#Pak JIT : खौफनाक अतीत के भरोसे बेखौफ वर्तमान का ख्वाब?

पठानकोट। यह पहला मौका है जब किसी आतंकी हमले की जांच के सिलसिले में पाकिस्तान की टीम भारत आई, यह विचित्र है। जनवरी में पठानकोट के वायुसेना ठिकाने पर हुए आतंकी हमले की जांच के वास्ते पाकिस्तानी टीम के आने पर स्वाभाविक ही कई सवाल उठे हैं।

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जेआटी के साथ उठे कई सवाल

मसलन, पाकिस्तान की जांच टीम को क्यों आने दिया गया। इस जांच से क्या हासिल होगा। क्या पाकिस्तान जांच को लेकर संजीदा है और उसे तर्कसंगत परिणति तक ले जाने को तैयार होगा? अगर उससे सच्चाई को कबूलकरने और उसके अनुरूप कदम उठाने की उम्मीद नहीं की जा सकती, तो यह व्यर्थ की कवायद क्यों? इन सवालों को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता।

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पाक का जांच दल और विवाद

पाक का जांच दल और विवाद

क्‍या पाक पर किया जा सकता है भरोसा

अब यदि अतीत की बात करें तो पाकिस्तान कभी भी भारत के लिए भरोसेमंद साबित नहीं हुआ है। उसके खौफनाक कारनामे हमेशा उजागर होते रहे हैं, फिर पाकिस्तान के सहारे भारत बेखौफ वर्तमान का ख्वाब क्यों देख रहा है? देश ही नहीं, पूरी दुनिया जानना चाहती है कि हमेशा से पाकिस्तान को कोसते रहने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की भारत में सरकार बनते ही आखिर अचानक क्या हो गया कि भाजपा नेता पाकिस्तान में इतने मेहरबान हो गए। पाकिस्तान को विश्वासपात्र मानने लगे।

अजीज से मुलाकात के बाद जेआईटी आई भारत

दरअसल, पाक की जांच टीम के आने की घोषणा पिछले दिनों विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने काठमांडो में पाकिस्तान सरकार के सलाहकार सरताज अजीज से मुलाकात के बाद की थी। हो सकता है इस मुलाकात में उन्हें पाकिस्तान के रवैए में बदलाव के संकेत मिले हों।

अगर सुबूतों से मुकर गया पाकिस्‍तान

पाक के पीएम नवाज शरीफ अक्सर अपने मुल्क की जमीन पर आतंकवाद को समूल उखाड़ने का संकल्प दोहराते रहते हैं।फिर भी दावे से नहीं कहा जा सकता कि पाक की जांच टीम की भारत यात्रा का सार्थक परिणाम निकलेगा ही। भारत ने नवंबर 2008 के मुंबई हमले से जुड़े ढेर सारे सबूत पाक को सौंपे थे? क्या कार्रवाई हुई? पठानकोट मामले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ होने के तथ्य मिल चुके हैं।

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पाक का जांच दल और विवाद

पाक का जांच दल और विवाद

पाक की ओर से पठानकोट हमले की जांच के लिए आई टीम के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया है।
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जेआईटी के अगले कदम पर सबकी नजरें

पाक ने जैश के सरगना अजहर मसूद के खिलाफ क्या किया।गौरतलब है कि पाकिस्तान की टीम जांच के लिए पठानकोट तो पहुंची लेकिन कड़े विरोध के बीच। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब टीम आगे क्या करती है, यह देखना अहम होगा। दो जनवरी को हुए आतंकी हमले की जांच के लिए पाकिस्तान का संयुक्त जांच दल जब वहां पहुंचा तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की।

क्‍यों जेआईटी पहुंची एयरबेस

इस कारण जांच दल को पीछे के दरवाजे से एयरबेस में ले जाया गया। पांच लोगों की इस टीम में आईएसआई का एक अधिकारी भी था।

अधिकारियों के अनुसार, भारतीय टीम के साथ पाकिस्तानी टीम को एयरबेस में उस जगह पर ले जाया गया जहां 80 घंटों तक आतंकियों से सेना की मुठभेड़ हुई।

अंदर जांच बाहर विरोध

इसमें चार आतंकी व सात सुरक्षाकर्मी मारे गए। जिस वक्त टीम अंदर जांच कर रही थी, उस समय एयरबेस के बाहर प्रदर्शनकारी काले झंडे और तख्तियां लिए सरकार की आलोचना कर रहे थे। पठानकोट में आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना था कि जिन लोगों ने हमारे लोगों की जान ली, वही यहां आए हैं, यह शर्मनाक है। यह भारत माता की तौहीन है।

