'जरूरत पड़ी तो BJP से भी सपोर्ट मांगूंगा, अगर उनके हाईकमान—',विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार ने क्यों कहा ऐसा
B Sudershan Reddy: भारत में 9 सितंबर को होने वाला उपराष्ट्रपति चुनाव इस बार बेहद रोचक और हाईप्रोफाइल हो गया है। एक ओर एनडीए (NDA) ने तमिलनाडु के अनुभवी बीजेपी नेता सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, तो वहीं विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है।
दोनों ही उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और बी. सुदर्शन रेड्डी दक्षिण भारत से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए इसे अब "साउथ बनाम साउथ की जंग" कहा जा रहा है। ऐसे में अब बी. सुदर्शन रेड्डी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

'बीजेपी से भी मांग सकता हूं समर्थन'
रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने संसद के दोनों सदनों -लोकसभा और राज्यसभा -के सभी सदस्यों को पत्र भेजकर अपील की है कि वे पार्टी लाइन से हटकर केवल मेरिट के आधार पर उनके नाम पर विचार करें।
बी. सुदर्शन रेड्डी ने यहां तक कह दिया कि अगर बीजेपी नेतृत्व उन्हें मौका देता है तो वे उनसे मिलने और समर्थन मांगने के लिए भी तैयार हैं। बी. सुदर्शन रेड्डी ने साफ-साफ कहा है कि जरूरत पड़ी तो वे भाजपा से भी समर्थन मांग सकते हैं, अगर भाजपा के हाईकमान नेता उनतो मौका देना चाहे तो।
चुनाव में निष्पक्षता की अपील
बी. सुदर्शन रेड्डी ने जोर देकर कहा कि वे चाहते हैं कि यह चुनाव भारत के इतिहास में सबसे मर्यादित और निष्पक्ष चुनाव के रूप में दर्ज हो। उन्होंने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर सवाल उठाते हुए पूछा -"नाम अपडेट करना ठीक है, मृत लोगों को वोटर लिस्ट से हटाना भी सही है, लेकिन यह 'इंटेंसिव एक्सक्लूजन' क्या है? लोकतंत्र सिर्फ वोट तक सीमित नहीं है। बहुमत होने का मतलब यह नहीं कि कोई सरकार मनमानी कर सकती है।"
'जीत-हार नहीं, सिद्धांतों की लड़ाई'
बी. सुदर्शन रेड्डी का कहना है कि यह चुनाव किसी की जीत या हार का नहीं बल्कि सिद्धांतों की लड़ाई है। उन्होंने कहा -"इस चुनाव में कोई व्हिप लागू नहीं है। सांसद स्वतंत्र हैं कि वे किसे वोट दें। यह चुनाव संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा का संघर्ष है।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद कुछ राजनीतिक दल संवैधानिक सीमाओं को पार कर जाते हैं और लोकतंत्र को कमजोर करने वाली नई-नई व्याख्याएं पेश करने लगते हैं।
हेमंत सोरेन का समर्थन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बी. सुदर्शन रेड्डी को खुला समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना आज सबसे बड़ा मुद्दा है।
सोरेन ने साथ ही अपने पिता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि राज्य का निर्माण उनके अथक संघर्ष से संभव हुआ। रेड्डी ने भी शिबू सोरेन के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें लोगों के लिए समर्पित नेता बताया।
9 सितंबर को होने वाले इस चुनाव पर सबकी निगाहें टिकी हैं। एक तरफ हैं बीजेपी के दिग्गज नेता सी.पी. राधाकृष्णन, तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी। क्या सांसद संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के नाम पर रेड्डी के पक्ष में मतदान करेंगे, या फिर एनडीए के उम्मीदवार को सत्ता का फायदा मिलेगा?












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