लोकसभा चुनाव 2019: बिहार में कांग्रेस की इन वजहों से हुई हालत खराब, चुनाव प्रचार पड़ा सुस्त

पटना: बिहार मे एक तरफ लोकसभा चुनाव के चौथे चरण के लिए सभी पार्टियों का चुनाव प्रचार जोरो पर हैं, वहीं कांग्रेस में चुप्पी छाई हुई है। राहुल गांधी की बिहार में पांच यात्राओं के बावजूद पार्टी का चुनाव प्रचार जोर नहीं पकड़ रहा है। बिहार महागठबंधन का कोई भी नेता इनमें मौजूद नहीं रहा। इसने बिहार में महागठबंधन के सहयोगी दलों के बीच फूट को सामने ला दिया है।

राहुल गांधी को नहीं मिला तेजस्वी का साथ

राहुल गांधी को नहीं मिला तेजस्वी का साथ

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने गया, पूर्णिया, कटिहार और सुपौल का दौरा किया। राहुल ने यहां स्थानीय सांसदों और विधायकों के साथ मंच साझा किया। आरजेडी के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव और रामचंद्र पुर्वे का उन्हें साथ नहीं मिला। पार्टी के सीनियर नेताओं को टिकट ना देने की वजह से पार्टी के कैडर में खलबली मच गई। पार्टी ने इस बार लवली आनंद, मीरा कुमार और निखिल कुमार को टिकट नहीं दिया। इसने कांग्रेस के चुनाव के माहौल को और भी ज्यादा नीरस कर दिया।

सुपौल और मधुबनी में टकराव

सुपौल और मधुबनी में टकराव

कांग्रेस के पदाधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि सुपौल और मधुबनी जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में टकराव हुआ है, जिसने चीजों को और भी कमजोर कर दिया है। राज्य में चुनाव प्रचार में वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी भी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच अच्छा संदेश नहीं दे रही है। महागठबंधन के बीच संघर्ष 23 मई को तीसरे चरण में सुपौल में हुए मतदान में स्पष्ट हो गया था। यहां कांग्रेस की उम्मीदवार रंजीत रंजन को निर्दलीय उम्मीदवार दिनेश प्रसाद यादव से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। दिनेश प्रसाद यादव को स्थानीय आरजेडी नेताओं का समर्थन हासिल है। मधुबनी में कांग्रेस के सीनियर नेता शकील अहमद ने प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने के बाद महागठबंधन के उम्मीदवार के खिलाफ नामांकन भर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे गठबंधन की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है।

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प्रियंका गांधी की रैली की मांग

प्रियंका गांधी की रैली की मांग

बिहार में शत्रुघ्न सिन्हा, नवजोत सिंह सिद्धू और नगमा जैसे नेताओं ने चुनाव प्रचार किया लेकिन प्रियंका गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, गुलाम नबी आज़ाद और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेता प्रचार करने नहीं आए। इस वजह से कैडर हतोत्साहित हो गया। गौरतलब है कि बिहार में सीट बंटवारे के समझौते के तहत कांग्रेस को महागठबंधन में 9 सीटें मिली हैं।

राहुल के संदेश के अनुसार काम नहीं हुआ

राहुल के संदेश के अनुसार काम नहीं हुआ

कांग्रेस के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता लवली आनंद ने कहा कि र 3 फरवरी की रैली के बाद हमें उम्मीद थी कि पार्टी उत्साह के साथ चुनाव लड़ेगी। लेकिन राहुल गांधी के संदेश के अनुसार कुछ भी काम नहीं हो रहा है। वहीं कांग्रेस बिहार इकाई के प्रमुख मदन मोहन झा ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि राहुल गांधी ने 5 बार बिहार का दौरा किया और हमारा गठबंधन मजबूत है। झा ने आगे कहा कि हमारा गठबंधन मजबूत है और सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए मजबूत रहेगा। आरजेडी के प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने भी कहा कि महागठबंधन में कोई दरार नहीं है।

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