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बिहार में छे़ड़खानी के इतने वीडियो वायरल क्यों हो रहे हैं?

By Bbc Hindi
रेप, छेड़खानी, वीडियो
BBC
रेप, छेड़खानी, वीडियो

अप्रैल महीने एक आख़िर में में एक नाबालिग़ लड़की से सामूहिक छेड़खानी और सरेआम उसके कपड़े फाड़ने का वीडियो पूरे देश में वायरल हुआ था.

ये घटना बिहार के जहानाबाद ज़िले के भरथुआ गांव की थी.

वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने ख़ुद मामले का संज्ञान लिया और एफ़आईआर दर्ज की गई. इसमें न तो पीड़िता सामने आई और न ही कोई शिकायत ही दर्ज कराई गई थी.

इसके बाद पुलिस ने इस मामले में एक-एक कर 14 लोगों को गिरफ़्तार किया, जिनमें से क़रीब आधे नाबालिग़ हैं.

दिलो-दिमाग़ को झकझोर देने वाली इस घटना की चर्चाएं अभी ठंडी भी नहीं हुई थीं कि एक और ऐसा वीडियो मई के दूसरे सप्ताह में सामने आ गया.

बिहार छेड़खानी
Manish Saandilya/BBC
बिहार छेड़खानी

अब तक पांच वीडियो हुए वायरल

इस दूसरे मामले में भी पुलिस ने ख़ुद संज्ञान लेते हुए गया शहर के कोतवाली थाने में ज़ीरो एफआईआर दर्ज की. बाद में जांच में यह पता चला कि यह घटना पटना ज़िले के नौबतपुर थाने इलाक़े की है.

इस मामले में अभियुक्तों को पकड़ने में पुलिस को जब शुरुआती कामयाबी नहीं मिली तो उन्होंने स्केच जारी किया. साथ ही अभियुक्तों की सूचना देने वालों के लिए इनाम की भी घोषणा की गई.

पुलिस मुख्यालय में अपर पुलिस महानिदेशक संजीव कुमार सिंहल के मुताबिक इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और कुछ अन्य की तलाश पुलिस कर रही है.

इसके बाद ऐसे और तीन वीडियो सामने आए हैं. संजीव कुमार सिंहल ने बताया, ''तीसरा वीडियो गया ज़िले के वज़ीरगंज थाने के टेरमा गांव की है. इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और तीन लोगों ने सरेंडर किया है."

बिहार छेड़खानी
Manish Saandilya/BBC
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"दो अन्य वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें अभियुक्तों की पहचान की कार्रवाई चल रही है. पहचान होते ही पुलिस बाकी मामलों की तरह त्वरित और कड़ी कार्रवाई करेगी.''

मिली जानकारी के मुताबिक़, बाकी दो वीडियो में से एक गया तो दूसरा पटना ज़िले का है. जहानाबाद और पटना के नौबतपुर वाले मामले में पीड़िता दलित हैं जबकि जहानाबाद मामले के अभियुक्तों में से ज़्यादातर पिछड़े वर्ग से हैं.

"जान-सुनकर बहुत गुस्सा आता है"

बिहार वीमेंस नेटवर्क की संयोजिका नीलू उस टीम का हिस्सा थीं जो बीते दिनों जहानाबाद की पीड़िता से मिलने उनके घर गई थीं.

जम्मू-कश्मीर में हुए कठुआ गैंग रेप की घटना के बाद बिहार वीमेंस नेटवर्क ने अन्य संगठनों के साथ मिलकर बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग के साथ 17 से 20 अप्रैल के बीच 72 घंटे का सामूहिक उपवास भी आयोजित किया था.

नीलू कहती हैं, "सबसे पहले तो ऐसी घटनाओं के बारे में जान-सुनकर बहुत गुस्सा आता है. यह समझ नहीं आता कि समाज किस ओर जा रहा है."

