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Coca Cola: सचिन-विराट से लेकर सलमान-अमिताभ तक, रोनाल्डो की तरह क्यों नहीं ले पाते स्टैंड?

नई दिल्ली, 18 जून। फुटबॉल इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले करिश्माई स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कोका कोला को खरिज करने का साहस तो दिखाया लेकिन भारत के सेलिब्रिटी ऐसा क्यों नहीं कर पाते ? भारत की मशहूर हस्तियां पैसों की लालच में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले कोल्ड ड्रिंक का प्रचार क्यों करती हैं ?

why indian celebrities cant take a stand like cristiano ronaldo on coca cola snub

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    भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली 2011 से 2017 तक पेप्सी का प्रचार करते रहे। छह साल बाद कोहली का करार जब खत्म होने को आया तब उन्होंने सेहत का हवाला देकर पेप्सी के प्रचार से मना कर दिया। उस समय कोहली ने कहा था, जो चीज मैं खुद नहीं खा-पी सकता उसे दूसरे को खाने -पीने के लिए कैसे कह सकता हूं। कोल्ड ड्रिंक (पेप्सी) स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है, इस बात को समझने में कोहली को छह साल क्यों लगे ? करोड़ों रुपये कमा लिये तब ये बात समझ में आयी। हालांकि डॉक्टर हमेशा बताते रहे हैं कि कोल्ड ड्रिंक पीने से मोटापा, डायबिटिज और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। फिर भी लोग इसे पीने से बाज नहीं आते। दरअसल जब टेलीविजन के पर्दे पर आमिर खान यह कहते हैं कि ठंडा मतलब कोका कोला, तो लोग बिना कुछ सोचे समझे गर्मी में कूल-कूल होने लगते हैं। जब कि असलियत में वे अपनी सेहत को चौपट कर रहे होते हैं।

    तेंदुलकर भी नहीं छोड़ पाये थे मोह

    तेंदुलकर भी नहीं छोड़ पाये थे मोह

    महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने 2011 में कोका कोला के प्रचार के लिए एक करार किया था। ये करार 2011 से 2013 के लिए था जिसके लिए सचिन को लगभग 20 करोड़ रुपये दिये गये थे। इस बीच 2012 में कांग्रेस सरकार ने सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट में विशिष्ट योगदान देने के लिए राज्यसभा सांसद बना दिया। सांसद बनने के बाद भी तेंदुलकर कोला कोला का प्रचार करते रहे। तब दिल्ली की एक सामाजिक संस्था ने सचिन से अनुरोध किया कि वे अब माननीय संसाद बन गये हैं। इसलिए सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले पेय पदार्थ का प्रचार न करें। सचिन अब क्रिकेटर के साथ-साथ भारतीय संसद के सदस्य भी हैं। वे स्वास्थ्य के लिए वर्जित चीजों का टेलीविजन और अखबारों में प्राचार कैसे कर सकते हैं ? इस सामाजिक संस्था के अधिकारी अरुण गुप्ता ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्टों का हवाला देकर कहा था कि कोल्ड ड्रिंक्स पीने से मोटापा, दिल की बीमारी समेत कई परेशानियां हो सकती हैं। वे खुद शिशु रोग विशेषज्ञ थे। क्या सचिन जैसे जागरूक खिलाड़ी इस बात से अंजान थे ?

    पैसे के लिए कुछ भी करेंगे ?

    पैसे के लिए कुछ भी करेंगे ?

    हिंदी सिनेमा के मेगास्टार अमिताभ बच्चन से 2001 में जयपुर की एक छोटी सी बच्ची ने सवाल पूछा था, मेरी टीचर कहती हैं कि कोल्ड ड्रिंक्स में जहर होता है। फिर आप पेप्सी का प्रचार क्यों करते हैं ? इस बच्ची के सवाल ने अमिताभ बच्चन को बेचैन तो किया लेकिन वे करार तोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाये। जाहिर है ऐसा करते तो करोड़ों रुपये का नुकसान होता। 2005 में जब करार खत्म हुआ तो उन्होंने पेप्सी के प्रचार से खुद को अलग कर लिया। तब उन्होंने बताया था कि एक बच्ची के सवाल की वजह वे ऐसा करने के लिए मजबूर हुए। लेकिन सवाल ये है कि वे 2004 तक कैसे लोगों को बीमारी वाले पेय पदार्थ को पीने की सलाह देते रहे। दरअसल शीतल पेय बनने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियां मशहूर हस्तियों की ख्याति का दुरुपयोग कर बीमारी वाला कार्बोनेटेड वाटर बेचने में कामयाब हो जाती हैं। सलमान खान भारत के सबसे सफल हीरो में एक हैं। उनकी छवि एक बॉडीबिल्डर के रूप में है। वे फिटनेस आइकॉन हैं। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने पैसे के लिए पेप्सी का प्रचार किय। 2019 उन्होंने पेप्सी के विज्ञापन के लिए 15 करोड़ रुपये में करार किया था।

    10 रुपये की बोतल, 8 रुपये प्रचार पर खर्च

    10 रुपये की बोतल, 8 रुपये प्रचार पर खर्च

    कोल्ड ड्रिंक्स में कीटनाशक पाये जाने के मुद्दे पर संसद में भी बहस हुई थी। अगस्त 2003 में फिरोजाबाद के सांसद रामजी लाल सुमन ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा था, हमारे देश में शीतल पेय बनाने वाली कंपनियां लंबे समय से गोरखधंधा कर रही हैं। लेकिन भारतीय मानक ब्यूरो ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। सीएसई की निदेशक सुनीता नारायण के मुताबिक हमारे देश में बोतल बंद पानी के लिए तो कानून है लेकिन कोल्ड ड्रिंक्स के लिए कोई कानून नहीं है। यूरोपीय मानकों के मुताबिक भारत में कोका कोला में 45 गुना अधिक, पेप्सी में 37 गुना अधिक, लिम्का में 30 गुना अधिक, थम्स अप में 32 गुना अधिक आर्सेनिक कंटेंट हैं। ये तत्व खतरनाक बीमारियां फैलाते हैं। इनका असर धीरे-धीरे होता है। फिर भी इनकी बिक्री हो रही। मैं जहरीले पेय पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग करता हूं। तब राज बब्बर आगरा के सांसद थे। उन्होंने लोकसभा में कहा था, कोका कोला बनाने वाली कंपनी दस रुपये की बोतल बेचने के लिए 8 रुपये प्रचार पर खर्च करती है। जाहिर कोल्ड ड्रिंक्स की बिक्री, प्रचार और पैसे का खेल है।

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