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क्यों ट्रेंड में हैं 'फैक्ट चेक' वाले मोहम्मद जुबैर? अब कौन सा नया आरोप लगा, हाई कोर्ट तक पहुंची बात

Mohammed Zubair News: ऑल्ट न्यूज (Alt News) के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर गुरुवार 28 नवंबर को सुबह गूगल पर ट्रेंडिंग टॉपिक बन हुए हैं। वहीं सोशल मीडिया पर #IStandWithZubair ट्रेंड कर रहा है। असल में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस की ओर दर्ज एफआईआर में अब धारा 152 भारतीय न्याय संहिता (BNS) भी जोड़ी गई है।

धारा 152, तब जोड़ी जाती है, जब भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों का कोई आरोप हो। यूपी पुलिस ने इस बारे में इलाहाबाद हाई कोर्ट को भी जानकारी दी है। इसके बाद ही मोहम्मद जुबैर गूगल पर ट्रेंड कर रहे हैं। गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक मोहम्मद जुबैर के विषय पर हजार से ज्यादा सर्च है और 500% की वृद्धि के साथ लोग इसको सर्च कर रहे हैं।

Mohammed Zubair News

पुलिस ने हाई कोर्ट को बताया कि 8 अक्टूबर को दर्ज की गई एफआईआर में "भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने" और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत उल्लंघन के आरोप शामिल हैं। यह एफआईआर यति नरसिंहानंद सरस्वती ट्रस्ट की महासचिव उदिता त्यागी की शिकायत पर दर्ज की गई थी।

Mohammed Zubair Case News: मोहम्मद जुबैर के वकील ने क्या कहा?

इलाहाबाद हाई कोर्ट मोहम्मद जुबैर की एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जो नरसिंहानंद की विवादास्पद टिप्पणियों वाली एक वीडियो क्लिप को साझा करने से संबंधित थी।

मोहम्मद जुबैर की कानूनी प्रतिनिधि वृंदा ग्रोवर ने कहा, "सोमवार की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर में नई धाराएं जोड़ने का जिक्र किया, लेकिन अदालत ने उन्हें औपचारिक रूप से इसे रिकॉर्ड करने के लिए कहा। गुरुवार की सुबह, उन्होंने दो धाराओं - आईटी अधिनियम की धारा 152 और धारा 66 को जोड़ने की पुष्टि करते हुए एक हलफनामा दायर किया।"

वृंदा ग्रोवर ने आगे बताया, "पहले, आरोपों में सात साल से कम की सजा होती थी, जिसके लिए गिरफ्तारी की जरूरत नहीं होती थी। हालाँकि, धारा 152 को शामिल करने से महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं, जो संभावित रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकते हैं। हमें उम्मीद है कि अदालत इन मुद्दों को उचित रूप से संबोधित करेगी।"

मोहम्मद जुबैर के पूरे मामले पर ऑल्ट न्यूज (Alt News) ने क्या कहा?

सोशल मीडिया हैंडल एक्स (ट्विटर का बदला हुआ नाम) पर ऑल्ट न्यूज ने कहा कि इस पूरे मामले पर ऑल्ट न्यूज मोहम्मद जुबैर के साथ खड़ा है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, ''उत्तर प्रदेश पुलिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में हमारे सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए "भारत की संप्रभुता और एकता को खतरे में डालने" का आरोप लगाया है। यह उनके खिलाफ दर्ज की गई एक एफआईआर से संबंधित है, जिसमें यति नरसिंहानंद द्वारा नफरत फैलाने वाले भाषण को उजागर करने वाले एक ट्वीट के लिए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, एक व्यक्ति जो अपने सांप्रदायिक नफरत भरे भाषणों के लिए कई एफआईआर का सामना कर रहा है। लागू की गई धारा BNS 152 (भारत न्याय संहिता की धारा 152) है, जो औपनिवेशिक युग के राजद्रोह कानून का एक नया अवतार है। आलोचकों ने लंबे समय से चेतावनी दी है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल असहमति को दबाने और सत्ता में बैठे लोगों की आलोचना करने वालों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे पहले राजद्रोह कानूनों का दुरुपयोग किया गया था।''

उन्होंने आगे लिखा, ''मोहम्मद जुबैर का मामला इस बात का एक स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे ये आशंकाएं वास्तविकता बन रही हैं। यह हलफनामा इस बात का एक और उदाहरण है कि कैसे राज्य मशीनरी का इस्तेमाल नफरत और गलत सूचना को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध व्यक्तियों और संगठनों को डराने के लिए किया जा रहा है। ऑल्ट न्यूज सार्वजनिक चर्चा में सच्चाई और जवाबदेही को बनाए रखने के अपने मिशन में दृढ़ है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होगी और हम मोहम्मद जुबैर के साथ एकजुटता से खड़े हैं क्योंकि वह इस निरंतर कानूनी धमकी का सामना कर रहे हैं। हम स्वतंत्र अभिव्यक्ति, स्वतंत्र पत्रकारिता और तथ्य-जांच के सभी समर्थकों से आग्रह करते हैं कि वे इस लड़ाई में हमारे साथ खड़े रहें।''

Mohammed Zubair Ongoing Legal Battle: मोहम्मद जुबैर किस-किस लीगल मामले में फंसे हैं?

मोहम्मद जुबैर अक्सर ऑल्ट न्यूज के साथ अपने काम के लिए चर्चा में रहे हैं। ऑल्ट न्यूज वेबसाइट अपनी फैक्ट चेक खबरों के लिए चर्चित है। मोहम्मद जुबैर पहले से कई कानूनी मामलों पर फंसे हैं। मोहम्मद जुबैर को एक मामले में जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी थी।

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