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नवाब मलिक क्यों हैं एनसीपी के दोनों गुटों के लिए जरूरी, वोट बैंक या कुछ और?

Nawab Malik: महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों में के बीच मजबूत नेताओं को एक दूसरे के पाले में करने की होड़ लगातार जारी है। अजित गुट और शरद पवार गुट के नेता लगातार उन नेताओं को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे हैं जो कि आगामी चुनाव में अपने वोट बैंक से पार्टी को फायदा पहुंचा सकें।

इसी क्रम में हाल में जेल से बाहर निकले एनसीपी नेता नवाब मलिक (Nawab Malik) को अपनी तरफ खींचने को लेकर दोनों गुटो में होड़ लग गई है। अजित पवार और छगन भुजबल दोनों नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से नवाब मलिक के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। वहीं शरद पवार गुट के नेता और पूर्व मंत्री अनिल देशमुख भी नवाब मलिक से उनके घर पर मुलाकात करने पहुंचे। पत्रकारों से बातचीत में अनिल देशमुख ने कहा- मलिक को राजनीतिक कारणों से जेल में डाला गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर नवाब मलिक को अपने पाले में करने को लेकर होड़ क्यों लग गई है? चलिए आज हमलोग, इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे। नीचे पढ़ें आखिर नवाब मलिक की डिमांड, दोनों गुटों में क्यों बढ़ गई है?

Nawab Malik

अल्पसंख्यकों के बीच नवाब मलिक की अच्छी छवि
अल्पसंख्यकों के बीच नवाब मलिक की अच्छी छवि है। मुस्लिमों के बीच एनसीपी की पैठ मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है। कहा जाता है कि कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक में भी उन्होंने जबरदस्त सेंधमारी की थी। कहा जाता है के वे खुद को लो प्रोफाइल बनाकर रखते हैं, जिसकी वजह से उन्होंने मुस्लिमों के बीच अच्छी पैठ बना ली है।

सियासत में कितने ताकतवर हैं नवाब मलिक
जब नवाब मलिक (Nawab Malik) ने पहला चुनाव लड़ा तब वे केवल 25 साल के थे। दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद की घटना के बाद वे मुंबई में सक्रिय रहे। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। नेहरू नगर क्षेत्र से उन्होंने 1995 का विधानसभा चुनाव सपा के टिकट पर लड़ा। हालांकि ये चुनाव वो शिवसेना उम्मीदवार से हार गए लेकिन वे दूसरे नंबर पर रहे। हालांकि अगले ही साल चुनाव आयोग ने नेहरू नगर क्षेत्र का चुनाव रद्द कर दिया। एक साल बाद ही उपचुनाव हुआ और इस बार नवाब मलिक साढ़े छह हजार वोटों से चुनाव जीत गए।

1999 में नवाब मलिक को आवास राज्य मंत्री बनाया गया
1999 में जब वे दोबारा विधायक बने तब राज्य में कांग्रेस और एनसीपी की सरकार को सपा के दो विधायकों का समर्थन मिला। इस दौरान नवाब मलिक को आवास राज्य मंत्री बनाया गया। 2004 में नवाब मलिक ने सपा का दामन छोड़कर शरद पवार की एनसीपी में एंट्री किए थे। नवाब मलिक ने 2004 के विधायक चुनाव में नेहरू नगर सीट पर एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़े और फिर से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। 2009 में नवाब मलिक ने अणुशक्ति नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और लगातार चौथी बार विधायक बने।

नवाब मलिक (Nawab Malik) 2014 में फिर से अणुशक्ति नगर विधानसभा से चुनाव लड़े थे लेकिन इस बार वह चुनाव मामूली वोटों से हार गए. शिवसेना ने उनके बहुत ही मामूली वोटों से हरा दिया था। नवाब मलिक 2019 में फिर से अणुशक्ति नगर विधानसभा से चुनाव लड़े और पांचवी बार विधायक बने। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार में गठबंधन की सरकार होने पर नवाब मलिक को एनसीपी कोटे से महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बनाया गया।

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