बाकी विश्वविद्यालय छोड़कर सिर्फ DU पर ही क्यों UGC की नज़र

दरअसल क्यों ना ये कहा जाए कि फैसला नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद व इसी प्रभाव के चलते लिया गया। अशोका यूनिवर्सिटी, अंबेडकर यूनिवर्सटी, शिवनाडर यूनिवर्सिटी जैसे दिग्गज विश्वविद्यालयों पर भी यूजीसी का उतना ही अधिकार है, जितना कि डीयू पर।
पढ़ें- DU की दाल में 'राजनीति' के कंकड़
फिर सारा नियम-कानून का बोझ सिर्फ डीयू पर ही क्यों? आपने तस्वीर में देखा होगा कि अशोका यूनिवर्सिटी की वेबसाइट से ली गई है। ऑनर्स कोर्स में चार साल का वक्त जिस विशेषज्ञता से रखा गया है, क्या वह सत्ता के बदलाव में ढह जाएगा।
ये वे सवाल हैं, जिनकी आड़ में चार वर्षीय व तीन वर्षीय के फायदे-नुकसान गिनाए जा रहे हैं व मामले को शिक्षा से जुड़ा हुआ बताकर आवाजें मौन हो जा रही हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि इन सब घटनाओं के बीच छात्रों के भविष्य का क्या होगा?
हालांकि डीयू की प्रेस कॉन्फ्रेंंस में इस बात पर जोर दिया गया कि जिन छात्रों ने आवेदन किया है, उन्हें उनकी मांग के मुताबिक ही कोर्स का फायदा मिलेगा। सवाल यहां सिर्फ इतना है कि क्या देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी को ही टार्गेट बनाया जा रहा है, जिससे भारत को शिक्षा में आधुनिकतम दिखाकर बुनियादी नियम-कानूनों में सत्ता की कलई घोल दी जाए।












Click it and Unblock the Notifications