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नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी में अगर कुकिंग कॉम्पिटिशन हो तो कौन जीतेगा?

नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी में अगर कुकिंग कॉम्पिटिशन हो तो कौन जीतेगा?

राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी एक दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। राजनीति के मैदान में अक्सर इनके बीच मुकाबले होते रहे हैं। लेकिन अगर इनके बीच खाना बनाने की प्रतियोगिता हो तो कौन जीतेगा ? पाक् कला में नरेन्द्र मोदी आगे हैं या राहुल गांधी ? सोशल मीडिया पर इन दिनों राहुल गांधी का एक वीडियो ट्रेंड कर रहा है जिसमें वे जंगलों के बीच गांववालों के साथ प्याज का रायता बना रहे हैं। इस वीडियो में राहुल गांधी गांधी की सहजता और सादगी देखते बनती है। इस वीडियो पर राजनीतिक टीका-टिपण्णी हो सकती है। लेकिन इसका सामाजिक सरोकार जबर्दस्त है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पाक कला में खुद को पारंगत मानते हैं। दो साल पहले उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा था कि वे आज भी बढ़िया-बढ़िया रेसिपी बना सकते हैं। वे कई साल तक अपने लिए और दूसरों के खाना पकाते रहे हैं।

नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी में अगर कुकिंग कॉम्पिटिशन हो तो कौन जीतेगा?

राहुल गांधी ने कहा, मैं भी खाना बनाता हूं

राहुल गांधी 23 जनवरी को तमिलनाडु के चुनावी दौरे पर गये थे। चुनावी कार्यक्रम के तहत वे पश्चिमी तमिलनाडु के करूर लोकसभा क्षेत्र में भी गये थे। करूर से कांग्रेस की एस जोतिमणि सांसद हैं। राहुल गांधी, सांसद जोतिमणि और पार्टी के राज्य प्रभारी दिनेश गुंडू के साथ करूर के एक सुदूर गांव में गये थे। जंगल के बीच इस गांव में लोगों ने मशरुम बिरयानी और रायता का वनभोज आयोजित किया था। दक्षिण भारत की खांटी देहाती शैली में वनभोज का ये वीडियो विलेज कुकिंग चैनल ने पोस्ट किया है। जमीन में गड्ढा खोद कर देसी चूल्हा बनाया जाता है। जंगल की लकड़ी से खाना बनता है। मशरूम बिरयानी बन जाने के बाद जब रायता बनाने की बारी आती है तो राहुल गांधी गांव वालों से पूछते हैं, क्या मैं इसको मिलाने में मदद करूं ? राहुल गांधी अंग्रेजी में पूछते हैं। सांसद जोतिमणि उसका तमिल में अनुवाद करती हैं। इसके बाद राहुल गांधी रायता के लिए तमिल शब्द वेंगयम का जोर से उच्चारण करते हैं। फिर परात में कटे प्याज को बड़े से बर्तन में डालते हैं। मिट्टी के वर्तन में जमे दही को उसमें गिराते हैं। नमक मिलाते हैं। इसके बाद एक बड़े चम्मच से दही और प्याज को मिलाते हैं। रायता बनाते समय वे लोगों से अंग्रेजी में कहते हैं, मैं भी खाना बनाता हूं। बनाने के बाद वे बायीं हथेली पर थोड़ा सा रायता रखते हैं। फिर चख के कहते हैं, बहुत अच्छा। बिल्कुल एक खानसामा की तरह।

