• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

टिकटॉक ऐप क्यों है सवालों के घेरे में

By गुरप्रीत सैनी

TIKTOK

भारत में आज हर दूसरा शख्स एक्टर, डांसर, कॉमेडियन नज़र आ रहा है और ये सब हो रहा है छोटे मोबाइल वीडियो बनाने वाले टिकटॉक ऐप की बदौलत.

चीन का ये वीडियो स्ट्रीमिंग ऐप भारत में टीनेजर्स से लेकर हर उम्र के लोगों के बीच ख़ासा लोकप्रिय हो गया है. गांव से लेकर बड़े शहरों तक के लोग इस ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं. टिकटॉक के मुताबिक भारत में उसके बीस करोड़ से ज़्यादा यूज़र हैं.

2018 में, टिकटॉक दुनिया में सबसे अधिक डाउनलोड किए जाने वाले ऐप में से एक था. लेकिन लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही ये ऐप भारत में विवादों के घेरे में भी आ गया है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया था कि टिकटॉक और हेलो ऐप जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल देश-विरोधी और गै़रक़ानूनी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है.

जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक और आईटी मंत्रालय ने टिकटॉक और हेलो को नोटिस जारी कर 22 जुलाई यानी सोमवार तक जवाब देने कहा था. इस नोटिस में मंत्रालय ने 24 सवाल पूछे हैं.

सोशल मीडिया
iStock
सोशल मीडिया

खबरों के मुताबिक:

  • टिकटॉक से पूछा गया है कि "ये प्लेटफॉर्म देश-विरोधी गतिविधियों का हब बन गया है" जैसे आरोपों पर उनका क्या कहना है.
  • साथ ही ये आश्वासन मांगा गया है कि भारतीय यूज़र्स का डेटा ट्रांसफर नहीं किया जा रहा और भविष्य में "किसी विदेशी सरकार या किसी थर्ड पार्टी या प्राइवेट संस्था" को ट्रांसफर नहीं किया जाएगा.
  • मंत्रालय ने कंपनी से ये भी पूछा है कि वो फे़क न्यूज़ और भारतीय कानूनों के तहत आनी वाली शिकायतों पर क्या कदम उठा रही है.
  • हेलो कंपनी पर आरोप हैं कि उसने दूसरी सोशल मीडिया साइट्स पर 11 हज़ार जाली विज्ञापन लगाने के लिए बड़ी रकम अदा की.
  • साथ ही इस प्लेटफॉर्म्स पर बाल गोपनीयता मानदंडों के उल्लंघन के भी आरोप लग रहे हैं. इस पर सरकार ने पूछा है कि जब भारत में 18 साल से कम उम्र के शख्स को बच्चा माना जाता है तो अकाउंट बनाने की न्यूनतम उम्र 13 साल क्यों रखी गई है.

इससे पहले इसी साल अप्रैल में तमिलनाडु की एक अदालत ने टिकटॉक ऐप को कई ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दे दिया था. अदालत का कहना था कि इस ऐप के ज़रिए पोर्नोग्राफ़ी से जुड़ी सामग्री पेश की जा रही है. हालांकि कुछ हफ़्तों बाद इस बैन को हटा लिया गया था.

TIKTOK

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं:

पहली बात कही जा रही है कि आपने 13 से 18 साल की उम्र के बच्चों को ऐप इस्तेमाल करने की इजाज़त क्यों दी. ये मामला हमने जून 2012 के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट में गूगल और फेसबुक के ख़िलाफ़ उठाया था.

सोशल मीडिया में बच्चों के ज्वाइन करने की उम्र 13 वर्ष है और 13 से 18 के बीच मां-बाप के संरक्षण में ही बच्चे ज्वाइन कर सकते हैं.

तो हमारा सरकार से सवाल है कि ये सवाल टिकटॉक पर ही क्यों उठाया जा रहा है. फेसबुक और सोशल मीडिया के सारे प्लेटफॉर्म पर एक ही नीति क्यों नहीं लागू होनी चाहिए और बच्चों के साइबर वर्ल्ड में संरक्षण के बारे में सरकार व्यापक नीति क्यों नहीं बनाती.

हम किसी एक ऐप के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं कर सकते हैं, जबतक हमारे पास उस संबंध में कोई कानून ना हो. और उन कानूनों का उल्लंघन सभी लोग कर रहे हैं.

TIKTOK

दूसरा सवाल है कि इसका डेटा विदेश में जाता है. जितने भी भारत में ऐप काम कर रहे हैं, सबका डेटा विदेश में जा रहा है.

इस बारे में भी हमने जून 2012 में मांग की थी कि डेटा भारत में ही रहना चाहिए. क्योंकि डेटा को भारत से बाहर ले जाकर वो इसे बेचते हैं और इसका गलत इस्तेमाल करते हैं.

