क्यों कांग्रेस के लिए सिद्दारमैया महाराष्ट्र में भी साबित हो सकते हैं फायदे का सौदा? जानिए

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया रविवार को दक्षिण महाराष्ट्र के दौरे पर पहुंचे थे। माना जा रहा है कि यह कांग्रेस की बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहां कांग्रेस पार्टी की ओर से उनका जोरदार स्वागत भी किया गया है। चर्चा हो रही है कि 2024 में होने वाले लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में वे पार्टी के स्टार प्रचारक हो सकते हैं।

दरअसल, महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सोलापुर, सांगली और बारामती के इलाकों में पिछड़ा वर्ग एक बहुत बड़ा वोट बैंक है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सिद्दारमैया की पिछड़ी जाति और मुस्लिम गठजोड़ की राजनीति बहुत ही कामयाब रही है और कांग्रेस को महाराष्ट्र में भी इसका फायदा दिख रहा है।

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सिद्दारमैया की जाति का लाभ उठा सकती है कांग्रेस
महाराष्ट्र के जिन इलाकों की बात हो रही है, वहां के बारामती, सतारा और सोलापुर क्षेत्रों में अन्य पिछड़ी जातियों के अलावा धनगर समाज भी बहुतायत में हैं। कर्नाटक में Ahinda (अल्पसंख्यक-ओबीसी और दलित) फॉर्मूले को कांग्रेस की बड़ी जीत में बदलने वाले सिद्दारमैया भी कुरुबा जाति से हैं, जिन्हें महाराष्ट्र में धनगर कहा जाता है।

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सांगली में सिद्दारमैया के कार्यक्रम में पहुंचे लोगों में बहुत बड़ी तादाद धनकर समाज की ही थी। कर्नाटक में बेलगावी के रहने वाले राजनीतिक विश्लेषक सरजू काटकर ने बताया, 'धनगर को कर्नाटक में कुरुबा के नाम से जानते हैं, यह वही पिछड़ा वर्ग है, जिससे सिद्दारमैया ताल्लुक रखते हैं।'

महाराष्ट्र में करीब 9% बताई जाती है धनगरों की जनसंख्या
काटकर ने कहा है, 'कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य है कि उन्हें अगले साल के लोकसभा चुनावों में इस्तेमाल किया जाए।' महाराष्ट्र में धनगरों की आबादी करीब 9% बताई जाती है और यह पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा इलाकों में चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। महाराष्ट्र में यह समाज अभी खानाबदोश जनजातियों की श्रेणी में आता है और 2014 से अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण की मांग कर रहा है।

अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की रही है मांग
दरअसल, टाइपिंग की एक गलती से धनगर को 'धनगड़' कर दिया गया था और यह समाज अनुसूचित जनजाति में शामिल होने से रह गया। लेकिन, बाद में एसटी समुदाय के लोगों ने इन्हें अपने कोटे में शामिल करने का विरोध किया। क्योंकि, इनकी आबादी बड़ी है और उससे उनका कोटा प्रभावित हो सकता है।

अहमदनगर का नाम अहिल्या नगर हुआ है
हालांकि, दूसरे दलों ने भी धनगर समाज को अपने साथ करने की काफी कोशिशें की हैं। मई में महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने अहमदनगर जिले का नाम मराठा साम्राज्य की रानी अहिल्याबाई होलकर के के नाम पर अहिल्या नगर करने का ऐलान किया था। वह धनगर परिवार में जन्मीं थीं। 2019 में बीजेपी के कार्यकाल में इस समाज के सबसे कद्दावर नेता महादेव जानकर को कैबिनेट में जगह दी थी।

कांग्रेस में धनकर समाज के नेता की कमी पूरी कर सकते हैं सिद्दारमैया
प्रदेश में कांग्रेस ने धनकर समाज की आरक्षण की मांग को समर्थन तो दिया है, लेकिन इस समाज से पार्टी के पास कोई बड़ा नेता नहीं है। इसलिए, सिद्दारमैया पार्टी की यह कमी दूर कर सकते है, जो अहिल्याबाई होलकर की जयंती मनाने के लिए बारामती आए थे।

बारामती को तो एनसीपी का गढ़ माना जाता है। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने सोलापुर, सांगली और कोल्हापुर में कांग्रेस-एनसपी गठबंधन का सफाया कर दिया था। लेकिन, कुछ महीने बाद ही हुए विधानसभा चुनावों में गठबंधन को तीनों जिलों की 29 में से 15 सीटें मिल गई थीं।

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