Covid-19 Vaccine की दूसरी खुराक लेने से क्यों भाग रहे हैं लोग?
नई दिल्ली: देश में पिछले 16 जनवरी को जिन लोगों ने कोरोना वायरस वैक्सीन की पहली खुराक ली थी, उन्हें तय कार्यक्रम के तहत बीते शनिवार को उसका दूसरा टीका लगवाना था। लेकिन, सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि निर्धारित संख्या के मुकाबले बहुत कम लोग ही दूसरी डोज का टीका लगवाने पहुंचे। हालांकि, दूसरी खुराक लगाने के लिए अभी वक्त है, लेकिन इसके प्रति लोगों की उदासीनता ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। बता दें कि देश में जब कोविड-19 के खिलाफ पिछले जनवरी में टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था, तब भी कुछ लोगों में इसको लेकर भय नजर आया था। कुछ अफवाहें भी उड़ाई गई थीं। लेकिन, धीरे-धीरे इसमें अप्रत्याशित तेजी आई और विश्व स्वास्थ्य संगठन तक से सराहना मिली है।

पहले दिन सिर्फ 4 फीसदी लोगों ने ही ली दूसरी डोज
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रॉविजनल डेटा के मुताबिक शनिवार को सिर्फ 7,668 लाभार्थियों ने ही कोरोना वायरस का दूसरा टीका लगवाया। जबकि, 16 जनवरी को 1,91,000 से ज्यादा लोगों को यह टीका लगाया गया था। इस हिसाब से सिर्फ 4 फीसदी लोगों ने खुराक की दूसरी तारीख पर इसे लगवाना मुनासिब समझा और बाकी लोग इसके लिए उपस्थित नहीं हुए। भारत में कोविशील्ड और कोवैक्सीन इन्हीं दोनों टीकों को लगाने की मंजूरी मिली है और इनकी दो खुराक लगानी जरूरी है, जो कि 28 दिनों के अंतराल पर लगाए जाने हैं। वैसे मुख्य ड्रग रेगुलेटर ने जो सलाह दी है उसके अनुसार ये टीके 4 से 6 हफ्ते के बीच लगवाए जा सकते हैं। यानि जो लोग किसी वजह से दूसरी खुराक नहीं ले पाए, वो अभी भी लगवा सकते हैं।

1 मार्च तक फ्रंटलाइन वर्कर्रों का वैक्सीनेशन पूरा होना है
बता दें कि सरकार ने जो डेडलाइन तय कर रखी है, उसके तहत पूरे देश में फ्रंटलाइन वर्कर्रों के वैक्सीनेशन का काम 1 मार्च तक पूरा कर लिया जाना है। केंद्रीय सह-सचिव- स्वास्थ्य, मंदीप भंडारी के मुताबिक इसमें से 5 दिन उन लोगों के लिए रखा गया है, जो किसी वजह से पहले टीका नहीं लगवा पाए हैं। इनमें हेल्थकेयर वर्करों के लिए 20 फरवरी की डेडलाइन निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि जब देश में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था तो शुरू में उसमें भी कई लोग बहाने बनाकर बचते नजर आए थे। लेकिन, बाद में इस अभियान ने गति पकड़ी और इसे काफी सफलता मिली है।
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रिकवरी रेट के मामले में भारत टॉप पर
वैसे कोविड-19 के मामलों में देश में तेजी से सुधार हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक रिकवरी रेट के मामले में भारत दुनिया में सबसे अव्वल है। 1 अक्टूबर, 2020 के बाद से रोजाना के मौत के आंकड़े भी लगातार घटते गए हैं। रविवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि,'1 अक्टूबर, 2020 से केस फैटिलिटी रेट में लगातार गिरावट आई है। अभी यह 1.5 फीसदी (1.43 फीसदी) से कम है। भारत का केस फैटिलिटी रेट दुनिया में सबसे कम में से एक है।' सोमवार के आंकड़ों के देश में इस समय 1,39,637 ऐक्टिव केस है और रविवार को इससे देशभर में 90 लोगों की मौत हुई। देश में इस वक्त महाराष्ट्र और केरल में ही कोरोना के ज्यादातर नए मामले सामने आ रहे हैं।












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