गुजरात: दंगा मामलों में गवाह रहे लोगों को क्यों लग रहा है डर
सलीम शेख़, नरोदा पाटिया मामले के मुख्य गवाह हैं. उनकी गवाही की मदद से अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने बीजेपी के तत्कालीन विधायक माया कोडनानी और चार दूसरे लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी. शेख ने कोर्ट ने सामने शिनाख़्त परेड में कोडनानी की पहचान की थी.
मामले में तीन सौ से अधिक गवाह थे जिनकी गवाही सुप्रीम कोर्ट की बनाई एक विशेष जाँच टीम ने दर्ज की थी. ज़्यादातर गवाह या तो ख़ुद ही पीड़ित थे या उन्होंने दंगों में किसी अपने को खोया था. इनमें से कुछ लोग शिकायतकर्ता भी थे.
बीबीसी ने इनमें से कुछ गवाहों से बात करने की कोशिश की. कई लोगों ने बात करने से मना कर दिया, तो कुछ ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बात की.
बिलकिस बानो के मामले में 11 दोषियों की रिहाई के बाद बिलकिस ने एक बयान जारी किया जिससे साफ़ झलकता है कि वो अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.
उनके क़रीबी लोगों ने बताया कि उनका परिवार एक जगह पर बहुत दिनों तक नहीं रहता और पिछले दस सालों में वो घर बदलते रहे हैं. बिलकिस ने अपने बयान में सभी 11 दोषियों को वापस जेल भेजने की अपील की है.
'कभी-कभी पछतावा होता है'
शेख अपने परिवार को खो चुके थे और उन्होंने 27 फ़रवरी 2022 को कोडनानी को दूर से देखा था. अपने बयान में उन्होंने कहा कि उन्होंने कोडनानी को दंगाइयों से बात करते हुए देखा था, जिन्होंने उस इलाके से भागने के बजाय मुस्लिम घरों पर हमला करना शुरू कर दिया था.
उन्होंने कहा, "मैंने शिनाख्त परेड में उनकी (कोडनानी) और उनके चार समर्थकों की शिनाख़्त की थी. मेरे बयान के बाद उन्हें उम्र कैदी की सज़ा सुनाई गई थी."
शेख रिक्शा चलाते हैं और उनके पांच बच्चे हैं. उनकी तीन बेटियों की शादी हो चुकी है, एक बेटा कॉलेज में पढ़ता है और दूसरे बेटा बेरोज़गार है.
उनका कहना है कि अब उन्हें अपने परिवार की चिंता हो रही है. वे कहते हैं, "मैंने आगे आकर ताकतवर लोगों के ख़िलाफ़ बयान दिया, वो कुछ भी कर सकते हैं. अभी मैंने अपने एक बेटे को दूसरे राज्य में भेज दिया है. मुझे लगता है उनकी जान को ख़तरा है. कभी कभी मुझे नारोदा पाटिया केस के मुख्य गवाह बनने का अफ़सोस होता है."
यह पूछे जाने पर कि उन्हें किस बात का डर है, वो कहते हैं कि जिन लोगों को उम्रकैद की सज़ा हुई थी वो इसी इलाके में रहते हैं और जब भी वो आमने-सामने आते हैं, उनके हावभाव से उन्हें डर लगता है. वो उन लोगों की बात कर रहे हैं जिन्हें उम्र कैद की सज़ा हुई थी लेकिन वो बेल पर बाहर हैं.
वो कहते हैं कि उन्हें डर लगा रहता है कि उन्हें किसी ग़लत मामले में फंसा दिया जाएगा, शेख का कहना है कि ये लोग जेल से बाहर आ गए हैं और अब बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं.
बीबीसी ने इस बारे में गुजरात बीजेपी के प्रवक्ता याग्नेश दवे से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने इन आरोपों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "मैं इस बारे में कोई भी बात नहीं करना चाहता."
