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Fighter Jet इस साल धड़ाधड़ क्यों हो रहे क्रैश? 7 माह में 3 Jaguar के उड़े परखच्चे! लिस्ट में मिराज भी

2025 Fighter Jets Crashing List: भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 2025 का साल मुश्किलों भरा रहा है, क्योंकि इस साल अब तक पांच बड़े विमान हादसे हो चुके हैं, जिनमें 3 जगुआर फाइटर जेट और एक मिराज-2000 शामिल हैं। ताजा हादसा राजस्थान के चूरू जिले में हुआ, जहां 9 जुलाई को एक जगुआर फाइटर जेट रतनगढ़ के भानुदा गांव के पास खेतों में क्रैश हो गया।

इस हादसे में दो पायलटों की मौत हो गई। मलबे और मानव अवशेष खेतों में बिखरे मिले, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। इन हादसों ने वायुसेना के पुराने विमानों की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आइए एक नजर डालते हैं 7 माह में 5 फाइटर जेट क्रैश...

2025 Fighter Jet Crashes List

1. मिराज-2000 - शिवपुरी, मध्य प्रदेश (6 फरवरी 2025)

मिराज-2000 का ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान ग्वालियर एयरबेस से प्रशिक्षण उड़ान के दौरान शिवपुरी के पास क्रैश हो गया। प्रारंभिक जांच में सिस्टम खराबी को कारण बताया गया। दोनों पायलट समय पर इजेक्ट कर सुरक्षित बच गए। वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की।

2. जगुआर - अंबाला, हरियाणा (7 मार्च 2025)

अंबाला एयरबेस से उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही एक जगुआर फाइटर जेट पंचकुला के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। तकनीकी खराबी के कारण हुए इस हादसे में पायलट सुरक्षित इजेक्ट कर लिया। स्थानीय ग्रामीणों ने पायलट को पैराशूट से उतरने में मदद की।

3. एएन-32 - बागडोगरा, पश्चिम बंगाल (7 मार्च, 2025)

उसी दिन बागडोगरा एयरबेस में एक एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान क्रैश-लैंडिंग का शिकार हुआ। कारण स्पष्ट नहीं हुआ, लेकिन चालक दल सुरक्षित रहा।

4. जगुआर - जामनगर, गुजरात (2 अप्रैल 2025)

रात के प्रशिक्षण मिशन के दौरान जामनगर के सुवरदा गांव के पास एक ट्विन-सीटर जगुआर विमान क्रैश हो गया। तकनीकी खराबी के कारण दोनों पायलटों ने इजेक्ट किया, लेकिन फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव की मौत हो गई, जबकि ग्रुप कैप्टन मनीष कुमार सिंह घायल हो गए।

5. जगुआर - चूरू, राजस्थान (9 जुलाई 2025)

चूरू के भानुदा गांव (Churu Fighter Jet Crash) में एक जगुआर ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान खेतों में क्रैश हो गया। तेज धमाके के साथ विमान में आग लग गई और मलबा बिखर गया। कम से कम एक पायलट की मौत की पुष्टि हुई है, और एक अन्य की तलाश जारी है। जांच शुरू हो गई है।

क्यों हो रहे हैं बार-बार हादसे?

2025 में 7 महीनों में पांच बड़े हादसों ने भारतीय वायुसेना के पुराने बेड़े की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। हादसों के पीछे की वजह क्या? रिपोर्ट्स के अनुसार...

1. पुराने विमान:

जगुआर फाइटर जेट, जो 1970 के दशक में भारतीय वायुसेना में शामिल किए गए थे, अब 45 साल पुराने हो चुके हैं। दुनिया भर में ब्रिटेन, फ्रांस, ओमान, नाइजीरिया और इक्वाडोर जैसे देशों ने इन विमानों को रिटायर कर दिया है, लेकिन भारत अभी भी 120 जगुआर विमानों का संचालन कर रहा है। इनके रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की कमी एक बड़ी समस्या है।

2. तकनीकी खराबी:

इस साल के अधिकांश हादसों में तकनीकी खराबी को प्राथमिक कारण बताया गया है। उदाहरण के लिए, अंबाला, जामनगर, और शिवपुरी के हादसों में सिस्टम फेल्योर की बात सामने आई। पुराने विमानों के इंजन और सिस्टम आधुनिक जरूरतों के हिसाब से कमजोर पड़ रहे हैं।

3. रखरखाव और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां:

भारतीय वायुसेना सात अलग-अलग प्रकार के फाइटर जेट्स (सु-30, मिग-29, मिराज-2000, राफेल, जगुआर, मिग-21, और तेजस) का संचालन करती है, जिससे रखरखाव और मरम्मत एक जटिल चुनौती बन गई है। जगुआर के लिए स्पेयर पार्ट्स की कमी, खासकर तब जब ब्रिटेन और फ्रांस ने 1980 के दशक में इनका उत्पादन बंद कर दिया था, स्थिति को और गंभीर बनाती है।

4. मानवीय त्रुटि और प्रशिक्षण:

संसद की रक्षा समिति की 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, 2017-2022 के बीच 54% हादसे मानवीय त्रुटियों के कारण हुए। हालांकि, हादसों की दर 0.93 (2000-2005) से घटकर 0.20 (2020-2024) हो गई है, फिर भी प्रशिक्षण और सिमुलेशन की कमी एक मुद्दा है।

5. आधुनिकीकरण में देरी:

जगुआर को तेजस एमके-1ए से बदलने की योजना थी, लेकिन देरी के कारण ये पुराने विमान अभी भी उपयोग में हैं। वायुसेना के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है, जिससे पुराने विमानों पर निर्भरता बढ़ जाती है।

क्या है वायुसेना का जवाब?

हर हादसे के बाद वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की है, जो तकनीकी खराबी, मानवीय त्रुटि, और अन्य कारकों की जांच कर रही है। वायुसेना ने जगुआर विमानों को डीएआरआईएन-III अपग्रेड और नए इंजनों के साथ आधुनिक बनाने की कोशिश की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है। सोशल मीडिया पर लोग सरकार और वायुसेना के पुराने बेड़े पर सवाल उठा रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, 'तीन जगुआर चार महीने में क्रैश हो गए। पुराने विमान ही समस्या हैं।' दूसरी ओर, सरकार ने हादसों की संख्या में कमी का हवाला देते हुए सुधारों की बात कही है, लेकिन पायलटों की जान जाने से जनता में आक्रोश बढ़ रहा है।

ये हादसे न केवल वायुसेना की परिचालन क्षमता पर सवाल उठाते हैं, बल्कि देश की रक्षा तैयारियों पर भी गंभीर चर्चा की मांग करते हैं। क्या समय रहते आधुनिकीकरण और बेहतर रखरखाव इन नुकसानों को रोक सकता था? यह सवाल हर हादसे के साथ और गहरा होता जा रहा है।

ये भी पढ़ें- Churu Fighter Jet Crash: राजस्थान के चूरू में फाइटर जेट क्रैश, कई टुकड़ों में पायलट का शव! कैसे क्या हुआ?

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