बीजेपी के केरल में खाता नहीं खुलने की 5 बड़ी वजहें, सबरीमाला विवाद से कांग्रेस की बल्ले-बल्ले
तिरुवंनपुरम: लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी ने पूरे देश में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 303 सीटें जीती है। केरल में बीजेपी को इस बार सबरीमाला विवाद के चलते अच्छे चुनाव नतीजों की आशा थी लेकिन कांग्रेस ने केरल में बीजेपी के विजयरथ को रोक लिया। सबरीमाला विवाद ने बीजेपी को हिंदुत्व का कार्ड खेलने का अवसर दिया। लेकिन बीजेपी को जिस तरह हिंदुत्व और सोशल इंजीनियरिंग के मॉडल के जरिए उत्तर भारत में भारी सफलता मिली, वो केरल में विफल हो गया।

कांग्रेस का केरल में ऐतिहासिक प्रदर्शन
कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ ने 20 में से 19 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ा। केरल में शासित लेफ्ट को एकमात्र अलप्पुझा लोकसभा सीट पर जीत मिली। जबकि बीजेपी मोदी मैजिक के बावजूद खाता नहीं खोल पाई। बीजेपी को इस चुनाव में राज्य में अपनी मजबूत उपस्थिति की उम्मीदें थी। सबरीमाला के तूफान में उन्हें भरोसा था कि उन्हें हिंदुओं के एक हिस्से का वोट मिलेगा।

सबरीमाला विवाद बीजेपी के लिए सबक
बीजेपी के लिए सबरीमाला विवाद के बावजूद हार एक अलर्ट है। पार्टी केरल में पारंपरिक राजनीति के साथ विशिष्ट जनसांख्यिकी और सांस्कृतिक लाभ के नहीं जीत सकती है। हालांकि सबरीमाला मंदिर मुद्दे ने दक्षिण भारत के राज्य में सीपीएम के खिलाफ काम किया, लेकिन बीजेपी इस विवाद को सुलझाने में नाकाम रही और कांग्रेस को बिना कुछ किए इसका फायदा मिला।

केरल में कांग्रेस की जीत की वजहें
केरल में लोकसभा चुनाव में बीजेपी फिर अपना खाता खोलने में नाकाम रही। इसके पीछे की मुख्य वजह अल्पसंख्यको का एक साथ यूडीएफ को वोट करना है। ये करीब 46 प्रतिशत था। सीपीएम को मिलने वाला हिंदू वोट जो सबरीमाला मुद्दे पर सीपीएम से नाराज था। कांग्रेस में ट्रांसफर हो गया। लेफ्ट के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का भी कांग्रेस को फायदा हुआ। बीजेपी ने सबरीमाला मुद्दे पर गलत प्रचार किया, जिस वजह से उच्च साक्षरता दर वाले राज्य में बीजेपी के चुनाव जीतने की संभावना को कम किया। बीजेपी के पास यहां मजबूत और करिश्माई नेतृत्व की कमी थी। एक मजबूत संगठन की अनुपस्थिति और कुछ नेताओं के बीच मतभेद भी मुख्य वजह रही। बीजेपी ने केरल की 20 लोकसभा सीटों में उत्तर में कासरगोड, पालघाट और त्रिशूर और दक्षिण में पथनमथीट्टा और तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट को जीतने योग्य माना था। वास्तव में आखिरी दो सीटों पर बीजेपी को जीत की शत प्रतिशत उम्मीद थी।

2016 में बीजेपी ने जीती थी एक विधानसभा सीट
केरल में दशकों के संघर्ष के बाद बीजेपी ने साल 2016 के विधानसभा में एकमात्र सीट जीती थी। नेमोम विधानसभा सीट तिरुवनंतपुरम निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आती है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओ राजगोपाल ने चुनाव जीतकर बीजेपी का खाता खोला। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में राजगोपाल ने कांग्रेस के शशि थरूर को कड़ी टक्कर दी थी। उन्हें इस चुनाव में 2,82,336 वोट मिले थे। थरूर ने इस सीट पर मजह 15,470 वोटों से जीत दर्ज की थी। सबरीमाला और मोदी के करिश्मे के साथ, बीजेपी को इस बार थरूर को हराने का भरोसा था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी ने इस बार उनकी जगह कुम्मनम राजशेखरन को उतारा जो मिजोरम के पूर्व गर्वनर और केरल बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष थे। उन्हें एक कट्टरपंथी चेहरे के रूप में देखा जाता है। इस वजह वो थरूर के सामने सही चेहरा नहीं थे। पथनमथीट्टा मे बीजेपी को 60 फीसदी हिंदू और सबरीमाला तूफान में भी जीत नहीं मिली।
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