घायल पति को खाट पर लिटाकर पत्नी ले गई बैंक, तब जाकर मिले धान के पैसे
नई दिल्ली। किसानों को अपने ही पसीने की कमाई लेने के लिए कितने संघर्ष करने पड़ते हैं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की यह घटना उसका सटीक उदाहरण हैं। यहां एक किसान, गुहाराम साहू को उसकी पत्नी पैसे निकालने के लिए खाट पर लिटाकर गांव वालों की मदद से बैंक लेकर गई। क्योंकि बैंक ने एक दिन पहले उसकी पत्नी जो कि खाते की नॉमिनी भी थी को पैसे देने से मना कर दिया था।

बैंक ने नहीं दिए पैसे
मिली जानकारी के मुताबिक धमतरी जिले के रहने वाले किसान, गुहाराम साहू ने धान को सरकारी समर्थन मूल्य में बेचा था। इसका पैसा जिले के एक सहकारी बैंक में आया था। कुछ दिनों पहले गुहाराम एक एकसीडेंट में घायल हो गया जिसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल पति के इलाज के लिए उसकी पत्नी, रमा बाई जो कि खाते में नामिनी थी ने ग्राम पंचायत से जारी पहचान पत्र, अपने पति का जिला अस्पताल में भर्ती पर्ची, पति से भुगतान का अधिकार पत्र लेकर बैंक पहुंची। लेकिन बैंक के एकाउंटेंट नियमों को धत्ता बताते हुए रमा बाई को पैसे देने से इंकार कर दिया। रमा बाई ने काफी हाथ-पैर जोड़े लेकिन उसकी विनती का एकाउंटेंट पर कोई असर नहीं पड़ा।

मीडिया को देखते ही तुरंत दिए पैसे
गुरुवार को रमा बाई अपने बीमार पति को खाट पर लिटाकर गांव वालों की मदद से बैंक लेकर पहुंची। बैंक पर ग्रामीणों और मीडिया की भीड़ देखते ही मैनेजर ने तुंरत एकाउंटेंट को पैसे जारी करने का आदेश दिया। जिस एकाउंटेंट ने पैसे देने से इंकार किया थो वो गुरुवार को छुट्टी पर था।

मैनेजर ने कहा- मैं क्या कर सकता हूं।
इस पूरे मामले में मैनेजर ने बताया कि इसमें बैक को दोष देना गलत है। बैंक में इस तरह की पहले कई धोखाधड़ी की घटनाएं हो चुकी हैं। मैंने इस मामले में एकाउंटेंट को भुगतान करने का आदेश दिया था लेकिन उसने नहीं किया। इसमें मैं क्या कर सकता हूं।












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