तरफ़ से ट्रैक-2 डिप्लोमेसी का हिस्सा रह चुके वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक इस संबंध में बताते हैं, ''जिन दो देशों के बीच आपसी रिश्ते होते हैं उनके कुछ प्रतिनिधि हमेशा मिलते जुलते रहते हैं, कई मौकों पर ये मुलाक़ातें औपचारिक नहीं होती या आसान शब्दों में कहें तो ये गोपनीय होती हैं, इन्ही को ट्रैक-2 डिप्लोमेसी कहा जाता है.''

वैदिक बताते हैं, ''आमतौर पर यह बातचीत सरकार की कोशिशों से ही सफल होती है. दो देशों के प्रधानमंत्री इसके लिए अपनी सहमति देते हैं.''

''हालांकि ट्रैक-2 डिप्लोमेसी का प्रचार प्रसार नहीं किया जाता न ही मीडिया को इसके बारे में ज़्यादा कुछ बताया जाता है.''

भारत पाकिस्तान
Getty Images
भारत पाकिस्तान

ट्रैक-2 डिप्लोमेसी का कितना महत्व होता है ?

जब दो देशों के बीच आपसी बातचीत बंद हो और कई तरह के विवाद बने हों, ऐसे वक्त में ट्रैक-2 डिप्लोमेसी कितनी ज़रूरी हो जाती है.

इस संबंध में वैदिक बताते हैं, ''दोनों देशों के वे लोग इस डिप्लोमेसी का हिस्सा होते हैं जो तमाम विवादों के जानकार होते हैं, जिनका उन देशों में आपसी संबंध ख़राब होने बावजूद व्यक्तिगत संबंध या सम्मान बहुत ज़्यादा होता है.''

''कई मौकों पर ट्रैक-2 डिप्लोमेसी ट्रैक-1 डिप्लोमेसी से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि औपचारिक बातचीत को सभी के सामने रखना होता है लेकिन ट्रैक-2 डिप्लोमेसी में बातें ज़्यादा आसानी से हो जाती है और लगभग सभी देश इस तरह की डिप्लोमेसी करते हैं, चाहे वे उत्तर कोरिया और रूस हो या चीन और अमरीका हो.''

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के साथ (फाइल फोटो)
Getty Images
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के साथ (फाइल फोटो)

इन मुलाक़ातों में किन मुद्दों पर बातचीत होती है?

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाए थे कि मणिशंकर अय्यर के घर हुई बैठक में गुजरात चुनाव के सिलसिले में बातचीत हुई थी. तो क्या सचमुच इस तरह की अनौपचारिक मुलाकातों में किसी देश के भीतरी मुद्दों पर चर्चा होती है.

इस बारे में वैदिक बताते हैं, ''भारत और पाकिस्तान के बीच जब ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के तहत बातचीत होती है तो सबसे जरूरी मुद्दा कश्मीर होता है, इसके अलावा पानी के मसले पर भी बात होती है, साथ ही मोस्ट फेवर्ड नेशन के मसले पर भी बातचीत की जाती है.''

वे आगे बताते हैं, ''मैंने ऐसी ही एक बैठक में मध्य एशिया तक जाने के लिए पाकिस्तान के जरिए रास्ता दिए जाने की बात रखी थी, इसके अलावा पाकिस्तान की तरफ से मुंबई में स्थित जिन्ना हाउस को लौटाने की बात और वीजा नियमों को आसान बनाने की बात होती है.''

''कभी-कभी वे हमारे देश में होने वाले सांप्रदायिक दंगों पर बात करते हैं तो हम भी उनके देशों में चलने वाले चरमपंथी अड्डों को बंद करने की बात उठाते हैं.''

भारत पाकिस्तान
Getty Images
भारत पाकिस्तान

क्या ट्रैक-2 डिप्लोमेसी से औपचारिक बातचीत का रास्ता खुलता है?

भारत और पाकिस्तान के बीच सरकारी स्तर पर बातचीत बंद है ऐसे में दोनों देशों के रिश्ते सुधारने में ट्रैक-2 डिप्लोमेसी का कोई रास्ता हो सकता है.

वैदिक का कहना है,''ट्रैक-2 डिप्लोमेसी किसी भी देश के लिए बहुत ज़रूरी होती है, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री खुद ही ट्रैक-2 पर उतर आते हैं.''

''ट्रैक-2 डिप्लोमेसी में पक्ष या विपक्ष किसी भी दल के लोग शामिल हो सकते हैं. लेकिन वर्तमान सरकार में ऐसी बातचीत करने वाले लोगों की कमी है. ऐसे में यह सरकार पाकिस्तान के साथ बेहतर बातचीत कर सकेगी यह समझना मुश्किल लगता है.''

वैदिक के अनुसार इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के वक्त ट्रैक-2 डिप्लोमेसी बहुत बेहतर रही. वे बताते हैं, '' राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री पद पर नहीं थे तब भी पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्तों की कोशिश करते रहते थे.''

भारत पाकिस्तान
Getty Images
भारत पाकिस्तान

हालांकि वैदिक का कहना है कि मणिशंकर अय्यर के घर हुई बैठक कोई ट्रैक-2 डिप्लोमेसी का हिस्सा नहीं थी. उन्होंने बताया, ''पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी भारत में किसी निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे और इसी दौरान वे मणिशंकर अय्यर के घर मुलाक़ात के लिए भी गए थे.''

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Will India Pak relations improve from track 2 diplomacy
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X