ऑनलाइन ड्रोन सिस्टम-GPS जैमर की बिक्री पर सरकार क्यों सख्त? CCPA का बड़ा एक्शन, 6 E-Commerce कंपनियों को नोटिस
CCPA Notice to E-Commerce Platforms: देश में ड्रोन और जीपीएस सिग्नल जैमर जैसे प्रतिबंधित वायरलेस उपकरणों की ऑनलाइन बिक्री पर सख्त रुख अपनाते हुए सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने छह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किए हैं।
आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म पर "एंटी-ड्रोन सिस्टम", "ड्रोन जैमर" और "GPS जैमर" जैसे उपकरण बिना जरूरी कानूनी खुलासों के बिक्री के लिए सूचीबद्ध किए गए, जो उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और दूरसंचार नियमों का उल्लंघन है।

किन कंपनियों पर कार्रवाई (E-Commerce Notice)
जिन संस्थाओं को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें M/s Everse, IndiaMart, Xboom, Javiat Aerospace, M/s AirONE Robotics और M/s Maveric Drones & Technologies Pvt Ltd. शामिल हैं। CCPA का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म पर ऐसे उत्पाद इस तरह दिखाए जा रहे थे मानो आम नागरिक इन्हें स्वतंत्र रूप से खरीद और इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
क्या पाई गईं खामियां (Regulatory Violations)
प्राधिकरण के मुताबिक, लिस्टिंग में अनिवार्य लाइसेंसिंग शर्तों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। कई मामलों में वैध Equipment Type Approval (ETA) या Wireless Planning & Coordination (WPC) प्रमाणन का ब्योरा उपलब्ध नहीं था। यह भी साफ नहीं किया गया कि नागरिकों द्वारा बिना वैधानिक अनुमति ऐसे उपकरण रखना और उपयोग करना प्रतिबंधित है। CCPA का मानना है कि यह चूक उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है और इसे प्रथमदृष्टया भ्रामक विज्ञापन तथा अनुचित व्यापार व्यवहार माना जा सकता है।
कंपनियों से मांगी गई जानकारी (Compliance Details)
CCPA ने संबंधित इकाइयों से विस्तृत जानकारी तलब की है। इसमें उपकरणों के आयात या खरीद का स्रोत, आयात लाइसेंस और चालान की प्रतियां, WPC, DoT, DGFT, कैबिनेट सचिवालय या गृह मंत्रालय से मिली स्वीकृतियां, वाणिज्यिक बिक्री का कानूनी आधार, पिछले दो वर्षों में बेची गई यूनिट्स और खरीदारों का विवरण, ऐसे उपकरण सूचीबद्ध करने वाले तृतीय-पक्ष विक्रेताओं की जानकारी, लिस्टिंग हटाने और दोबारा ऐसी स्थिति न बने इसके लिए उठाए गए कदम, तथा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध अन्य समान रेडियो फ्रीक्वेंसी/वायरलेस उपकरणों की पूरी सूची शामिल है।
कानून क्या कहता है? (Telecom & Trade Laws)
ड्रोन जैमर और सिग्नल जैमिंग उपकरण भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 और वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 के तहत कड़े नियंत्रण में आते हैं। इन पर दूरसंचार विभाग (DoT) और WPC का नियमन लागू होता है। इसके अलावा, ऐसे उपकरणों का आयात विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 और DGFT की अधिसूचनाओं के अधीन है। सामान्यतः इनकी अनुमति केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं को ही, निर्धारित स्वीकृतियों के साथ, दी जाती है।
ई-कॉमर्स की जिम्मेदारी (E-Commerce Rules 2020)
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के नियम 4 के तहत मार्केटप्लेस इकाइयों पर यह दायित्व है कि वे उचित सतर्कता बरतें और लागू कानूनों का पालन सुनिश्चित करें। बिना वैधानिक सत्यापन के प्रतिबंधित जैमिंग उपकरणों की बिक्री को होस्ट करना या सुविधा देना दंडात्मक परिणामों को जन्म दे सकता है। CCPA ने संकेत दिया है कि आवश्यक जानकारी छिपाना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धाराओं 2(47), 18 और 19 के तहत भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार आचरण की श्रेणी में आ सकता है।
पहले भी जारी हो चुकी है सलाह
यह पहला अवसर नहीं है। इससे पहले भी CCPA ने ई-कॉमर्स कंपनियों को अवैध वायरलेस जैमर की बिक्री और उसे बढ़ावा देने के खिलाफ एडवाइजरी जारी की थी। ताजा कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्राधिकरण डिजिटल मार्केटप्लेस पर नियमन को लेकर सख्त है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।
उपभोक्ताओं के लिए संदेश
इस पूरे घटनाक्रम का सार यह है कि ऑनलाइन दिखने वाला हर उपकरण आम उपयोग के लिए वैध नहीं होता। संवेदनशील वायरलेस उपकरणों के मामले में कानून बेहद स्पष्ट और कठोर हैं। CCPA का संदेश साफ है-नियमित या प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री में पारदर्शिता और वैधानिक अनुपालन से कोई समझौता नहीं होगा।












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