पंडित दीनदयाल की मौत हत्या या हादसा? लेखिका सोलंकी की किताब क्या खोलेगी राज? Oneindia Exclusive
Oneindia Exclusive Interview: इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक किताब जबरदस्त रूप से लोगों के बीच में चर्चा का विषय बनी हुई है और उसका नाम है 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय: हत्या या हादसा', जिसका विमोचन हाल ही में मुंबई में आयोजित विश्व मैत्री समागम समारोह में केरल के राज्यपाल महामहिम आरिफ मोहम्मद खान ने किया।

इस किताब की लेखिका हैं डॉ. यशोदा सोलंकी, जो कि सोशल मीडिया पर भी, काफी चर्चित हस्तियों में से एक हैं। आपको बता दें कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ( जन्म: 25 सितम्बर 1916-11 फरवरी 1968) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनकर्ता और जनसंघ के अध्यक्ष थे।
हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में कई लेख भी लिखे
समावेशित विचारधारा के समर्थक दीनदयाल उपाध्याय ने हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में कई लेख भी लिखे थे लेकिन 11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर वो मृत मिले थे।
सामान्य अपराध वाली हत्या करार दिया...
सीबीआई ने, इसे सामान्य अपराध वाली हत्या करार दिया था, जिसे कि दो चोरों ने चोरी के चक्कर में अंजाम दिया था। तो वहीं इस मौत की जांच करने के लिए बने चंद्रचूड़ आयोग ने कहा था कि 'उपाध्याय की रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या की गई थी।' आज भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मौत पर सस्पेंस बरकरार है जिस पर अक्सर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ जाती है।
डॉ. यशोदा सोलंकी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर किताब क्यों लिखी?
इस गंभीर विषय पर ही डॉ. यशोदा सोलंकी ने किताब क्यों लिखी? इस बात से पर्दा खुद लेखिका ने वनइंडिया से हुई Exclusive बातचीत में उठाया।
'महान विभूति के बारे में हर किसी को पता होना चाहिए'
उन्होंने कहा कि 'मुझे लगता था कि देश की इस महान विभूति के बारे में हर किसी को पता होना चाहिए, अगर दो चोरों को जेल से छोड़ा जाता है, तो वो पहले पैरोल पर अपने घर जाएगा या फिर चोरी करेगा और अगर मान भी लिया जाए कि चोरी के मद्देनजर दीनदयाल जी की हत्या हुई तो उनके पास था ही क्या, उनके पास तो केवल दो ही चीजें थीं , जो कि ज्यों कि त्यों मिली।'
'अगर कोई इंसान ट्रेन से गिरता है तो उसके हाथ खुले...'
'उनका बैग, जो चोरी हुआ था, वो मोकामा में मिला, उनके पास मात्र 29 रु थे, वो उनके पास से यथावत मिले। उनकी मुट्ठी में 5 रु का नोट था, अगर कोई इंसान ट्रेन से गिरता है तो उसके हाथ खुले रहेंगें लेकिन उनकी मुट्ठी बंद थी।'

'सारी चीजें वन टू वन रिसर्च करने के बाद लिखी है'
'इसलिए मैंने अपनी किताब में वो सारी चीजें 'वन टू वन' रिसर्च करने के बाद लिखी है, जो शायद लोगों को सच तक पहुंचाए और मुझे नहीं लगता कि आज तक कोई ऐसी पुस्तक लिखी गई है, जिसमें उनकी मौत का इस तरह का जिक्र हो। उन पर जो भी किताबें लिखी गई हैं, वो उनकी विचारधारा पर लिखी गई है, जीवन पर लिखी गई है, लेकिन किसी ने भी मुखरता से ये नहीं कहा कि उनकी हत्या हुई।'
मैंने किसी पार्टी से प्रभावित होकर ये किताब नहीं लिखी
'सबसे बड़ी बात ये है कि किताब मैंने किसी पार्टी से प्रभावित होकर या किसी के कहने पर या किसी के दवाब में आकर नहीं लिखी है। मुझे खुशी है कि मेरी पहली पुस्तक किसी ऐसे व्यक्ति पर आई है, जिसे राजनीति में कोई रूचि नहीं थी लेकिन आज की संपूर्ण राजनीति इनकी विचारधारा से विकसित हो रही है।'
मुझे लगा कि सच लोगों को जानना चाहिए: डॉ सोलंकी
'मैं किसी भेड़चाल का हिस्सा नहीं बनना चाहती थी, मुझे लगा कि सच लोगों को जानना चाहिए इसलिए मैंने ये पुस्तक लिखी है, मेरी किताब पूरी तरह से सच्चाई पर आधारित है, किसी भी तरह की काल्पनिक बातें नहीं है, बल्कि ये पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या दीनदयाल की मृत्यु एक हादसा थी या सुनियोजित हत्या, सच कहूं तो मैंने बस एक लेखिका का दायित्व निभाया है। '
उन्होंने आगे कहा कि मेरी चार लाइनें हैं....
- जमीं पर रहो मगर ख्वाब आसमानी रखो,
- कोई भी किरदार जियो मगर उसकी एक कहानी रखो
- जीने का जायका और भी बढ़ जाएगा
- बस एक मीर जिंदा रखो या मीरा दीवानी रखो।
आपको बता दें कि मूल रूप से डॉ. यशोदा सोलंकी राजस्थान की रहने वाली हैं और इन दिनों कुछ फिल्मों की पटकथा लिख रही हैं। इन्होंने 'अंगदान' जैसे जागरूक प्रोग्राम के लिए गीत भी लिखे हैं।












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