Karnataka Govt oath ceremony: कांग्रेस ने शपथ समारोह में केजरीवाल-मायावती को क्यों नहीं बुलाया? इनसाइड स्टोरी
सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस ने करीब 20 पार्टियों को न्योता भेजा है लेकिन आम आदमी पार्टी, बीएसपी, बीआरएस और बीजेडी जैसे विपक्षी दलों को निमंत्रण नहीं भेजा गया है।

कर्नाटक में शानदार जीत के बाद कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम सिद्धारमैया 20 मई को एक बार फिर से राज्य के अगले मुख्यमंत्री के तौर शपथ ग्रहण करने जा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से इसे लेकर शानदार तैयारियां चल रही हैं।
इस कार्यक्रम में कांग्रेस के ओर से कई विपक्षी दलों के नेताओं के निमत्रंण भेजा गया है। जिसमें एमके स्टालिन, ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, शरद पवार और अखिलेश यादव समेत कई नेता शामिल है। लेकिन कांग्रेस ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और मायावती को निमंत्रण नहीं दिया है।
कांग्रेस के विपक्षी एकता के प्रयासों के बीच अरविंद केजरीवाल, मायावती और केसीआर जैसे नेताओं को पीछे कई कारण हैं। जिनके चलते कांग्रेस ने इन पार्टियों को बुलाने से परहेज किया है। आईए इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी समझते हैं।

इन वजहों से नहीं बुलाए गए केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल हमेशा कांग्रेस के खिलाफ खड़े रहे हैं। चाहे वह दिल्ली में हो या फिर पंजाब में। विपक्षी एकता के प्रयासों के बीच आम आदमी पार्टी ने कर्नाटक में अपने उम्मीदवार उतारे थे। जो कांग्रेस को पसंद नहीं आया।
दूसरी वजह हाल ही में आप ने कांग्रेस को पंजाब में हराया है। पंजाब में कांग्रेस विपक्ष में है। ऐसे में कांग्रेस पंजाब में अपनी स्थिति को क्लियर रखना चाहती है। आप ने हर राज्य में कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंधमारी की है। चाहे दिल्ली हो,पंजाब हो या गुजरात हो। दिल्ली और पंजाब के कांग्रेस नेता आप से गठबंधन के खिलाफ हैं।

कांग्रेस हमेशा मायावती के निशाने पर रही है
कांग्रेस ने कर्नाटक के शपथ समारोह में मायावती से कई कारणों के चलते दूरी बनाई है। पहला कारण मायावती के निशाने पर हमेशा कांग्रेस रही है। कई मौकों पर मायावती ने सीधे प्रियंका गांधी को निशाने पर लिया है।
कांग्रेस और बीएसपी के बीच लंबे समय से कोई संबंध नहीं है। इसके अलावा कांग्रेस का मानना है कि, बीएसपी का रुख बीजेपी के प्रति नरम रहा है। कांग्रेस मायावती पर बीजेपी की बी टीम होने का आरोप लगती रही है। जिसके चलते उसके साथ कांग्रेस को गठबंधन की कोई उम्मीद नहीं है।
इसके इतर कांग्रेस यूपी में अखिलेश यादव को यूपीए के अंतर्गत लाना चाहती है। यूपी में कांग्रेस अखिलेश और जयंत चौधरी के साथ समीकरण बना रही है। ऐसी स्थिति में वह मायावती को अपने साथ लाने का जोखिम नहीं लेना चाहेंगे।
केसीआर को भी न्योता नहीं
तेलंगाना में कांग्रेस मजबूती से केसीआर सरकार के खिलाफ अभियान चला रही है। जहां साल के अंत में चुनाव हैं। राज्य के नेता नहीं चाहेंगे कि केसीआर के खिलाफ चल रहा उनका कैंपने फेल हो। ऐसे में पार्टी बीआरएस के नजदीकियां नहीं बढ़ाना चाहेगी।
Recommended Video













Click it and Unblock the Notifications