क्या आम आदमी पार्टी फिर करेगी चुनावी चमत्कार

दिल्ली में पार्टी की सरकार हालांकि एक मुद्दे में उलझ गई है, तथापि आईएएनएस के राष्ट्रव्यापी स्तर पर कराए गए सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि आप का युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पेशेवरों के साथ-साथ हजारों की संख्या में सेवानिवृत्त नौकरशाहों के बीच जादू कायम है। आप की बढ़त कुछ राज्यों में अच्छाखासा तो कुछ में कमजोर है। नवंबर 2012 में गठित यह पार्टी अब दावा कर रही है कि देश भर में उसके 98 लाख सदस्य हैं।
उत्तर प्रदेश में आप का जोर हो जाने के पीछे शायद दिल्ली का करीबी होना है। दिल्ली आप का सबसे बड़ा और मूल गढ़ है। उत्तर प्रदेश में 18 लाख लोग सदस्य बने हैं। इसके बाद बिहार और महाराष्ट्र का नंबर आता है जहां 10-10 लाख लोग सदस्य बने हैं। दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में से हर एक ने 8 लाख सदस्य होने का दावा किया है।
हरियाणा और महाराष्ट्र में हो सकता है चमत्कार
इसके बाद अन्य राज्यों का नंबर आता है। चूंकि हरियाणा और महाराष्ट्र में इसी वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं इसीलिए आप इन दोनों पर ज्यादा ध्यान दे रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मूल रूप से हरियाणा के भिवानी जिले के रहने वाले हैं और उनके चाचा आज भी वहीं रहते हैं। राजनीतिक विश्लेषक और आप के रणनीतिकार योगेंद्र यादव को हरियाणा के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है और वे दिल्ली से सटे हरियाणा के गुड़गांव सीट से लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी भी हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के 72 जिलों में आप की इकाई सक्रिय है और पार्टी यहां सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ने की आस लगाए बैठी है। आप के नेता कुमार विश्वास अमेठी में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ भिड़ने चल पड़े हैं। पार्टी के कई नेता उत्तर प्रदेश से ही ताल्लुक रखते हैं। ऐसे नेताओं में आशुतोष (मिर्जापुर), मनीष सिसोदिया (गाजियाबाद), शाजिया इल्मी (कानपुर) और संजय सिंह (सुल्तानपुर) शामिल हैं।
राजनीतिक विश्लेषक विजय कुमार शर्मा ने आईएएनएस से जयपुर में कहा कि आप हर जगह चर्चा का विषय बना हुआ है। इन सबके बावजूद आप के लिए लोकसभा की लड़ाई उतनी आसान नहीं है, क्योंकि इसका नेटवर्क नया और पूरी तरह से व्यवस्थित नहीं हो पाया है। पार्टी के प्रशंसक हैं तो उसके आलोचक भी खड़े हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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