बिहार छेड़खानी
Getty Images
बिहार छेड़खानी

उनका मानना है कि ऐसी घटनाएं इस कारण सामने आ रही हैं क्योंकि समाज का ढांचा पितृसत्तात्मक है और महिला और लड़कियों को वस्तु के बतौर देख जाता है.

नीलू आगे कहती हैं, "महिलाओं-लड़कियों को घर के अंदर होना चाहिए. वह घर से बाहर क्यूं निकलती हैं? महिलाएं क्यों अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं? ऐसी सोच के कारण हमें समाज में उचित सम्मान और बराबरी का दर्जा नहीं मिलता. जब तक ऐसी सोच रहेगी तब तक ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी."

पटना स्थित एएन सिन्हा समाज विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक प्रोफेसर डीएम दिवाकर ऐसी घटनाओं के पीछे इन वजहों को ज़िम्मेदार मानते हैं.

छेड़छा़ड़. महिला, वीडियो, वायरल. यौन उत्पीड़न, यौन हिंसा
Getty Images
छेड़छा़ड़. महिला, वीडियो, वायरल. यौन उत्पीड़न, यौन हिंसा

उन्होंने कहा, "समाज निर्माण की अपनी प्रक्रिया विकसित करने की जगह हम पश्चिमी सभ्यता और समाज के अंधानुकरण में फंस गए जो कि औद्योगिक उपभोक्तावाद पर आधारित है. साथ ही हमने अपने समाज-सुधारकों और मनीषियों के ज्ञान की अनदेखी की. इनमें कबीर-बुद्ध जैसे मनीषी शामिल हैं. शिक्षा व्यवस्था मनुष्य निर्माण की प्रक्रिया की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से नहीं निभा पाई."

कैसे रुकेंगे ये अपराध

जानकारों का मानना है महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले हर तरह के अपराधों पर प्रभावी रोक के लिए हर एक घर से पहल किए जाने की ज़रूरत है.

जैसा कि नीलू कहती हैं, "जिस तरह से बेटियों में संस्कार डालने की बात की जाती है उसी तरह बेटों को भी संस्कारी बनाने की ज़रूरत है. लड़कों को यह सिखाया जाना चाहिए कि वे लड़कियों को सम्मान दें. लड़का-लड़की में घर के अंदर ही बराबरी की सोच पैदा करना चाहिए."

छेड़छा़ड़. महिला, वीडियो, वायरल. यौन उत्पीड़न, यौन हिंसा
Getty Images
छेड़छा़ड़. महिला, वीडियो, वायरल. यौन उत्पीड़न, यौन हिंसा

जबकि डीएम दिवाकर का कहना है कि समस्याओं में ही इनके उपाय भी छिपे हैं. वो बताते हैं, "शिक्षा व्यवस्था आज उपभोक्तावादी संस्कृति के अंधे रास्ते पर चल रही है. ऐसे में समाज की ज़रूरतों के हिसाब से सरकारों को शिक्षा में दख़ल देने की ज़रूरत है."

"सरकार इस ज़िम्मेदारी से पीछे हटती है तो समाज को दबाव बनाना होगा. साथ ही सिर्फ़ कड़े क़ानूनों से काम नहीं चलेगा. प्रशासन को संवेदनशील बनने की भी ज़रूरत है."

वहीं, पुलिस का कहना है कि ऐसे मामले सिर्फ़ उनके दम पर नहीं रोके जा सकते.

जैसा कि अपर पुलिस महानिदेशक का कहना है, "पुलिस ने हर मामले में तत्परता से कार्रवाई की है. लेकिन समाज को भी ऐसी विकृतियों को रोकने के लिए सामने आना चाहिए. सहयोग करना चाहिए. घरवालों, शिक्षकों, बड़े-बुज़ुर्गों को जानकारी रखने की ज़रूरत है जिससे कि अगर कोई असामान्य काम में शामिल हो रहा है तो उसे रोका जा सके.''

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English summary
Why are so many video teasings in Bihar being viral

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