तीसरी बात है कि ये चीन की कंपनी है. जब मद्रास हाईकोर्ट ने इस पर बैन किया था और सुप्रीम कोर्ट में मामला आया था, तो उस वक्त भी सरकार ने इस बारे में अपना पक्ष सही तरीके से क्यों नहीं रखा. उसके बाद नीति अपनी क्यों नहीं बनाई. और अब जो ये सवाल पूछ रहे हैं वो किस धारा के तहत कर रहे हैं.

सोशल मीडिया
Getty Images
सोशल मीडिया

चौथा ये कि डेटा प्रोटेक्शन के बारे में सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों ने 2017 में जजमेंट दिया. उसके पहले भी 2012 में जस्टिस एपी शाह समिति ने अपनी रिपोर्ट दी, तो सरकार डेटा सुरक्षा पर क़ानून क्यों नहीं ला रही है.

इन पांच-छह बड़े मसलों पर सरकार ने क़ानूनी व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं की है. जिसके उल्लंघन पर आप किसी भी कंपनी या ऐप को रोक सकें.

अब ये सिलेक्टिव प्रश्नावली इश्यू की जा रही है, इससे पहले भी 'ब्लू व्हेल' जैसे गेम के लिए प्रश्नावली जारी की गई थी, नोटिस दिए गए थे. लेकिन आखिर में क्या हुआ.

TIKTOK

इसलिए टिकटॉक के बहाने भारत की साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, बच्चों की सुरक्षा के महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं, जिसपर सरकार को व्यवहारिक और सुसंगत नीति बनानी चाहिए.

कई कानून हैं, लेकिन वो बिखरे हुए हैं. ये कानून अस्पष्ट हैं, वेग हैं. जिसकी वजह से इन कंपनियों को फायदा मिलता है. कानूनी स्पष्टा कभी लाई ही नहीं गई है.

टिकटॉक
Getty Images
टिकटॉक

वहीं वकील और साइबर मामलों के जानकार पवन दुग्गल का कहना है:

ये प्लेटफॉर्म कई तरह की एंटी-नेशनल सामग्री को पनपने और बढ़ाने में मदद करते हैं. साथ ही हाइपर टेररिज़्म सामग्री को भी प्रमोट करते हैं.

ये लोग तमाशबीन बन जाते हैं और ये जानबूझकर अपनी तरफ से कुछ नहीं करते हैं. टिकटॉक का तो भारत में बहुत ज़बरदस्त गलत इस्तेमाल हो रहा है.

टिकटॉक एक लत बन चुका है. टिकटॉक को मना करने पर मौतें होना भी शुरू हो गई हैं. इसलिए इसे नियंत्रित करना ज़रूरी है.

टिकटॉक भारत की मलाई तो खाना चहता है, लेकिन वो भारत के सूचना प्रौद्योगिकी कानून के अधीन नहीं आना चाहता.

इसलिए ज़रूरी है कि इसका नियंत्रण और रेगुलेशन किया जाना चाहिए. सरकार को अब सोशल मीडिया एप्लिकेशन और मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नई गाइडलाइंस लाने की ज़रूरत है. पुरानी गाइडलाइंस 2011 की हैं. 2011 और 2019 में ज़मीन-आसमान का अंतर आ गया है.

GURPREET KAUR

आज की रिएलिटी को मद्देनज़र रखते हुए इसमें फेरबदल करने की ज़रूरत है.

चर्च हमलों के बाद श्रीलंका ने कहा था कि इनकी ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए. इसलिए भारत को भी इनकी ज़िम्मेदारी तय करनी चाहिए.

अभी इनको हमने खुली छूट दी हुई है. जिसकी वजह से ये लोग मनमाने ढंग से काम करते हैं. कानूना का पालन नहीं करते, सामग्री नहीं हटाते हैं. जो सामग्री भारत के ख़िलाफ़ है या भारत के कानून का उल्लंघन करती है, उससे डील नहीं करते.

तो जब तक आप सख्त रवैया अख्तियार नहीं करेंगे, तबतक ये लगातार आपको घुमाते रहेंगे. इसलिए ज़रूरी है कि भारत सरकार सख्त रवैया अख्तियार करे, ताकि सोशन मीडिया फायदा बने ना कि भारत का दुश्मन बने.

TIKTOK

टिकटॉक चीन की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी बाइटडांस का ऐप है. कंपनी का कहना है कि वो हर मामले में सरकार का सहयोग कर रही है.

एक बयान में कंपनी ने कहा कि भारत उनके लिए बड़ा मार्केट हैं और वो यहां अगले तीन साल के दौरान एक अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है, ताकि वे टेक्नोलॉजी इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर सके और स्थानीय समुदाय के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभा सके.

बयान में कहा गया, "स्थानीय समुदाय के सहयोग के बिना भारत में हम सफल नहीं हो सकते थे. हम इस समुदाय के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को लेकर गंभीर हैं और सरकार के साथ मिलकर अपना पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं."

