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अफगानिस्तान की महिला सांसद रंगीना कारगर को भारत से क्यों लौटना पड़ा ? जानिए

नई दिल्ली, 26 अगस्त: अफगानिस्तान की एक महिला सांसद रंगीना कारगर को भारत से डिपोर्ट करने के मामले में एक दूसरी कहानी सामने आ रही है। अब जानकारी मिल रही है कि रंगीना कारगर राजनयिक पासपोर्ट पर भारत की यात्रा करना चाहती थीं और उनके पास मौजूदा प्रावधानों के तहत कोई यात्रा दस्तावेज नहीं था। गौरतलब है कि कारगर ने मीडिया में यह आरोप लगाया है कि वो जिस पासपोर्ट पर पहले कई बार भारत आ चुकी हैं, लेकिन इसबार उन्हें उसके आधार पर एयरपोर्ट से बाहर जाने की इजाजत नहीं मिली और डिपोर्ट कर दिया गया। कारगर 2010 से अफगानिस्तान में सांसद हैं।

Afghanistans female parliamentarian Rangina Kargar was not deported, she was not allowed to exit the airport due to lack of necessary papers

'जरूरी यात्रा दस्तावेज नहीं दिखा पाईं'
अफगानिस्तान की 36 वर्षीय एक महिला सांसद ने दावा किया है कि उन्हें नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 20 अगस्त को वापस भेज दिया गया। लेकिन, जानकारी के मुताबिक गुरुवार को सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि रंगीना कारगर भारत में अपना इलाज करवाने से संबंधी भी न तो कोई दस्तावेज दिखा सकीं थी और ना ही उन्होंने अफगानिस्तान दूतावास का कोई रेफ्रेंस ही दिया था। रंगीना कारगर अफगानिस्तान के फरयाब प्रांत के वोलेसी जिरगा (अफगानिस्तान की लोकसभा) से एमपी हैं। जब वह आईजीआई पहुंचीं और वीजा से संबंधित दस्तावेज दिखाने में नाकाम रहीं तो उन्हें एयरपोर्ट से बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई।

'इलाज से संबंधित कागजात भी नहीं दिखा सकीं'
जानकारी के मुताबिक कारगर दुबई की फ्लाइट से आईजीआई आई थीं और उनके पास राजनयिक पासपोर्ट था, जिसके तहत पारस्परिक समझौते के तहत भारत में 30 दिनों के लिए वीजा-फ्री यात्रा की व्यवस्था है। लेकिन, अफगानिस्तान की सत्ता में अस्थिरता आने के बाद सभी तरह के वीजा रद्द कर दिए गए गए हैं और सिर्फ ई-वीजा को ही अनुमति दी जा रही है। खबरों के मुताबिक जब इमिग्रेशन ऑफिसर ने उनसे इलाज से संबंधित कागजात या जिस अस्पताल में उन्हें जाना है या जिस डॉक्टर के पास जा रही हैं, उसकी डिटेल मांगी तो वह उसे उपलब्ध करवाने में भी नाकाम रहीं, जिसके चलते उनके आने का विवरण स्पष्ट नहीं हो पाया। वह अफगानिस्तान दूतावास तक का भी कोई रेफ्रेंस नहीं दे सकीं। हालांकि उन्हें डिपोर्ट नहीं किया था, बल्कि सिर्फ एयरपोर्ट से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद वह जिस फ्लाइट से आई थीं, उसी से वापस लौट गईं।

अपराधी से बर्ताव का लगाया था आरोप
2016 के जनवरी में भारत और अफगानिस्तान के बीच एक करार हुआ था, जिसके तहत दोनों देशों के राजनयिकों को वीजा के बिना यात्रा की अनुमति थी। यह व्यवस्था 20 जून, 2016 से लागू हुई थी। खबरों के अनुसार एक और अधिकारी का कहना है कि यह समझौता लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई दो सरकारों के बीच हुआ था, ताकि राजनयिकों को निर्वाध रूप से आना-जाना हो सके। लेकिन, 'अफगानिस्तान में मौजूदा हालात वैसे नहीं हैं, जो 2016 में थे या जो तालिबान के सत्ता पर काबिज होने से पहले थे।' कारगर ने मीडिया में आरोप लगाया था कि एयरपोर्ट पर दो घंटे इंतजार करवाने के बाद उन्हें उसी एयरलाइन की फ्लाइट से दुबई के रास्ते इस्तांबुल भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया था, 'उन्होंने मुझे डिपोर्ट कर दिया, मेरे साथ अपराधी जैसा बर्ताव किया गया। मुझे दुबई में मेरा पासपोर्ट नहीं दिया गया। यह इस्तांबुल पहुंचने पर ही दिया गया।'

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