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राहुल गांधी की सहजता

राहुल गांधी एक बड़े नेता की चमक-दमक से दूर बेहद साधारण वेशभूषा में हैं। एक नीली टी शर्ट और ढीला-ढाला पतलून पहने हुए हैं। पैरों में साधारण स्पोर्ट्स शू है। देहाती परम्परा के मुताबिक जंगल की छांव में ताड़ के पत्तों से बुनी चटाई बिछायी जाती है। राहुल गांधी अन्य लोगों के साथ पालथी मार के बैठते हैं। खाना परोसने के लिए केला का पत्ता लाया जाता है। जैसे गांव के भोज में सबसे पहले पत्तल को पानी से धोया जाता है। वैसे ही राहुल गांधी को एक लोटे से पानी दिया जाता है। वे अंजुली में पानी लेकर पत्तल पर डालते हैं। वे मशरूम बिरयानी की खुशबू की बार-बार तारीफ करते हैं। फिर बतकही के साथ खाना शुरू होता है। खाना बनाना वाले गांव के साधारण लोग हैं। राहुल गांधी की आत्मियता देख कर गांव वाले गदगद हो जाते हैं। जाहिर है राहुल गांधी जैसे बड़े नेता के साथ उनका उठना, बैठना और खाना एक यादगार लम्हा था। राहुल गांधी गांव वालों के कुकिंग को प्रमोट करने के लिए बाइट भी देते हैं। अगर राजनीतिक चश्मे से इस वीडियो को न देखा जाए तो इसका देसी अंदाज लाजवाब है।

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नरेन्द्र मोदी का पाक् कला

नरेन्द्र मोदी ने 2019 में लोकसभा चुनाव के पहल कई न्जूज चैनल्स को इंटरव्यू दिये थे। इस दौरान उन्होंने बताया था, “35 साल तक भिक्षा मांग के गुजारा किया था। मैं किसी के घर में अचानक चला जाता था। घर में अगर कुछ बचा होता तो खा लेता वर्ना यूं ही लौट जाता।” नरेन्द्र मोदी ने 18-19 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था। 35 साल तक घर नहीं लौटे थे। इसी दौरान उन्होंने भिक्षा मांग कर खाने की बात कही थी। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। जब वे गुजरात लौटे तो अहमदाबाद के डॉ. हेडगवार भवन में रहने लगे। उस समय नरेन्द्र मोदी संघ के साधारण कार्यकर्ता थे। सुबह पांच बजे उठते। हेडगवार भवन में झाड़ू-पोंछा लगाते। फिर चाय बनाते। यहां रहने वाले लोगों को उठा कर सुबह की चाय देते। इसके बाद शाखा चले जाते। वहां से आने के बाद सभी लोगों के लिए नास्ता और खाना बनाते। यानी नरेन्द्र मोदी को खाना बनाने का ज्यादा अनुभव है। उस समय वे बीस-पच्चीस लोगों के लिए खाना और नास्ता बनाते थे। उनका कहना है कि वे पोहा और खिचड़ी बहुत अच्छा बनाते हैं। अपने इंटरव्यू में नरेन्द्र मोदी ने कहा था, मैं आज भी बढ़िया- बढ़िया रेसिपी बना सकता हूं।

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खाना बनाने में माहिर कौन ?

राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी के खान-पान में बहुत अंतर है। नरेन्द्र मोदी शाकाहारी हैं तो राहुल गांधी मांसाहारी। नरेन्द्र मोदी को नास्ते में पोहा या ढोकला और खाने में चावल, दाल, रोटी, सब्जी या फिर खिचड़ी पसंद है। वे इन व्यंजनों के बनाना भी जानते हैं। दूसरी तरफ राहुल गांधी सुबह में कॉफी, ऑमलेट और इटैलियन सूप लेते हैं। दोपहर के भोजन में गार्लिक पिज्जा लेते हैं। रात में सब्जी, दाल, रोटी या फिर राजमा-चावल खाते हैं। दो साल पहले एक रिपोर्ट में कहा गया था कि राहुल गांधी के एक दिन खाने पर करीब सात सौ रुपये खर्च होते हैं। राहुल गांधी शौकिया तौर पर कुछ हल्की फुल्की चीजें बना लेते हैं। दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी अपने शुरुआती दिनों में 20-25 लोगों के लिए खाना और नास्ता बनाते थे। राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी के खानपान में तो अंतर है लेकिन एक चीज कॉमन है। वो है फिटनेस को लेकर मुस्तैदी। राहुल गांधी जिम में कसरत करते हैं। साइकिलिंग करते हैं। तो नरेन्द्र मोदी फिट रहने के लिए योग और ध्यान का सहारा लेते हैं।

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