टिकटॉक ने कुछ सामुदायिक दिशानिर्देश तय किए हुए हैं. उसके मुताबिक ये दिशानिर्देश एक सुरक्षित और मैत्रीपूर्ण वातावरण के लिए एक महत्त्वपूर्ण आचार संहिता है. ये दिशानिर्देश उसकी बेवसाइट पर भी मौजूद हैं.

दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर किसी के खाते को और/या उस खाते की सामग्री को हटाया जा सकता है.

कंपनी का कहना है कि उसने कई बार अपने प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री और अकाउंट्स को हटाया भी है.

TIKTOK

वेबसाइट के मुताबिक:

  • चरमपंथी संगठनों और किसी भी अन्य आपराधिक संगठनों को टिकटॉक का इस्तेमाल करने की सख्त मनाही है.
  • ख़तरनाक काम, खुद को नुकसान या आत्महत्या को दर्शाने वाली कोई भी सामग्री पोस्ट, साझा ना करें और न ही ऐसी कोई सामग्री प्रदान करें जो अन्य लोगों को ऐसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए बढ़ावा देती हो.
  • किसी भी ऐसी सामग्री को पोस्ट, साझा या प्रेषित न करें, जो खाने पीने की आदतों से जुड़े विकारों को दर्शाती हो, बढ़ावा देती हो या उनके लिए निर्देश देती हो.
  • दूसरे लोगों को डराएं या धमकाएं नहीं, जिसमें किसी खास व्यक्ति को धमकाना या शारीरिक नुकसान पहुंचाना भी शामिल है.
  • हथियार, बम, ड्रग्स, या स्थानीय कानूनों द्वारा प्रतिबंधित सामग्री के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने या बेचने के लिए टिकटॉक का उपयोग न करें.
  • ऑनलाइन जुआ या अन्य वित्तीय योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए टिकटॉक का उपयोग न करें.
  • गैर-कानूनी गतिविधियों से संबन्धित किसी भी सामग्री को पोस्ट, या फिर साझा ना करें.
  • किसी भी हिंसक, ग्राफिक, चौंकाने वाली या सनसनीखेज सामग्री को ना तो पोस्ट करें और ना ही साझा करें और न ही ऐसी कोई सामग्री प्रदान करें जो दूसरों को हिंसा के लिए उकसाए.
  • अपनी नस्ल, जातीयता, धर्म, राष्ट्रीयता, संस्कृति, विकलांगता, यौन अभिरुचि, लिंग, लिंग पहचान, आयु, या किसी भी अन्य भेदभाव के आधार पर लोगों के समूह के ख़िलाफ़ घृणा को उकसाने वाली किसी भी सामग्री को पोस्ट ना करें.
  • फंसाने वाली या उत्तेजक टिप्पणी सहित शत्रुता को भड़काने वाली सामग्री को पोस्ट ना करें.
  • बाल सुरक्षा उल्लंघन टिकटॉक बाल सुरक्षा को अत्यंत गंभीरता से लेता है. यदि हमें ऐसी सामग्री, जो बच्चों के यौन शोषण से जु़ड़ी है, उन्हें ख़तरे में डालती है, तो हम आवश्यकता के अनुसार क़ानून प्रवर्तन को सूचित कर सकते हैं या ऐसे मामलों की रिपोर्ट कर सकते हैं.

टिकटॉक के बीजिंग, बर्लिन, जकार्ता, लंदन, लॉस एंजिल्स, मास्को, मुंबई, साओ पाउलो, सियोल, शंघाई, सिंगापुर और टोक्यो में कार्यालय हैं.

विराग गुप्ता ने अपनी आने वाली किताब 'टैक्सिंग इंटरनेट जाइंट्स' में टिकटॉक के बारे में बात की है और कहा है कि यूजर्स की संख्या के आधार पर भारत में इन कंपनियों का बहुत बड़ा बिज़नेस बन रहा है.

उनके मुताबिक, "भारत से इनका लगभग 20 लाख करोड़ के कारोबार की वेल्यू बन रही है. इस कारोबार पर ये टैक्स नहीं दे रहे हैं. तो टिकटॉक जैसे ऐप जब भारत के डेटा को इस्तेमाल करते हैं और विदेशों में बेचते हैं तो जो उस व्यापार पर जीएसटी लगनी चाहिए, सरकार उसपर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं करती है."

विराग गुप्ता कहते हैं, "बजट में प्रतिवेदन भी दिया था कि इन कंपनियों पर टैक्स लगाया जाए. तो सरकार ने बजट में भी इस बारे में स्पष्टता नहीं दी. पांच ट्रीलियन डॉलर की इकोनॉमी की बात हो रही है, लेकिन इन सारे ऐप पर कोई टैक्स नहीं लगता है, भारत में इनका कोई दफ्तर नहीं है. भारत में इनका कोई शिकायत अधिकारी नहीं है."

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Why is the Tiktok app around the question?
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X