Video: ना फोन, ना इंटरनेट फिर भी नेशनल सिक्योरिटी इनके हाथ में, अजीत डोभाल का सीक्रेट सिस्टम जिसने चौंका दिया
Ajit Doval Not Use Mobile Internet: नई दिल्ली के भारत मंडपम में जब 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' चल रहा था, तभी एक ऐसा खुलासा हुआ जिसने पूरे देश को चौंका दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मंच से कहा कि वे न तो इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं और न ही मोबाइल फोन। यह बात सुनकर हॉल में बैठे युवा नेता और दर्शक हैरान रह गए।
आज के डिजिटल दौर में जहां बिना फोन एक मिनट काटना मुश्किल है, वहीं देश की सुरक्षा संभालने वाला शख्स डिजिटल दुनिया से लगभग दूर है। सोशल मीडिया पर भी इस बात की चर्चा है कि आखिर नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर बिना इंटरनेट और मोबाइल कैसे काम करते हैं।

अजीत डोभाल ने खुद बताया बिना मोबाइल और इंटरनेट के कैसे करते हैं काम?
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह सच है कि वे मोबाइल और इंटरनेट से दूर रहते हैं, तो उन्होंने साफ कहा कि यह बिल्कुल सही है। उन्होंने बताया कि वे फोन का इस्तेमाल सिर्फ कुछ खास हालात में करते हैं, जैसे परिवार से बात करने या विदेशों में मौजूद लोगों से जरूरी संपर्क के लिए। बाकी कामों के लिए उनके पास ऐसे कई कम्युनिकेशन सिस्टम हैं जिनके बारे में आम लोग जानते भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि फोन और इंटरनेट ही संवाद का एकमात्र जरिया नहीं होते।
अजीत डोभाल ने कहा,
"यह सच है कि मैं इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करता। मैं फोन भी इस्तेमाल नहीं करता, सिवाय परिवार के कामों के या दूसरे देशों में लोगों से बात करने के लिए, जो जरूरी है। मैं अपना काम इसी तरह मैनेज करता हूं। बातचीत के और भी कई तरीके हैं, और कुछ और तरीकों का इंतजाम करना पड़ता है जिनके बारे में लोगों को पता नहीं होता।"
सिक्योरिटी पहले, टेक्नोलॉजी बाद में
डोभाल की इस आदत के पीछे सबसे बड़ी वजह है राष्ट्रीय सुरक्षा। डिजिटल डिवाइस हैक हो सकते हैं, डेटा लीक हो सकता है और दुश्मन देश साइबर जासूसी कर सकते हैं। ऐसे में वे खुद को इन खतरों से दूर रखते हैं। उनके लिए सबसे जरूरी है कि देश से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहे। यही वजह है कि वे पारंपरिक लेकिन बेहद सुरक्षित तरीकों से संवाद करते हैं।
युद्ध और इच्छाशक्ति पर डोभाल की दो टूक
अपने भाषण में अजीत डोभाल ने युद्ध और राष्ट्र की ताकत पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि युद्ध दुश्मन की लाशें गिनने के लिए नहीं लड़े जाते बल्कि देश की इच्छाशक्ति को तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि मजबूत मनोबल ही किसी देश की सबसे बड़ी ताकत होता है। संसाधन और हथियार तब तक बेकार हैं, जब तक उनके पीछे दृढ़ इच्छाशक्ति न हो।
अजीत डोभाल ने की इतिहास से सबक लेने की अपील
अजीत डोभाल ने भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने आजादी के लिए भारी कीमत चुकाई है। गांव जलाए गए, लोग फांसी पर चढ़े और सभ्यता को नुकसान पहुंचा। उन्होंने युवाओं से कहा कि इस इतिहास से सीख लेकर देश को फिर से उस ऊंचाई तक पहुंचाना है, जहां भारत अपने अधिकारों और मूल्यों के साथ खड़ा हो सके।
कौन हैं अजीत डोभाल (Ajit Doval Profile)
1945 में उत्तराखंड में जन्मे अजीत डोभाल 1968 बैच के केरल कैडर के IPS अधिकारी रहे हैं। वे कीर्ति चक्र पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। उनका करियर किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं रहा। मिजोरम, पंजाब और पूर्वोत्तर में उग्रवाद के खिलाफ उन्होंने जमीनी स्तर पर ऑपरेशन किए। पाकिस्तान में कई साल अंडरकवर एजेंट के रूप में काम किया और आतंकियों की अंदरूनी जानकारी जुटाई।
देश के बड़े फैसलों के मास्टरमाइंड
2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के पीछे डोभाल की रणनीति ही थी। डोकलाम विवाद हो या कश्मीर का 370, हर बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा फैसले में उनकी भूमिका अहम रही। 1999 के कंधार विमान अपहरण कांड में भी वे मुख्य वार्ताकारों में शामिल थे।
फर्जी फेसबुक अकाउंट से लेकर साइबर चेतावनी तक
पिछले साल उनके नाम से एक फर्जी फेसबुक अकाउंट वायरल हुआ था, जिसमें पाकिस्तान से साइबर हमले की चेतावनी दी गई थी। बाद में पीआईबी ने साफ किया कि डोभाल का कोई आधिकारिक फेसबुक अकाउंट नहीं है और वह पोस्ट पूरी तरह फर्जी थी। यह भी दिखाता है कि डिजिटल दुनिया कितनी खतरनाक हो सकती है।
युवाओं के लिए अजीत डोभाल का संदेश
अपने संबोधन के अंत में डोभाल ने कहा कि भारत को मजबूत बनाने के लिए हर युवा को अपनी इच्छाशक्ति बढ़ानी होगी। वही इच्छाशक्ति राष्ट्रीय शक्ति बनती है। उनके मुताबिक देश की सुरक्षा सिर्फ सेना या एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
अजीत डोभाल का मोबाइल और इंटरनेट से दूर रहना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि एक सोच है। यही सोच उन्हें देश के सबसे ताकतवर और भरोसेमंद सुरक्षा रणनीतिकारों में से एक बनाती है।
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