बशीर ख़ान का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार उन अभियुक्तों का साथ दे रही हैं, जिन्हें गवाहियों के बाद जेल भेज दिया गया था. वो कहते हैं, "ये बात सभी को पता है, कि उन्हें बहुत समर्थन मिल रहा है, पहले ऐसा नहीं होता था. मुझे डर लग रहा है क्योंकि मैं सिर्फ़ गवाह नहीं शिकायतकर्ता भी हूं. "
27 फ़रवरी 2002 को जब उनके इलाके में दंगा फैला, तब ख़ान वहीं मौजूद थे. वो कहते हैं, "उसके बाद मैंने आगे आकर क़ानूनी तरीके से लड़ने का फ़ैसला किया. मैंने शिकायत दर्ज कराई, गवाह बना और इंसाफ़ के लिए लगातार कोर्ट के चक्कर काटता रहा क्योंकि सभी अभियुक्त जेल से बाहर आने में कामयाब रहे थे."
- गुजरात दंगे: 'बेदाग़ मोदी' बचेंगे ज़किया के 'सुप्रीम प्रहार' से?
- बिलकिस बानो गैंगरेप केस में क्या इंसाफ़ हो गया है?
20 साल में दिवालिया हो गए
बशीर ख़ान कहते हैं कि उनके पास अब पैसे नहीं बचे हैं, उन्होंने कई बार सड़क किनारे खाने का स्टॉल लगाने की कोशिश की, लेकिन उनका कहना है कि क्योंकि उन्होंने एक बड़ी पार्टी के नेता को जेल भिजवा दिया था, स्थानीय पुलिस उन्हें बहुत परेशान करती थी. ख़ान ने अब ऑनलाइन खाने की डिलीवरी का बिज़नेस शुरू किया है. हालांकि स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर केवी व्यास ने बीबीसी से बात करने हुए इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि पुलिस किसी को भी परेशान नहीं करती.
हमने गुलबर्ग केस के गवाहों से भी बात की. उनका कहना है कि उन्हें भी इसी तरह की धमकियां मिल रही हैं. नाम नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर एक गवाह ने बताया कि कई लोगों को स्थानीय पुलिस तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ़्तारी के मामले में पेश होने के लिए कह चुकी है.
उनका कहना है कि उन्हें डर लग रहा है, बेहतर है कि वो इस मामले में कुछ न कहें.
एक और गवाह ने बताया कि उन्हें दंगों के केस के एक व्यक्ति जो बेल पर बाहर था, ने एक गलत मामले में फंसा दिया. गवाह ने नाम उजागर न करने की शत पर बताया, "मैं ही वो गवाह हूं, जिसके कारण वो जेल में है, और वो बिना मतलब मेरे साथ झगड़ा मोल रहे हैं. हमें स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है, इसलिए हम उनके पास नहीं जाते."
इमरान कुरैशी, नारोदा गाम केस के गवाह हैं. उनका कहना है कि केस में गवाह बनने के बाद वो कभी अपने पैतृक घर नहीं गए. वो कहते हैं, "मैंने अपने इलाके के कुछ बहुत प्रभावशाली लोगों के ख़िलाफ़ गवाही दी, मैं 2002 में बच गया, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं फिर से बच पाऊंगा. इसलिए मैंने नारोदा गाम से बाहर, दूसरी जगह पर रहने का फ़ैसला किया."
- गुजरात दंगा: कितनों को इंसाफ़ मिला और कितने नाउम्मीद
- बिलकिस बानो कौन हैं और कैसे रिहा हुए उनसे गैंगरेप करने वाले 11 सज़ायाफ़्ता ?
गवाहों की सुरक्षा पर सवाल
बशीर ख़ान को कई दंगे के कई दूसरे गवाहों की तरह सुरक्षा प्रदान की गई है. इनमें से कई गवाहों को सुप्रीम कोर्ट के कहने पर सुरक्षा दी गई. ख़ान का आरोप है पुलिस की सुरक्षा से उन्हें बहुत मदद नहीं मिलती क्योंकि उनकी सुरक्षा में कोई हर वक्त मौजूद नहीं रहता.