 पाक का जांच दल और विवाद

पाक का जांच दल और विवाद

पाक की ओर से पठानकोट हमले की जांच के लिए आई टीम के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया है।
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सरकार पर लगे तमाम आरोप

मोदी सरकार को ऐसा नहीं करने देंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले में काफी तीखे तेवर अपनाए। कांग्रेस व शिवसेना ने भी बीजेपी पर जनभावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया।

पठानकोट हमला प्रधानमंत्री नरेनद्र मोदी की एकाएक हुई पाक यात्रा के कुछ ही दिन बाद हुआ था। जहां एक तरफ दोनों देशों के संबंधों में बेहतरी पर चर्चा शुरू हुई थी, वहीं पठानकोट हमलों ने रिश्ते बिगाड़ दिए।

आतंकियों को गिरफ्फ्तार करने का दावा

हालांकि पाकिस्तान का दावा है कि उसने इस सिलसिले में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कई आतंकियों को गिरफ्तार किया है। वह भारत के साथ जांच में सहयोग देना चाहता है। इसके विपरीत विपक्ष का आरोप है कि सरकार पाकिस्तान को

ऐसे सुराग दिखा रही है, जिससे देश को भविष्य में और भी खतरा हो सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब टीम आगे क्या करती है, यह देखना अहम होगा।

पहली बार भारत आया कोई जांच दल

पहली बार पाकिस्तान का कोई दल किसी आतंकी मामले की जांच के लिए भारत आया और उसे विपक्षी दलों की कड़ी आलोचनाओं के बीच रणनीतिक महत्व वाले स्थान तक ले जाया गया। टीम को मामले से संबंधित अन्य स्थानों पर भी ले जाया गया जिनमें उंझ नदी शामिल है जिसे पार कर जैश के आतंकी शहर में आये थे।

कौन-कौन था टीम में

पाक जेआईटी का नेतृत्व पंजाब के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक (आतंकवाद निरोधक विभाग) मो.ताहिर राय कर रहे थे, जिसमें आईएसआई के लेफ्टिनेंट क.तनवीर भी हैं। उधर, भारतीय अधिकारियों ने पठानकोट हमले के सबूत देकर पाकिस्तानी अधिकारियों की बोलती बंद कर दी। एनआईए ने पाकिस्तानी जांच दल को एक ऑडियो सुनाया, जिसमें जैश आतंकी मुफ्ती अब्दुल राउफ असगर की आवाज है। ऑडियो में राउफ भारत की जवाबी कार्यवाही का मजाक उड़ा रहा है।

एनआईए करना चाहती है पूछताछ

एनआईए ने इस वाइस सैंपल्स के आधार पर मसूद अजहर व उसके भाई राउफ से पूछताछ की मांग की। राउफ 1999 में कंधार में इंडियन एयरलाइंस विमान हाईजैक में मुख्य आरोपी था। कहा जा रहा है कि अब भारतीय अधिकारी पाक

जाने की तैयारी में हैं, जहां पठानकोट हमले में जैश-ए-मोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर की भूमिका जांचेंगे।

अब आगे क्‍या होगा

पूरे मामले की गहन समीक्षा के उपरांत सवाल यह उठ रहा है कि पाकिस्तान के जांच दल के भारत आने के बाद क्या होगा? दरअसल, कई मामलों की जांच से लेकर हेडली की गवाही तक आईएसआई की संदिग्ध भूमिका सामने आती रही है।

ऐसे में कोई पाकिस्तानी जांच एजेंसी क्या कर सकती है? कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि वह भारत की ओर से सौंपे गए सबूतों को नाकाफी ठहरा दे और कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दे?

अगर ऐसा हुआ तो बेशक केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की बहुत किरकिरी होगी।

खैर, अपनी जांच टीम की इस यात्रा के जरिए पाक की दिलचस्पी दुनिया को यह दिखाने में होगी कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक विश्वसनीय साझेदार है और उसकी मंशा पर शक नहीं किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान यह कूटनीतिक लाभ हासिल करना चाहता है तो करे, कोई हर्ज नहीं, पर इसका पुख्ता आधार होना चाहिए।

अब तक भारत का अनुभव यह रहा है कि आतंकी घटनाओं की बाबत जब भी पाकिस्तान की जवाबदेही की बात उठी है, हर बार उसने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया है कि इन्हें गैर-राजकीय तत्त्वों ने अंजाम दिया, जो उसकी नुमाइंदगी नहीं करते।

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