टीनएजर होते ही मां-बाप की बात सुनना क्यों कम कर देते हैं बच्चे? रिसर्च में निकलकर आई ये वजह
दिल्ली, 9 मई। अगर आपके बच्चे 13 साल की उम्र तक आते-आते आपकी बातों पर ध्यान देना कम कर दें तो उनके इस बदले व्यवहार को देखकर आप क्या सोचेंगे? या तो आप बच्चे के व्यवहार से नाराज होंगे या फिर कभी न कभी यह जरूर ख्याल आएगा कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि जो बच्चे अभी तक आपकी बातों को सुनते आए थे, अचानक उन्होंने ऐसा करना कम कर दिया या बंद ही कर दिया? वैसे इस सवाल के जवाब की तलाश में रिसर्चर भी हैं। हाल में हुई एक स्टडी में पता चला है कि बच्चों के इस बदले व्यवहार के पीछे उनका ब्रेन है। जैसे ही बच्चे बड़े होते-होते टीनएज में पहुंचते हैं, उनके दिमाग में कुछ ऐसे बदलाव होते हैं जिससे उनका व्यवहार भी बदल जाता है। जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में यह स्टडी पब्लिश हुई है जिसमें क्या निकलकर आया है, यह आपको आगे बताएंगे।

13 साल के बाद बच्चों को चाहिए नई आवाजें!
स्टेनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन ने जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में एक स्टडी प्रकाशित कराई है जिसमें यह दावा किया गया है कि 13 साल की उम्र तक पहुंचने के बाद टीनएजर्स नई और अंजानी आवाजों की तरफ आकर्षित होते हैं। मां की आवाज जो वो बचपन से सुनते आए थे, 13 साल की उम्र में उस आवाज को वो सुनना पसंद नहीं करते हैं। स्टडी में यह भी दावा किया गया है कि इसके पीछे साइंस है। टीनएजर्स के ब्रेन में कुछ ऐसे परिवर्तन होते हैं जिस वजह से आवाजों के प्रति उनके रिएक्शन में भी बदलाव आ जाता है। एक रिसर्च के बाद इस स्टडी के निष्कर्ष निकाले गए हैं। आइए आगे इस रिसर्च के बारे में जानते हैं।

एमआरआई मशीन से देखी गई ब्रेन एक्टिविटी
वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च में अलग-अलग एज ग्रुप के बच्चों को लिया। फिर उनको मां की आवाज और किसी अजनबी की आवाज सुनाई गई। ऐसी आवाज जिसको सुनकर बच्चे ये न समझ सकें कि वे क्या कह रहे हैं? मां और अजनबी के साउंड को बस बच्चों को सुनाया गया। एमआरआई मशीन के जरिए यह देखा गया कि बड़ी उम्र के बच्चों में ब्रेन एक्टिविटी बहुत ज्यादा थी जब वे अजनबी की आवाज सुन रहे थे। इस स्टडी के बारे में लिखने वाले डेनियल अब्राम्स का कहना है कि बच्चे मां की आवाज के साथ तालमेल करते हैं लेकन टीनएजर नई आवाजों का साथ चाहते हैं। बड़े होने पर दोस्तों और नए साथियों के साथ समय बिताने का मन करता है। अंजानी आवाजों की तरफ माइंड ज्यादा अट्रैक्ट होता है।

पैरेंट्स के लिए कितनी जरूरी है यह स्टडी?
बड़े होने पर जब बच्चे मां-बाप की बात सुनना कम कर दें तो मां-बाप को भी यह समझना होगा कि ऐसा होना बच्चों के विकास के दौरान नॉर्मल बात है। बच्चे मैच्योरिटी की तरफ आगे बढ़ते हैं तो उनके व्यवहार में इस तरह के बदलाव आते हैं। हलांकि पैरेंट्स को यह सुनना अच्छा नहीं लगेगा लेकिन स्टडी से जो बात निकलकर सामने आई है, वो यही कहती है। हलांकि इस स्टडी में यह कहा गया है कि 13 साल से कम उम्र के बच्चे मां की बात पर ध्यान देते हैं लेकिन ऐसे में तो कई मां यह सवाल उठा सकती हैं कि उनके बच्चे तो उनकी बात पर ध्यान ही नहीं देते, उल्टे उनके नखरों को संभालना मुश्किल हो जाता है।












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