वो कहते हैं, "वो महीने में एक बार मुझसे मिलने आते हैं और महीने में एक-दो बार फ़ोन करते हैं. बाकी पूरे समय वो कहीं और रहते हैं, मेरे साथ नहीं."
बीबीसी ने इस बारे में अहमदाबाद शहर के पुलिस कमिश्नर से बात की. उन्होनें कहा कि एक गंभीर मुद्दा है और उन्हें इस तरह के आरोपों की जानकारी नहीं है, न ही उनतक कोई इन शिकायतों को लेकर आया है. उन्होंने कहा कि वो इससे जुड़ी जानकारियां जुटाएंगे और गड़बड़ी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करेंगे.
दंगा पीड़ितों के लिए केस लड़ रहे एक वरिष्ठ वकील ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि पुलिस की मौजूदगी में अपने काम करने की जगहों पर या दूसरी जगहों पर पीड़ित असहज महसूस करते हैं, वो खुद ही नहीं चाहते कि पुलिस उनके साथ चले.
विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम के बारे में बताते हुए कई दंगा पीड़ितों के लिए केस लड़ने वाले वकील सम्सद पठान कहते हैं कि अलग अलग मामलों में गवाहों को अलग तरह से सुरक्षा दी जाती है.
जैसे कि पहले दंगा मामलों में सीआईएसएफ़ की सुरक्षा दी जाती थी. बाद में गुजरात पुलिस ने सुरक्षा देना शुरू किया. नियमों के मुताबिक एक गवाह को हर जगह हर समय पर सुरक्षा मिलनी चाहिए.
ये भी पढ़ें:
- बिलकिस बानो गैंगरेप: जब सिंहवाड़ा में दोषियों की रिहाई पर मना जश्न
- बिलकिस बानो बोलीं- "मुझे अकेला छोड़ दें", दोषियों के स्वागत की ख़बर से स्तब्ध है परिवार
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
-
Ravindra Kaushik Wife: भारत का वो जासूस, जिसने PAK सेना के अफसर की बेटी से लड़ाया इश्क, Viral फोटो का सच क्या? -
Iran Vs America: ईरान की 'सीक्रेट मिसाइल' या सत्ता जाने का डर, अचानक ट्रंप ने क्यों किया सरेंडर -
US Iran War: 5 दिन के सीजफायर की बात, 10 मिनट में Trump का पोस्ट गायब! ईरान ने कहा- 'हमारे डर से लिया फैसला’ -
Iran War Impact: क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल और LPG सिलेंडर? संसद में PM मोदी ने दिया बड़ा अपडेट -
Bangalore Gold Silver Rate Today : सोना-चांदी धड़ाम, बैंगलोर में कहां पहुंचा ताजा भाव? -
US Iran War: ईरान ने की Trump की घनघोर बेइज्जती, मिसाइल पर फोटो, लिखी ऐसी बात कि लगेगी मिर्ची- Video -
LPG Crisis: 14.2 किलो के सिलेंडर में अब सिर्फ इतनी KG ही मिलेगी गैस! LPG किल्लत के बीच सरकार ले सकती है फैसला -
Petrol Shortage In Ahmedabad: अहमदाबाद में पेट्रोल पंप पर लगी लंबी लाइन, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट -
Ravindra Kaushik कौन थे? Dhurandhar क्यों कहलाए? Pakistan में कैसे मेजर बना भारत का जासूस? जेल में गुमनाम मौत -
PM Modi Speech Highlights: संसद में गरजे PM मोदी, Hormuz Strait पर दिया बड़ा बयान, भारत का बताया प्लान -
West Bengal Election 2026: बंगाल की ये 7 सीटें बना सकती हैं नया CM! जहां हार-जीत का अंतर 1000 वोट से भी था कम -
Anjali Arora Net Worth: 'काचा बादाम गर्ल' ने शुरू किया ये बिजनेस, कैसे छापेंगी नोट? कितनी संपत्ति की मालकिन?












Click it and Unblock the Notifications